क्‍योकि आप बुद्धा हैं

Buddha
टोक्‍यो में मिजी काल के दौरान, दो मास्‍टर थे। दोनों का स्‍वभाव एक दूसरे से बिल्‍कुल अलग था। पहले उन्‍सो थे। वह शिन्‍गॉन में अध्‍यापक थे। उन्‍सो, बौद्ध धर्म के सिद्धान्‍तों का नियम से पालन करते थे। उन्‍होने जीवन में कभी भी शराब नहीं पी और सूर्योदय होने के बाद 11 बजे के बाद वह एक निवाला भी नहीं खाते थे।

दूसरे तंजान थे, वह इम्‍पीरियल विश्‍वविधालय में दर्शनशास्‍त्र के प्रोफेसर थे। खुद को बौद्ध धर्म के सिद्धान्‍तों से दूर ही रखते थे, जब उनका मन होता वह खाते पीते और सोते थे।

एक दिन उन्‍सो, तंजान से मिलने उनके घर पहुंचे। उस समय तंजान शराब का आनंद उठा रहे थे, जबकि बौद्ध धर्म के सिद्धान्‍तों के अनुसार शराब की एक बूंद भी वर्जित है।

तंजान ने उन्‍सो का स्‍वागत किया और शराब पीने के लिए पूछा। उन्‍सो ने कहा- मैं कभी नहीं पीता। तंजान ने तुरन्‍त कहा- जो कभी नहीं पीता वह इंसान नहीं होता। उन्‍सो को गुस्‍सा आ गया, क्रोधित स्‍वर में उन्‍होंने कहा कि- तुम कैसे मुझे इंसान नही कह सकते अगर मैं तुम्‍हारे साथ शराब पीने के लिए राजी नही हुआ। अगर मैं इंसान नही हूं तो क्‍या हूं?

"आप बुद्धा हैं।"- तंजान ने कहा

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