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Som Pradosh Vrat Katha: सोम प्रदोष व्रत के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, दूर होंगे सारे दुख
Som Pradosh Vrat Katha: 17 नवंबर, सोमवार को सोम प्रदोष व्रत है जो अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। शास्त्रों में कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा के साथ सोम प्रदोष व्रत रखता है और व्रत कथा का पाठ करता है, उस पर महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं सुनकर उन्हें वरदान प्रदान करते हैं।
यदि आप भी महादेव की कृपा पाना चाहते हैं और प्रदोष व्रत रखा है तो ये कथा अवश्य पढ़ें। यह कथा दुखों को हरती है और जीवन में नई ऊर्जा व सकारात्मकता लाती है। साथ ही हम आपके लिए लेकर आए हैं आरती और ये भी जान लें कि कैसे करें पूजा।

सोम प्रदोष व्रत कथ (Som Pradosh Vrat Katha)
प्राचीन समय की बात है। एक नगर में एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह बड़ा ही धर्मात्मा, सत्कर्मी और शिवभक्त था, लेकिन गरीबी के कारण उसे अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। एक दिन ब्राह्मण अत्यंत दुखी होकर भगवान शिव के मंदिर पहुँचा और शिवलिंग के सामने बैठकर रोने लगा। उसकी सच्ची भक्ति देखकर उसी समय भगवान शिव के गण नंदी प्रकट हुए और बोले- "हे भक्त! तुम्हारी परेशानी अब समाप्त होने वाली है। तुम सोमवार के दिन आने वाले प्रदोष का व्रत श्रद्धा से करो। इस व्रत में महादेव को बिल्वपत्र, धूप, दीप और जल अर्पित करो। व्रत कथा सुनो और प्रदोष काल में शिवजी का ध्यान करो।''
ब्राह्मण ने नंदीजी के बताए अनुसार सोम प्रदोष व्रत रखा। पूरे दिन उपवास कर उसने सच्चे मन से शिवजी का स्मरण किया। संध्या के समय जब उसने प्रदोष व्रत की कथा पढ़ी, तो उसे भीतर से अद्भुत शांति का अनुभव हुआ। व्रत पूरा होने पर अचानक उसके घर में सुख-समृद्धि आने लगी। धन की प्राप्ति हुई, परिवार का कल्याण हुआ और उसकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होने लगीं। यह सब देखकर नगर के लोग भी सोम प्रदोष व्रत करने लगे और सभी के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगे। शास्त्र कहते हैं कि जैसे इस ब्राह्मण का कल्याण हुआ, वैसे ही जो भी भक्त सच्चे मन से प्रदोष व्रत रखता है, उसके जीवन से दुख-दरिद्रता दूर होती है और महादेव अपनी कृपा अवश्य बरसाते हैं।
शिव आरती (Som Pradosh Vrat ki Aarti)
"ॐ जय शिव ओंकारा"
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्द्धांगी धारा... ॐ जय शिव...
एकानन चतुरानन पंचानन राजे
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे... ॐ जय शिव...
दिशा में दिग्दिगम्बरे, शिवलिंग विराजे
गंगाधर शंकर, त्रिभुवन के राजा... ॐ जय शिव...
भस्म अंग पर शोभित, नन्दी बैल सवारी
कर्पूर-गौर मनोहर, शिवशंकर प्यारे... ॐ जय शिव...
देवों के देव महादेव, त्रिभुवन के स्वामी
कष्टों को हरने वाले, भक्तों के हितकारी... ॐ जय शिव...
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा
हर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करो... ॐ जय शिव...

सोम प्रदोष व्रत में क्या करें (Do's)
1. शिव-पार्वती की उपासना करें
2. बेलपत्र जरूर चढ़ाएं
3. ईमानदारी से व्रत का संकल्प लें
4. ब्रह्मचर्य का पालन करें
5. जरूरतमंदों को दान दें
6. इस दिन क्रोध न करें
सोम प्रदोष व्रत में क्या न करें (Don'ts)
1. घर में झगड़ा या तनाव न करें
2. तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन, नॉनवेज) न खाएं
3. शिवलिंग पर हल्दी न चढ़ाएं
4. लोहे की वस्तुएं दान न करें
5. सूर्यास्त से पहले पूजा न करें
6. काले रंग के कपड़े न पहनें
सोम प्रदोष व्रत पूजन सामग्री और विधि
गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी (पंचामृत), बेलपत्र, चंदन, फूल, फल-नैवेद्य, धूप-दीप, अक्षत, रोली
पूजा समय: सूर्यास्त के बाद 1.5 घंटे के भीतर
शिवलिंग को गंगा जल व पंचामृत से अभिषेक करें।
बेलपत्र, सफेद फूल, धूप-दीप चढ़ाएं।
शिव चालीसा, महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
सोम प्रदोष व्रत कथा पढ़ें।
अंत में शिव आरती करें।



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