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क्यों हैं तिरुपति बालाजी की मूर्ति में इतनी शक्ति
यह मंदिर तिरुमाला पर्वत पर बना हुआ है और हिन्दुओं के सबसे पवित्र माने जाने वाले तीर्थस्थलों में से एक है। इसे ‘तिरुपति वेंकेटेश्वर मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।
तिरुपति बालाजी मंदिर भारत का एक बेहद प्रसिद्ध मंदिर हैं। यह मंदिर तिरुपति में स्थित है जो आंध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में है। यह मंदिर तिरुमाला पर्वत पर बना हुआ है और हिन्दुओं के सबसे पवित्र माने जाने वाले तीर्थस्थलों में से एक है। इसे 'तिरुपति वेंकेटेश्वर मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है।
बालाजी को भगवान विष्णु का ही एक रूप माना गया है। 'वेंकटेश्वर’ और 'श्रीनिवास’ भी भगवान विष्णु के ही नाम हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर में हर साल लाखों की संख्या में भक्त भगवान बालाजी के दर्शनों की अभिलाषा लेकर आते हैं और अपने इष्टदेव के दर्शन पाकर अपनेआप को धन्य मानते हैं।

बालाजी के दर्शन के अनुभव को शब्दों के द्वारा बताना आसान नहीं है। बालाजी की सुंदरता को बयान करना भी बेहद मुश्किल है। गर्भ गृह में स्थित बालाजी की मूर्ति में एक हाथ जहाँ आशीर्वाद की मुद्रा में है, वहीं दूसरा हाथ ऐसी मुद्रा में है कि लगता है भगवान अपने भक्तों से कुछ मांग रहे हैं।
ऐसा माना जाता है कि मनोकामना पूरी होने पर भक्त का कर्तव्य है कि वह बालाजी को विशेष चढ़ावा चढ़ाये या बालाजी के नाम पर कुछ ख़ास काम करे।

ऐसा कहा जाता है कि कलियुग में भगवान विष्णु के अवतार हैं बालाजी। जो सबके दुखों का नाश करेंगे।
पद्मावती से शादी होने के बाद अपनी पत्नी देवी लक्ष्मी के गुस्से का सामना न कर पाने के कारण उन्हों ने अपने आपको पत्थर में बदल लिया था। यही कारण है कि यह मूर्ति बहुत तेजस्वी है।

भगवान श्रीनिवास बालाजी सारे देवी देवताओं में सबसे आमिर भगवान् हैं। यहाँ उनके भक्त अपनी मर्ज़ी से पैसे और आभूषण दान करते हैं। इसी से जुडी एक कथा है कि पद्मावती से विवाह करने के लिए उन्हों ने कुबेर से धन उधर लिया था। जिसे चुकाने के लिए आज भी लोग वह आभूषण और पैसों का दान करते हैं।
भगवान बालाजी को इसलिए इतना धन चढ़ाया जाता है क्योंकि अंत में मनुष्य को अपनी भौतिक इच्छाओं को समाप्त कर अपने आपको परमात्मा को सौंप देना चाहिए।



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