Latest Updates
-
क्या होती है पार्किंसंस की बीमारी? जानें इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय -
क्यों मनाई जाती है बैसाखी? जानें खालसा पंथ के '5 प्यारों' की कहानी, जिन्होंने हिलाई मुगलों की नींव -
Varuthini Ekadashi Vrat Katha: वरुथिनी एकादशी पर जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, मिलेगा 10 हजार साल की तपस्या जितना फल -
Varuthini Ekadashi 2026 Wishes: श्रीहरि विष्णु है जिनका नाम...वरुथिनी एकादशी पर अपनों को भेजें ये शुभकामनाएं -
Varuthini Ekadashi 2026 Sanskrit Wishes: वरुथिनी एकादशी पर दिव्य संस्कृत श्लोकों सें दें अपनों को शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 13 April 2026: वरूथिनी एकादशी पर सिंह-तुला की चमकेगी किस्मत, ये 3 राशियां रहें सावधान -
Budh Gochar: सोमवार को शनि के घर में होगी बुध की एंट्री, जागेगी इन राशियों की सोई किस्मत -
Dadi Ma ke Nuskhe: चेहरे के जिद्दी काले दाग होंगे गायब, बस आजमाएं दादी मां के ये 5 असरदार घरेलू नुस्खे -
16 की उम्र में 20 साल बड़े आदमी से शादी, बेटा-बेटी की मौत का गम, दुखों से भरी थी आशा भोसले की जिंदगी -
आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन, बेटे ने की दुखद खबर की पुष्टि, जानें अंतिम संस्कार का समय
Vat Savitri Vrat 2025: वट वृक्ष न हो पास तो कैसे करें व्रत, जानें इसका समाधान
Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री व्रत 2025 हिन्दू धर्म में महिलाओं द्वारा पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए रखा जाने वाला अत्यंत पवित्र व्रत है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं, जो त्रिदेव - ब्रह्मा, विष्णु और महेश - का प्रतीक माना जाता है। लेकिन यदि आपके घर या आस-पास वट वृक्ष नहीं है, तो भी आप इस व्रत को पूरी श्रद्धा से घर पर कर सकती हैं।

घर पर कैसे करें व्रत और पूजा
1. व्रत का संकल्प लें
सुबह सूर्योदय से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें-"मैं अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य के लिए वट सावित्री व्रत करती हूं।"
2. वट वृक्ष का प्रतीक बनाएं
अगर असली बरगद का पेड़ उपलब्ध नहीं है, तो पीपल की शाखा, बरगद का चित्र या मिट्टी/धातु से बना वट वृक्ष का प्रतीक उपयोग करें। इसे पूजा स्थान पर स्थापित करें।
3. पूजन सामग्री तैयार करें
लाल वस्त्र, रोली, अक्षत (चावल), पुष्प, फल, धूप-दीप, मौली (कलावा), सात प्रकार के अनाज, जल से भरा कलश, 16 श्रृंगार की सामग्री और ब्राह्मण भोजन की व्यवस्था करें।
4. विधिपूर्वक करें पूजा
पूजन स्थल पर कलश और वट वृक्ष का प्रतीक स्थापित करें। सावित्री और सत्यवान की मूर्ति या चित्र रखें। फिर विधिपूर्वक पूजन करें। वृक्ष के प्रतीक की सात बार मौली से परिक्रमा करें और मौली बांधें।
5. व्रत कथा का पाठ करें
इस दिन सावित्री-सत्यवान की कथा अवश्य पढ़ें या सुनें, जिसमें सावित्री की दृढ़ता, पति के प्रति भक्ति और यमराज से संघर्ष की गाथा है।
6. दान-पुण्य करें
पूजा के बाद ब्राह्मणों और सुहागिन महिलाओं को भोजन कराएं, वस्त्र और दक्षिणा दें। इससे व्रत पूर्ण होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस प्रकार आप घर पर भी पूरे विधि-विधान से वट सावित्री व्रत कर सकती हैं और शुभ फल प्राप्त कर सकती हैं।



Click it and Unblock the Notifications











