Latest Updates
-
लंच में बनाएं उत्तर प्रदेश की चना दाल कढ़ी, उंगलिया चाटते रह जाएंगे घरवाले -
Gangaur Ke Geet: 'आ टीकी बहू गोराँ ने सोवै'...इन मधुर गीतों के बिना अधूरी है गौरा पूजा, यहां पढ़ें पूरे लिरिक्स -
प्रेगनेंसी के शुरुआती 3 महीनों में भूलकर भी न खाएं ये 5 चीजें, वरना बच्चे की सेहत पर पड़ेगा बुरा असर -
Viral Video: टीम इंडिया की T20 वर्ल्ड कप जीत पर पाकिस्तान में जश्न, काटा केक और गाया 'जन-गण-मन' -
कौन हैं Mahieka Sharma? जिसके प्यार में 'क्लीन बोल्ड' हुए Hardik Pandya, देखें वायरल वीडियो -
कौन हैं Aditi Hundia? T20 वर्ल्ड कप जीत के बाद Ishan Kishan के साथ डांस Video Viral -
काले और फटे होंठों से हैं परेशान? तो पिंक लिप्स पाने के लिए आजमाएं ये घरेलू नुस्खे -
Chaitra Navratri 2026: 8 या 9 दिन जानें इस बार कितने दिन के होंगे नवरात्र? क्या है माता की सवारी और इसका फल -
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत
Ugadi 2023: धरती पर पहली बार सूर्य की किरणें पड़ने के साथ ही हुआ था नए युग का आरंभ
22 मार्च से हिन्दू नववर्ष की शुरुआत हो रही है और इसके उपलक्ष्य में भारत के अलग अलग हिस्सों में अलग अलग पर्वों की धूम रहती है। जहां उत्तर भारत में चैत्र नवरात्र का त्योहार शुरू होगा, वहीं महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा मनाया जाएगा। इसके साथ ही आन्ध्र प्रदेश में तेलुगु नवसंवत्सर पर्व उगादि मनाया जाएगा।
दक्षिण भारत के राज्यों जैसे कर्नाटक, तामिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश व कोंकणी समुदाय में यह पर्व उगादि या युगादि के नाम से प्रचलित है। इस पर्व पर कुछ ख़ास सांस्कृतिक रीतियों का पालन किया जाता है। चलिए जानते हैं उगादि अथवा युगादि पर्व की तिथि, मुहूर्त, रीति रिवाज़ और महत्व के बारे में।

क्या है युगादि पर्व?
उगादि या युगादि का शाब्दिक अर्थ नए युग का प्रारम्भ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस सृष्टि की रचना की थी और इसी दिन सूर्य की किरणें धरती पर पहली बार पड़ी थीं। इस दिन लोग एक साथ इकठ्ठा होकर नए साल का पंचांग सुनते हैं और आने वाला साल खेती के लिए कैसा रहने वाला है उसकी जानकारी भी लेते हैं।

उगादि पर्व की तिथि
उगादि पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 21 मार्च को रात 10:55 बजे से होगी और समापन 22 मार्च को रात 08:23 बजे होगा। उदया तिथि को मानते हुए 22 मार्च को नव संवत्सर मनाया जाएगा।

पूजन विधि
सुबह स्नान आदि करके घर के मुख्या द्वार और आँगन को साफ़ करके गोबर से लीपा जाता है। उसके बाद रंग बिरंगी बड़ी बड़ी और खूबसूरत रंगोली बनाई जाती है। घर के मंदिर और मुख्य द्वार को केले व अशोक के पत्तों, आम्र पल्लव और फूलों से सजाया जाता है। इसके पश्चात घर के सभी सदस्य मिलकर अपने ईष्ट देव की अराधना करते हैं।
पूजा के बाद सभी लोग एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और खास तौर पर बनाए गए पारंपरिक व्यंजनों का आनंद उठाते हैं। इस दिन लोग मंदिरों में एकत्रित होते हैं और वहां मंदिर के ब्राह्मण सभी लोगों को नए वर्ष का पंचांग और राशिफल पढ़कर सुनाते हैं। बहुत जगहों पर इस दिन पारंपरिक कलाओं जैसे अष्टावधानम्, षठावधानम्, और सहस्रावधानम् का भी प्रदर्शन होता है।

उगादि का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को ही भगवान विष्णु ने धरती पर मत्स्य अवतार लिया था। इसलिए इस दिन श्री हरि विष्णु की विधिवत पूजा की जाती है। इसके साथ ही सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी की भी उपासना की जाती है।
कई लोग नये कामों जैसे नई फसल, या नए व्यवसाय की शुरुआत भी इसी दिन से करते हैं। इस दिन घरों में पत्तों और आम्र पल्लवों को सजाया जाता है जो भगवान गणेश और कार्तिकेय के पसंदीदा थे। मान्यता है कि आम्र पल्लव लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश नहीं होता है।

बनते हैं ख़ास पारंपरिक व्यंजन
हर राज्य में अपनी संस्कृति और परंपरा के अनुसार इस दिन ख़ास व्यंजन बनाये जाते हैं। पुरण पोली,ओंबट्टू, और होलिगे जैसे व्यंजनों के साथ साथ एक ख़ास पेय पदार्थ तैयार किया जाता है।
पचड़ी काढ़ा इस दिन विशेष तौर पर बनाया जाता है जो प्रसाद का भी हिस्सा होता है। यह मुख्यतः मिट्टी के बर्तन में नीम के फूल, नारियल, गुड़, इमली, कच्चा आम, नमक एवं मिर्च मिलाकर बनाया जाता है। यह ना केवल पूजा के लिए महत्वपूर्ण होता है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभप्रद होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











