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Weekly Vrat and Festivals: इस हफ्ते पड़ने वाले हैं ये प्रमुख व्रत और त्योहार
वैशाख महीने की पूर्णिमा के बाद ज्येष्ठ माह की शुरुआत होती है। साल 2023 में ज्येष्ठ महीने की शुरुआत 6 मई से हो चुकी है। ज्येष्ठ माह में कई प्रमुख व्रत-त्योहार पड़ते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, मई के इस तीसरे हफ्ते में भी कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आने वाले हैं। आइए आपको इन त्योहारों और व्रत के बारे में बताते हैं।

14 मई को तेलुगु हनुमान जयंती
तेलुगु हनुमान जयंती 14 मई 2023,रविवार को मनाई जाएगी। हनुमान जयंती को बजरंगबाली के जन्मोत्सव के तौर पर मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब बालअवस्था में हनुमान जी ने सूर्य को फल समझकर निगल लिया था तब इंद्रदेव ने हनुमान जी पर प्रहार करके उन्हें मूर्छित कर दिया। जब बजरंगबली के पिता पवन देव ने क्रोधित होकर वायु के प्रवाह को रोक दिया तब हनुमान जी को दूसरा जन्म मिला। भगवान के दूसरे जन्म को हनुमान जयंती के तौर पर मनाया जाता है। दक्षिण भारत में बजरंगबली के जन्मोत्सव का उत्सव पूरे 41 दिनों तक यहां मनाया जाता है।
14 मई मातृ दिवस
मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाया जाता है। इस बार 14 मई को मातृ दिवस मनाया जा रहा है। अमेरिकन महिला एना जॉर्विस ने सबसे पहले इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। एना को अपनी मां से बहुत प्यार और लगाव था। अपनी मां की मृत्यु के बाद उन्हें सम्मान देने के लिए एना ने मदर्स डे सेलिब्रेट करने की शुरुआत की थी।
15 मई को वृषभ संक्रान्ति
साल में कुल 12 संक्रान्तियां पड़ती है। जब सूर्य देव अपना राशि परिवर्तन करते हैं तो उसे संक्रांति कहा जाता है। इस समय सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में स्थित हैं। 15 मई, 2023, सोमवार को मेष राशि से निकलकर सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। चूंकि सूर्य वृषभ राशि में प्रवेश करने वाले हैं इसलिए यह दिन वृषभ संक्रांति कहलाता है।
15 मई अपरा एकादशी
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन अपरा एकादशी व्रत रखा जाएगा। इस बार यह व्रत 15 मई 2023, सोमवार के दिन रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन व्रत रखने से और पूजा करने से मनुष्य को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
17 मई को प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। साल में कुल 24 प्रदोष व्रत पड़ते हैं। जेष्ठ मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 17 मई, बुधवार को है। चूंकि यह बुधवार को है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है।
17 मई मासिक शिवरात्रि
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। कहते हैं इस दिन व्रत और पूजा करने से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
19 मई को अमावस्या
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के नाम का दान, तर्पण व पिंडदान किया जाता है।
19 मई वट सावित्री व्रत
जेष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को वट सावित्री की पूजा होती है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं और व्रत रखती हैं।
19 मई शनि जयंती
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती पड़ती है। 19 मई, शुक्रवार को शनि जयंती मनाई जाएगी। शनि जयंती को शनिदेव के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।
20 मई से चंद्र दर्शन
शास्त्रों में बताया गया है कि अमावस्या तिथि के अगले दिन चंद्र दर्शन करने से पुण्य मिलता है। चंद्रदेव को ज्ञान, बुद्धि और मन का स्वामी ग्रह कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है तो इस दिन चंद्र देव की पूजा करने से ग्रह दोषों से भी मुक्ति मिलती है।



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