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शनि देव तेल चढाने से क्यों होते हैं प्रसन्न, जानें इसका हनुमान जी से क्या है संबंध
शनिवार के दिन शनि देव के मंदिरों में भक्तगण तेल चढाते हुए दिख जाएंगे। कई शनि मंदिरों में तो भारी भीड़ देखी जाती है। लोग काला तिल, काला वस्त्र और काली उड़द दाल भी चढ़ावे में देते हैं। सवाल है की शनि देव को तेल क्यों चढ़ाते हैं और और शनि देव को काले रंग का सामान क्यों पसंद है? आइये आपको बताते हैं।

क्या शनिदेव से डरना चाहिये?
लोगो में ऐसा भ्रम है कि शनि देव अशुभ और दुःख के कारक हैं। शनि की साढ़े साती और ढैय्या से लोग काफी डरे रहते हैं। मगर वास्तव में ऐसा नहीं है। शनिदेव न्याय के देवता हैं इसलिए अगर कोई व्यक्ति गलत काम और मंशा रखता है तो फिर शनि देव उसे दण्डित करते हैं। इसके विपरीत अगर आप अच्छे कर्म करते हैं और आपकी नीयत साफ़ है तो शनि देव कृपा भी बरसाते हैं। वैसे शनिदेव की प्रकृति तुरंत क्रोधित और तुरंत खुश हो जाने वाली भी है।

शनिदेव को क्या है पसंद?
पुराणों के अनुसार शनिदेव को काला तिल, तेल, काला वस्त्र, काली उड़द आदि बहुत प्रिय है। मान्यता है कि काला तिल और तेल से शनिदेव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं।
गौरतलब है कि श्रावण मास में शनिवार का व्रत प्रारम्भ करना बहुत शुभ माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में स्नान ध्यान करके शनि देव का स्मरण करना चाहिए और शनि मंदिर में जाकर नीले लाजवन्ती के फूल, तिल, तेल, गुड़ अर्पण करना चाहिए।

शनिदेव को क्यों चढाते हैं तेल?
रामायण काल में हनुमान राम के बहुत प्रिय हो गये थे और हनुमान के बल बुद्धि और पराक्रम की चर्चा चारों ओर हो रही थी। शनि देव को इससे इर्ष्या हो गयी और वे हनुमान से युद्ध करने निकल पड़े। हनुमान ने अनुरोध किया कि युद्ध ना करें लेकिन शनि देव माने नहीं। फिर क्या था, दोनों के बीच लंबे समय तक भीषण युद्ध चला। श्री राम की कृपा से हनुमान ने शनि देव को परास्त कर दिया। लेकिन इस युद्ध के दौरान शनि देव को काफी दर्द होने लगा। उन्होंने हनुमान से मदद की गुहार लगाई। हनुमान ने शनि देव के चोट पर तेल लगाया जिससे उनकी पीड़ा दूर हो गयी। शनि देव तेल लगाने और पीड़ा दूर होने से काफी प्रसन्न हो गये। तभी से लोग शनि देव को प्रसन्न करने के लिए तेल चढाते हैं।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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