शारदीय नवरात्रि से कुछ घंटे पहले सूर्य ग्रहण! जानें इसका पूजा-पाठ पर क्या होगा असर?

Shardiya Navratri 2025: 22 सितंबर 2025 से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा का धरती पर आगमन होता है और वो अपने भक्तों की भक्ति को देखती हैं। भक्त नौ दिनों तक माता के अलग-अलग रूपों की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। घर में माता की चौकी लगती है और कलश स्थापना होती है। अष्टमी और नवमी के दिन माता के पूजन के रूप में कन्या पूजन किया जाता है। हर घर से माता की आरती की आवाज आती है और हवन की खुशबू आती है। लेकिन इस बार नवरात्रि से कुछ घंटे पहले सूर्य ग्रहण लग रहा है।

जी हां, अंतिम श्राद्ध वाले दिन यानी अमावस्या को सूर्य ग्रहण है, खास बात ये है कि श्राद्ध के पहले दिन भी यानी 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण लगा था। आप तो ये जानते ही हैं कि ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ करना वर्जित होता है। ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या सूर्य ग्रहण का असर शारदीय नवरात्रि की पूजा पर पड़ेगा? आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

Surya grahan 2025 date

कब है सूर्य ग्रहण?

21 सितंबर 2025 को सूर्य ग्रहण पड़ रहा है, और इससे पहले 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण पड़ा था। यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण है जो 21 तारीख को रात को 11 बजे लगेगा और 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। लोगों का सवाल है कि क्या भारत में सूर्य ग्रहण दिखेगा या नहीं? इसका जवाब है कि रात में ग्रहण लग रहा है तो ऐसे में ये साफ हो गया है कि भारत में तो सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देने वाला है।

सूर्य ग्रहण का शारदीय नवरात्रि पर क्या असर?

सूर्य ग्रहण का शारदीय नवरात्रि पर और पूजा-पाठ पर असर पड़ेगा या नहीं लोगों का ये सवाल है। बता दें कि भारत में सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा इसलिए सूतक काल भी नहीं लगेगा और वो मान्य नहीं होगा। ऐसे में शारदीय नवरात्रि पर सूर्य ग्रहण का कोई असर नहीं पड़ने वाला है और न ही पूजा-पाठ पर कोई असर पड़ेगा।

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है?

शारदीय नवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत महत्व माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। इस बार घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 6 मिनट से 8 बजकर 6 मिनट तक रहने वाला है। घटस्थापना का दूसरा मुहूर्त 11 बजकर 49 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक रहने वाला है।

इस बार क्या होगी माता की सवारी?

हर बार माता की सवारी अलग होती है। इस बार शारदीय नवरात्रि पर माता हाथी पर सवार होकर आने वाली हैं। शास्त्रों के अनुसार, माता हाथी पर सवार होकर आ रही हैं जो एक शुभ संकेत है। माना जाता है कि इस वाहन का आगमन खुशहाली, शांति और तरक्की का प्रतीक है। यह संकेत समाज में सुख-समृद्धि और हर क्षेत्र में प्रगति का सूचक है।

Story first published: Tuesday, September 9, 2025, 16:20 [IST]
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