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क्यों गणेश चतुर्थी को नहीं करने चाहिए चंद्रदर्शन, देख लेने पर करें ये उपाय

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी यानी गणेश चतुर्थी जो कि इस बार 13 सितम्बर को हैं। इस दिन हर घर में गणेश जी विराजते हैं। अगर आपने चांद का दीदार किया तो आप पर झूठा कलंक लग सकता है। यूं तो चांद को आप पूरे साल कभी भी आसमान में निहार सकते हैं। लेकिन इस रात को चांद देखने से आप पर मिथ्या दोष यानी मिथ्या कलंक लग सकता है, जैसे कि चोरी का आरोप। शास्त्रों में भी लिखा है कि गणेश चतुर्थी को आसमान में चांद को देखना अशुभ होता है।
इस बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी है। आइए जानते है है कि गणेश चतुथी के दिन चांद को क्यों नहीं देखना चाहिए और अगर देख भी लिया तो इससे क्या नुकसान होते हैं और इससे बचने के क्या उपाय हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार
चन्द्रमा को अपने रूप का बहुत अभिमान था। गणेश चतुर्थी के दिन गणेश जी के गजमुख एवं लबोदर रूप को देखकर चन्द्रमा ने हंस दिया। गणेश जी इससे नाराज हो गये और चन्द्रमा को शाप दिया कि आज से जो भी तुम्हें देखेगा उसे झूठा कलंक लगेगा। इसके बाद गणेश जी के शाप से चन्द्रमा दुःखी हो गए और घर में छुप कर बैठ गए। चन्द्रमा की दुःखद स्थिति को देखकर देवताओं ने चन्द्रमा को सलाह दिया कि मोदक एवं पकवानों से गणेश जी की पूजा करो। गणेश जी के प्रसन्न होने से शाप से मुक्ति मिलेगी।
चन्द्रमा ने गणेश जी की पूजा की और उन्हें प्रसन्न किया। गणेश जी ने कहा कि शाप पूरी तरह समाप्त नहीं होगा ताकि अपनी गलती चन्द्रमा को याद रहे। दुनिया को भी यह ज्ञान मिले की किसी के रूप रंग को देखकर हंसी नहीं उड़ानी चाहिए। इसलिए अब से केवल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन जो भी चन्द्रमा को देखेगा उसे झूठा कलंक लगेगा।

कृष्ण जी भी न बच पाएं थे मिथ्या कलंक से
गणेश चतुर्थी पर इस रात्रि गलती से भी यदि चंद्र दर्शन से बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार यदि भूल से भी चौथ का चंद्रमा दिख जाए तो श्रीमद् भागवत् के 10वें स्कन्ध के 56-57वें अध्याय में दी गई स्यमंतक मणि की चोरी की कथा का आदरपूर्वक श्रवण करना चाहिए। कहते हैं भगवान श्रीकृष्ण भी इस तिथि को चंद्र दर्शन करने के पश्चात मिथ्या कलंक से नहीं बच पाए थे। उन पर एक व्यक्ति की हत्या का आरोप लगा था।
नारद जी से जब भगवान श्री कृष्ण ने अपने ऊपर लगे झूठे आरोपों का कारण पूछा तब नारद जी ने यह बताई की, इस दिन गणेश जी ने चन्द्रमा को शाप दिया था।

क्या करें अगर हो जाए चतुर्थी पर चंद्र दर्शन
शास्त्र गणेश पुराण के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्रमा देख लेने पर कलंक अवश्य लगता हैं। अगर इस दिन गलती से चंद्र दर्शन हो जाए तो उसके निवारण के निम्नलिखित उपाय करें जिसे चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक के दोष से मुक्त हो जाएंगे।

इन श्लोक का करें जाप-
भाद्रशुक्लचतुथ्रयायो ज्ञानतोअज्ञानतोअपिवा। अभिशापीभवेच्चन्द्रदर्शनाद्भृशदु:खभाग्॥
सिंहः प्रसेनमवधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मारोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः॥

ऐसे नहीं लगेगा कलंक
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चन्द्रमा बहुत ही सुन्दर होती है। इसे देखने की चाहत है तो संध्या के समय हाथ में फल अथवा दही लेकर चन्द्रमा का दर्शन करें। ऐसा करने पर चन्द्रमा को देखने से कलंक नहीं लगता है। एक अन्य विधि यह है कि पूरे भाद्रपद मास में हर दिन चन्द्रमा को देखें। जो नियमित चन्द्रमा का दर्शन करता है शाप के अशुभ प्रभाव से बचा रहता है।

21 दूर्वा का मुकुट बनाएं
अगर आपने चांद देखने की गलती कर दी है तो इस दिन भागवत की स्यमंतक मणि की कथा सुने और पाठ करें। या फिर मौली में 21 दूर्वा बांध कर मुकुट बनाएं और उसे गणेश जी को पहनाएं।



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