Latest Updates
-
क्या 1876 जैसी तबाही फिर होगी? 150 साल बाद लौट सकता है विनाशकारी अल नीनो! सूखा और अकाल का खतरा -
बरसात में भूलकर भी न खाएं ये 10 सब्जियां, वरना शरीर बन सकता है बीमारियों का घर -
अनचाहे गर्भ से बचने के लिए कौन-सा तरीका है सबसे सुरक्षित? एक्सपर्ट से जानें पूरी जानकारी -
World Population Day 2026 Quotes: 'आबादी पर लगाम, तरक्की को सलाम', इन कोट्स व स्लोगन से फैलाएं जागरूकता -
अमिताभ बच्चन बने पॉलिसीबाजार के ब्रांड एंबेसडर, शुरू हुआ भारत का सबसे बड़ा इंश्योरेंस जागरुकता अभियान -
बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी ये दवाएं, अल्कोहल की मात्रा को लेकर सरकार ने लागू किया कड़ा नियम -
World Population Day 2026: 11 जुलाई को ही क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस? जानिए इतिहास-महत्व और थीम -
Corona Alert: फिर लौट रहा कोरोना? आंध्र प्रदेश में 2 मौतें, 4 नए केस से बढ़ी चिंता -
बारिश में बनाएं क्रिस्पी मूंग दाल के पकौड़े और हरे धनिए-पुदीने की चटनी, नोट कर लें आसान रेसिपी -
योगिनी एकादशी की शुभकामनाएं संस्कृत में भेजें, देवभाषा के इन मंत्रों और सूक्तियों से अपनों का दिन बनाएं मंगलमय
Vat Savitri Vrat 2025: वट वृक्ष न हो पास तो कैसे करें व्रत, जानें इसका समाधान
Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत 2025 हिन्दू धर्म में महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए रखा जाने वाला अत्यंत पवित्र व्रत है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं, जो त्रिदेव - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - का प्रतीक माना जाता है। लेकिन यदि आपके घर या आस-पास वट वृक्ष नहीं है, तो भी आप इस व्रत को पूरी श्रद्धा से घर पर कर सकती हैं।

घर पर कैसे करें व्रत और पूजा
1. व्रत का संकल्प लें
सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें-"मैं अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य के लिए वट सावित्री व्रत करती हूं।"
2. वट वृक्ष का प्रतीक बनाएं
अगर असली बरगद का पेड़ उपलब्ध नहीं है, तो पीपल की शाखा, बरगद का चित्र या मिट्टी/धातु से बना वट वृक्ष का प्रतीक उपयोग करें। इसे पूजा स्थान पर स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री तैयार करें
लाल वस्त्र, रोली, अक्षत (चावल), पुष्प, फल, धूप-दीप, मौली (कलावा), सात प्रकार के अनाज, जल से भरा कलश, 16 श्रृंगार की सामग्री और ब्राह्मण भोजन की व्यवस्था करें।
4. विधिपूर्वक करें पूजा
पूजन स्थल पर कलश और वट वृक्ष का प्रतीक स्थापित करें। सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या चित्र रखें। फिर विधिपूर्वक पूजन करें। वृक्ष के प्रतीक की सात बार मौली से परिक्रमा करें और मौली बांधें।
5. व्रत कथा का पाठ करें
इस दिन सावित्री-सत्यवान की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें, जिसमें सावित्री की दृढ़ता, पति के प्रति भक्ति और यमराज से संघर्ष की गाथा है।
6. दान-पुण्य करें
पूजा के बाद ब्राह्मणों और सुहागिन महिलाओं को भोजन कराएं, वस्त्र और दक्षिणा दें। इससे व्रत पूर्ण होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार आप घर पर भी पूरे विधि-विधान से वट सावित्री व्रत कर सकती हैं और शुभ फल प्राप्त कर सकती हैं।



Click it and Unblock the Notifications