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Mangla Gauri Vrat 2023: तीसरे मंगला गौरी व्रत से पाएं अखंड सौभाग्य का वरदान, नोट करें पूजा मुहूर्त
सावन का महीना महादेव शिव और माता पार्वती की अराधना के लिए उत्तम होता है। इस महीने में हर मंगलवार को आने वाले मंगला गौरी व्रत महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं।
इस दिन वे मां पार्वती की पूजा करती हैं। इस वर्ष के 59 दिनों के सावन के दो मंगला गौरी व्रत बीत चुके हैं और तीसरा मंगला गौरी व्रत आने वाला है। 18 जुलाई, यानि मंगलवार को इस सावन का तीसरा मंगला गौरी व्रत होगा।

जानते हैं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखे जाने वाले मंगला गौरी व्रत की तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि के बारे में -
तीसरा मंगला गौरी व्रत कब है?
सावन का दूसरा मंगला गौरी व्रत 18 जुलाई को पड़ रहा है। इसके साथ ही इस दिन नक्षत्र पुष्य योग भी बन रहा है। इस दिन व्रत का पालन करके अखंड सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में सुख की प्राप्ति होती है।
मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठें। स्नानादि से निवृत होकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा की तैयारी करें। पूजा स्थल में एक चौकी पर एक लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्तियों या तस्वीरों को स्थापित करें। इसके बाद विधि विधान से पूजा करें और मां पार्वती की आराधना करें। इसके बाद माता को अक्षत, रोली, चन्दन, कुमकुम, ताज़े फूल और सोलह शृंगार का सामान अर्पित करें। माता से अपने वैवाहिक जीवन की सम्पन्नता और सुखमय होने की प्रार्थना करें।

मंगला गौरी व्रत का महत्व
इस व्रत के पालन से घर में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है। दाम्पत्य जीवन के सुखी होने के साथ साथ प्रेम में भी वृद्धि होती है। इसके साथ ही वे कुंवारी कन्याएं जिनकी शादी में अड़चने आ रही हैं उन लड़कियों को भी इस व्रत का पालन करना चाहिए। मां पार्वती का सच्चे मन से अनुसरण करने से विवाह सम्बन्धी परेशानियां दूर हो जाती हैं।
मंगला गौरी आरती
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता
ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता। जय मंगला गौरी...।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय मंगला गौरी...।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है,
साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। जय मंगला गौरी...।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय मंगला गौरी...।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। जय मंगला गौरी...।
सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराताए
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। जय मंगला गौरी...।
देवन अरज करत हम चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय मंगला गौरी...।
मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता
सदा सुख संपति पाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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