Latest Updates
-
Fry Pan Method Fish Masala Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा चटपटा फिश मसाला -
Pahadi Green Superfood Kafuli Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और पौष्टिक स्वाद -
टीम इंडिया की जर्सी पाकर इमोशनल हुए 15 साल के वैभव सूर्यवंशी, कही ये बड़ी बात, देखें Video -
क्यों मनाते हैं International Olympic Day? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम -
कौन हैं WhatsApp के नए CEO कुणाल शाह? न इंजीनियरिंग, न MBA डिग्री, फिर भी करोड़ों में है नेट वर्थ -
Mahesh Navami 2026: महेश नवमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, इन उपायों को करने से मिलेगी हनुमान जी की विशेष कृपा -
Happy Mahesh Navami 2026 Wishes: महेश जिनका नाम है...महेश नवमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 23 June 2026: मंगलवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी बजरंगबली की कृपा, जानें अपना भाग्य -
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क
Swaminarayan Jayanti 2023: भारत के सबसे भव्य मंदिर में होती है भगवान स्वामीनारायण की पूजा
हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को स्वामीनारायण जयंती मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 30 मार्च, गुरुवार को पड़ रहा है। स्वामीनारायण जी को भगवान का ही एक स्वरूप माना जाता है।
वे एक महान तपस्वी थे जिनका उद्देश्य भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाना था। भगवान श्री स्वामीनारायण सनातन धर्म का भी प्रचार प्रसार करते थे। विश्व का प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर भगवान स्वामी नारायण जी की पुण्य स्मृति में ही बनाया गया है।

स्वामीनारायण जी की जयंती के शुभ अवसर पर आज हम आपको उनसे जी जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताएंगे। साथ ही आप उनकी पूजा का महत्व भी जान सकते हैं।
5 वर्ष की आयु में सीखा अक्षरज्ञान
श्री स्वामीनारायण जी का जन्म चैत्र नवमी को विक्रम संवत 1837, 3 अप्रैल, 1781 ई. को रामनवमी के दिन हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार अयोध्या के पास गोण्डा जिले के छपिया गांव में भगवान ने जन्म लिया था। उनके पिता का नाम श्री हरिप्रसाद और माता का नाम भक्तिदेवी था।
उनके माता पिता ने उनका नाम घनश्याम रखा था। कहा जाता है कि जब स्वामीनारायण जी का जन्म हुआ तब किसी ज्योतिष ने उन्हें देखकर कहा था कि यह बालक समाज का कल्याण करेगा और लोगों को सही रास्ता दिखाएगा।
कहते हैं जब स्वामीनारायण जी सिर्फ 5 साल के थे तो उन्होंने अक्षरज्ञान सीख लिया था। इसके अलावा उन्होंने कई शास्त्रों को भी पढ़ लिया था। कुछ पौराणिक ग्रंथों में इस बात का उल्लेख है कि एक बार स्वामीनारायण जी के पिता ने उन्हें एक छोटा कटार, एक सोने का सिक्का और श्रीमद भगवद गीता दिया जिसमें से भगवान ने केवल भगवद गीता को चुना। यह देखकर उनके पिता को काफी आश्चर्य हुआ।

ऐसे कहलाएं भगवान
जब स्वामीनारायण जी सिर्फ 11 साल के साथ तो उनके माता और पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उन्होंने हमेशा के लिए घर छोड़ दिया और पूरे देश के भ्रमण के लिए निकल पड़े। उनकी अमूल्य शिक्षाएं और अमर विचारधारा ने दुनिया भर में कई लोगों को प्रेरित किया। लोग उनके बताए सच्चाई के मार्ग पर चलने लगे और स्वामीनारायण जी को भगवान का दर्जा दिया।
भगवान स्वामीनारायण की पूजन विधि
स्वामीनारायण जी की जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। भगवान के बाल रूप की मूर्ति को खूब अच्छी तरह से सजाया जाता है। फिर उसे पालने में रखकर उनकी पूजा की जाती है। चूंकि भगवान का जन्म रात्रि के 10 बजकर 10 मिनट पर हुआ था इसलिए इसी समय सभी मंदिरों में भगवान की आरती, भजन, कीर्तन आदि होता है। इसके अलावा लोग भगवान से जुड़ी कथाएं भी सुनते हैं।

भगवान स्वामीनारायण की पूजा का महत्व
कहते हैं स्वामी नारायण जी ने अपने दौर की कई कुरीतियों को खत्म करने में बड़ा योगदान दिया था। इसके अलावा देश में जब भी कोई प्राकृतिक आपदाएं आया करती थीं तो भगवान अपने अनुयायियों को आगे बढ़कर लोगों की मदद करने के लिए प्रेरित किया करते थे। उनकी सेवा भाव को देखकर लोग उन्हें भगवान का स्वरूप मानने लगे थे। माना जाता है कि जो भी व्यक्ति भक्ति और पूरी सिद्धि के साथ स्वामी नारायण जी की पूजा करता है उसे उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।



Click it and Unblock the Notifications