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Vrishabha Sankranti 2023: 15 मई को है वृषभ संक्रांति, कुंडली में सूर्य को बलवान बनाने के लिए जरूर करें ये उपाय
हिंदू धर्म में संक्रांति का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पितृ तर्पण, दान, धर्म, पवित्र नदियों में स्नान आदि करने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं।
जब सूर्य देव एक राशि से निकलकर दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो वह संक्राति कहलाती है। इस तरह से साल में कुल 12 संक्रांति पड़ती हैं। इस समय सूर्य देव अपनी उच्च राशि मेष में स्थित हैं। सूर्य देव 15 मई 2023, सोमवार को मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे।

चूंकि सूर्य वृषभ राशि में जा रहे हैं, इसलिए इस दिन को वृषभ संक्रांति कहा जाता है। इस दिन से सूर्य भगवान पूरे 9 दिनों के लिए रोहिणी नक्षत्र में भी आते हैं। वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य के साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव के ऋषभ रूद्र स्वरूप की भी पूजा की जाती है।
इसके अलावा सूर्य के इस राशि परिवर्तन का शुभ अशुभ प्रभाव सभी 12 राशियों पर भी पड़ता है। आइए जानते हैं, वृषभ संक्रांति शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और महत्व के बारे में।
वृषभ संक्रांति 2023 शुभ मुहूर्त
15 मई 2023, सोमवार को पुण्यकाल सुबह 05 बजकर 31 मिनट से सुबह 11 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। वहीं महा पुण्यकाल सुबह 09 बजकर 42 मिनट से सुबह 11 बजकर 58 मिनट तक है। कहा जाता है कि इन दोनों समय पर पूजा करना बहुत ही शुभ होता है। इससे ईश्वर की विशेष कृपा बरसती है और कुंडली में सूर्य भी मजबूत होता है।
वृषभ संक्रांति पूजा विधि
इस दिन अच्छी तरह से घर की साफ सफाई कर लें। स्नान आदि करके साफ वस्त्र धारण करें। संक्रांति के दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें। जल अर्पित करते समय आप मंत्रो का जाप करें। पितृ तर्पण के बाद विष्णु जी और महादेव की भी पूजा करें। भगवान के आगे घी का दीपक जलाएं और व्रत का संकल्प लें। इस व्रत में फलाहार ग्रहण कर सकते हैं। शाम को आरती करें। इस दिन ब्राह्मणों और गरीबों को दान करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। दान के साथ आप इन्हें भोजन भी करवा सकते हैं। संक्रांति पर जल और वस्त्र जरूर दान करना चाहिए।

वृषभ संक्रांति पर करें ये उपाय
1. वृषभ संक्रांति के दिन व्रत करने वाले व्यक्ति को जमीन पर ही सोना चाहिए।
2. इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
3. इस दिन गरीबों को अन्न, वस्त्र और जल दान करना बहुत ही लाभदायक होता है।
4. चूंकि इस समय गर्मी काफी तेज होती है, इसलिए अपने घर के बाहर या अन्य स्थानों पर प्याऊ लगावाएं। ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और आपका घर धन धान्य से भरा रहेगा।
5. संक्रांति पर पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।
6. 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करना भी बेहद लाभकारी होता है।
वृषभ संक्रांति का महत्व
वृषभ संक्रांति के दिन सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं और 9 दिनों के लिए रोहिणी नक्षत्र में भी आते हैं। ऐसे में इस दौरान प्रचंड गर्मी पड़ती है। सूर्य देव की परिक्रमा की वजह से यह 9 दिन नवतपा भी कहलाते हैं। जानकारों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में है तो वह राजा के समान जीवन जीता है। ऐसे लोगों को मान, सम्मान, यश आदि मिलता है। वहीं कमजोर सूर्य जीवन को कष्टों से भर देता है। संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से कुंडली में ग्रह संबंधित दोषों से भी मुक्ति मिलती है।



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