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दुर्गा पूजा में नींबू का प्रयोग क्यों किया जाता है?
तंत्र विद्या में नींबू का प्रयोग बुरी आत्माओं को दूर करने के लिए किया जाता है। बुरी आत्माओं को भगाने के लिए नींबू को त्रिशूल, मूर्ति, यज्ञ कुंड और दरवाजों के दोनों तरफ इस्तेमाल किया जाता है। भारत में बुरी नजर से बचने के लिए इसका प्रयोग मिर्च के साथ भी किया जाता है।
यह भी माना जाता है कि इसे बीमार व्यक्ति के ऊपर टाँकने से बीमारी ठीक हो जाती है क्यों कि यह शरीर में मौजूद बुरी आत्मा को भगा देता है। दुर्गा माँ की पूजा भी बुरी आत्माओं से लड़ने के लिए की जाती है। माता को नींबू से बने आभूषण चढ़ाएँ जाते हैं।

दुर्गा पूजा में नींबू के दीपक का इस्तेमाल किया जाता है
नींबू पतले छिलके वाला हो (इसे विषम संख्या में लें, ज्यादा से ज्यादा 9)। ज्यादा लचीलेपन के लिए इसे थोड़ा गोल किया जा सकता है। इसमें नींबू को लंबे के बजाय आड़ा काटें। इसका रस निकाल दें। अब इसके अंदर का गुदा निकालकर कटोरी जैसे दोनों हिस्सों को एक दूसरे के ऊपर रख दें। अब इसमें घी या तेल डालकर दीपक जला लें।
नींबू के दीपक और बाती का महत्व
नींबू हमारा प्रतीक है और इसके माध्यम से हम देवता को हमारा आंतरिक भाग या अन्तर्मन दिखाते हैं। भगवान के सामने माया, लालच, वासना और क्रोध का त्याग कर दें। नींबू का सफ़ेद हिस्सा हमारी पवित्र भावना को और पीछे का डार्क या हरा हिस्सा माया है ।
केले के तने से बनी बाती भगवान के सामने हमारे अपराधों को दूर करने और पित्रों के श्राप से मुक्ति के लिए है। रूई की बाती अच्छे भविष्य के लिए है, कमल के तने की बाती पूर्वजन्म के कर्मों को दूर कर खुशहाल और समृद्ध जीवन के लिए है।
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