Chandra Grahan 2023: शास्‍त्रों में क्‍यों है ग्रहण के दौरान सेक्‍स करने की मनाही, जाने इसके कारण?

शनिवार रात 28 अक्‍टूबर को इस साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण देखने को मिलेगा। भारत में ग्रहण की शुरुआत रात में 1 बजकर 5 मिनट से होगी। चंद्र ग्रहण रात 2 बजकर 24 मिनट तक चलेगा। ऐसे में ये ग्रहण 1 घंटा, 19 मिनट चलेगा। 28-29 अक्‍टूबर की रात में लगने जा रहा ये चंद्र ग्रहण आंशिक होगा। पिछले सप्ताह हुए सूर्य ग्रहण के 14 दिनों बाद यह चंद्र ग्रहण होने जा रहा है।

शास्त्रों के अनुसारग्रहण के दौरान कई काम करने की मनाही होती है, इसमें खाना-पीना, ईश्वर की मूर्ति को छूना आदि तो शामिल होते है, लेकिन ग्रहण के दौरान रोमांस या सेक्स की भी मनाही होती है। आप सोच रहे होंगे कि ग्रहण और शारीरिक संबंध बनाने के बीच क्‍या संबंध होते हैं। हालांकि इसके पीछे ज्‍योतिषीय तर्क के साथ ही वैज्ञानिक तर्क भी है। आइए जानते है क्‍यों ग्रहण के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से परहेज करना चाह‍िए।

 नकारात्‍मक ऊर्जा का रहता है वास

नकारात्‍मक ऊर्जा का रहता है वास

ग्रहण के दौरान रोमांस क्यों नहीं करना चाहिए इस पर ज्‍योतिषाचार्यों का मानना है कि दरअसल, ग्रहण के दौरान कई प्रकार की नकारात्‍मक ऊर्जाएं पृथ्‍वी पर पड़ती हैं। यानी उस दौरान आप जहां भी होंगे आपके चारों ओर नकारात्‍मक ऊर्जा प्रवाहित हो रही होगी। अब नकारात्‍मक ऊर्जा के बीच भोजन करना, भोजन पकाना, मस्तिष्‍क पर जोर देने वाले काम करने से शरीर पर प्रभाव पड़ते हैं।

रोमांस क्यों नहीं

रोमांस क्यों नहीं

ग्रहण के दौरान करीब आने से बच्‍चा अपंग पैदा हो सकता है, इससे उसका मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य भी प्रभावित हो सकता है। बच्चे की योजना न हो तो भी आपका करीब आना, आपके पार्टनर के मस्तिष्‍क पर बुरा असर डाल सकता है।

आनंद नहीं मिल पाता है

आनंद नहीं मिल पाता है

संभोग दो लोगों को शारीरिक और मानसिक तौर पर मजबूत करता है। संभोग आनंद के लिए है। अगर आपको किन्‍हीं खास परिस्थितियों में इसे करने के लिए मना कर दिया जाए, तो निश्चित ही इसे करते हुए भी आप इसका आनंद नहीं ले पाएंगे। इसके अलावा आसपास मौजूद नकारात्‍मक ऊर्जा के वजह से आप इसका आनंद नहीं ले पाएंगे।

पुराणों में कहा गया है

पुराणों में कहा गया है

ग्रहण के दौरान सेक्स को वर्जित माना गया है। पुराणों में कहा गया है कि ग्रहण के दौरान शारीरिक संबंध बनाने से अगले जन्‍म में व्‍यक्ति सुअर की योनी में जन्‍म लेता है।

नहीं करना चाहिए भोजन

नहीं करना चाहिए भोजन

स्कन्द पुराण के अनुसार ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से बारह वर्षों का एकत्र किया हुआ सब पुण्य नष्ट हो जाता है। देवी भागवत के अनुसार सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक अरुतुन्द नामक नरक में वास करता है।

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