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Skand Sashti 2026: स्कंद षष्ठी का व्रत कब रखा जाएगा? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
Skand Sashti 2026: हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व है। यह दिन भगवान शिव और माता गौरी के पुत्र कार्तिकेय भगवान को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार, स्कंद षष्ठी का व्रत हर महीने की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाता है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से भगवान् कार्तिकेय की पूजा करते हैं व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान सुख और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। तो आइए, जानते हैं मार्च महीने में चैत्र माह का स्कंद षष्ठी व्रत की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में विस्तार से -

कब है स्कंद षष्ठी व्रत?
चैत्र माह की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि की शुरुआत 23 मार्च, सोमवार की शाम को 6 बजकर 38 मिनट से हो रही है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन 24 मार्च, मंगलवार को शाम 4 बजकर 7 मिनट पर होगा। ऐसे में, उदयातिथि के आधार पर चैत्र स्कंद षष्ठी का व्रत 24 मार्च को रखा जाएगा।
स्कंद षष्ठी व्रत महत्व
स्कंद षष्ठी का व्रत भगवान कार्तिकेय की पूजा के लिए बेहद खास माना जाता है। यह दिन शक्ति, विजय और साहस का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं एक अनिसार, स्कंद षष्ठी का व्रत करने से जीवन में सुख-समृद्धि और विजय की प्राप्ति होती है। खासतौर पर, संतान सुख की कामना और संतान के खुशहाल जीवन के लिए यह व्रत खास होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से संतान सुख की प्राप्ति के साथ ही संतान के जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है। इसके अलावा, इस व्रत को करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और शारीरिक व मानसिक शक्ति मिलती है।
स्कंद षष्ठी पूजा विधि
स्कंद षष्ठी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें और एक चौकी स्थापित कर भगवान कार्तिकेय और शिव परिवार की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें।
फिर भगवान को फूल, फल, भोग, धूप,वस्त्र, सिंदूर, कलावा और अक्षत अर्पित करें।
फिर घी का दीपक जलाएं और भगवान कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करें।
इस दिन पूजा के दौरान स्कन्द षष्ठी की कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
अंत में आरती करके प्रसाद सभी में वितरित करें और भगवान से सुख-शांति व समृद्धि की कामना करें।



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