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Surya Grahan 2025 : कल लगने जा रहा है साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें इस दिन क्या करें और क्या नहीं?
Surya Grahan 2025 : शनि अमावस्या के दिन, जब शनिदेव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और साल का पहला आंशिक सूर्य ग्रहण भी लग रहा है, यह ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। भले ही यह ग्रहण भारत में दिखाई न दे, फिर भी इसके प्रभाव से बचने के लिए सावधानी बरतना आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान भोजन पकाने और खाने, सोने, धार्मिक कार्यों और शुभ कार्यों की मनाही होती है। इस समय भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर की शुद्धि करें। गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए ताकि नकारात्मक प्रभाव न पड़े। ग्रहण के दौरान भोजन पकाने-खाने, सोने और शुभ कार्यों से बचें।
भगवान का ध्यान करें, मंत्र जाप करें और ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान कर शुद्धिकरण करें। गर्भवती महिलाएं विशेष सतर्कता बरतें। आइए जानते हैं कि इस l इस दिन पर कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए! आइए जानते हैं कि इस शुभ दिन पर कौन-सी गलतियों से बचना चाहिए!

ये गलतियां करने से बचें
सूर्य ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ कार्य करने की मनाही होती है। आमतौर पर इस दौरान इन चीजों से बचने की सलाह दी जाती है:
भोजन और पानी ग्रहण करने से बचें - मान्यता है कि ग्रहण के समय भोजन करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मंदिर या पूजा स्थान को स्पर्श न करें - इस समय पूजा-पाठ नहीं किया जाता।
गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए - कहा जाता है कि इस दौरान बाहर निकलना और कैंची, सुई जैसे तेजधार वस्तुओं का उपयोग करना अशुभ हो सकता है।
ग्रहण को नग्न आंखों से न देखें - वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह हानिकारक हो सकता है।
नींद से बचें - शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में सोना शुभ नहीं माना जाता।
खुले स्थान पर न जाएं - विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को इससे बचने की सलाह दी जाती है।
हालांकि, यह धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका पालन व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे सुरक्षित रूप से देखने के लिए उचित सावधानियां बरतनी चाहिए।
ग्रहण के दौरान क्या करें?
- सूतक काल से पहले खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते या कुशा डाल दें, ताकि वे दूषित न हों।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ और मंत्र जाप करें, जिससे ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव कम हो।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और मंदिर की सफाई व दान करें।
- शनि अमावस्या को शाम के समय पीपल के नीचे तेल का दिया जलाएं।



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