Latest Updates
-
Yoga For Arthritis: गठिया के दर्द से हैं परेशान तो रोज करें ये 5 योगासान, जल्द ही मिलेगी राहत -
फैटी लिवर होने पर भूलकर भी ना खाएं ये 5 चीजें, वरना झेलने पड़ेंगे गंभीर नुकसान -
March Pradosh Vrat 2026: मार्च महीने का अंतिम प्रदोष व्रत कब है? जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
हाथ से इन 5 चीजों का गिरना है बड़े संकट का संकेत, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज? -
School Holiday April 2026: छुट्टियों की भरमार! गुड फ्राइडे से आंबेडकर जयंती तक, देखें अवकाश लिस्ट -
इन 5 तरीकों से मिनटों में पहचानें असली और नकली सरसों का तेल, सेहत से न करें समझौता -
इन 5 लोगों को भूलकर भी नहीं खानी चाहिए अरबी की सब्जी, सेहत को हो सकता है गंभीर नुकसान -
महिलाओं की कौन सी आंख फड़कने का क्या है मतलब? जानें बाईं और दाईं आंख के शुभ-अशुभ संकेत -
New Rules From 1 April 2026: दवाइयों से मोबाइल तक, जानें 1 अप्रैल से क्या होगा सस्ता, क्या महंगा? -
Kamada Ekadashi Upay: वैवाहिक कलह और कर्ज के बोझ से हैं परेशान? कामदा एकादशी पर करें ये 3 अचूक उपाय
Ramadan 2023: क्या होता है कफ्फारा? इस्लाम में जानबूझ कर रोजा तोड़ने की सजा के बारें में जानें
दुनियाभर के मुसलमान रमजान के पाक महीने में एक महीने का रोजा (Fasting) रखते हैं। रोजा रखना हर मुस्लिम पर फर्ज है। इसके साथ ही इस महीने में बताए गये सारे रूल्स भी मुसलमानों को फॉलो करने चाहिए। जो इन रूल्स को तोड़ता है उसे गुनाह पड़ता है। इसमें से ही एक गुनाह रोजा तोड़ना भी है। अगर कोई मुसलमान रोजा रखकर, उसे बिना किसी सॉलिड वजह से तोड़ देता है तो इसे बहुत बड़ा गुनाह माना जाता है। इसके लिए मुसलमानों को जरूरी तरीके से डोनेशन के रूप में कफ्फारा देना जरूरी हो जाता है। ये अपने रोजा तोड़ने के गुनाह से अल्लाह पाक से माफी मांगने की एकमात्र तरीका है। कफ्फारा को कैसे किया जाता है। एक मुस्लिम के द्वारा कितना कफ्फारा के रूप में कितना पैसा देना चाहिए, इसके नियम है। चलिए जानते हैं कफ्फारा के बारें में-

कफ्फारा अर्थ
कफ्फारा अरबी मूल शब्द काफर से बना है, जिसका मतलब होता है ढकना। इस्लामी कानून में, ये एक शब्द है जिसका अर्थ है गुनाह का प्रायश्चित या अपराध के लिए मुआवजा। जो लोग एक इस्लामी रूल्स का उल्लंघन करते हैं, उन्हें कफ्फारा के जरीये अपने गुनाह की माफी मांगनी चाहिए। कुरान ए पाक और पैगंबर मुहम्मद (PBUH) साहब पांच वॉएलेशन के बारें में बताते हैं। जिनके लिए कफ्फारा का भुगतान करना आवश्यक है। इन पांच उल्लंघनों में शामिल हैं-
- रमजान के एक या ज्यादा दिनों के दौरान रोजा तोड़ना
- हलफ को तोड़ना
- हज यात्रा के दौरान पवित्र एहराम प्रतिबंधों का उल्लंघन करना
- हत्या करना
- ज़िहार, जो एक पत्नी के गलत तरीके और झूठे तरीके से मनमुटाव की प्रथा को बताता है।
रमजान का रोजा इस्लाम के पांच पिलर्स में से एक है और दुनिया भर के मुसलमानों के बीच बहुत ज्यादा महत्व रखता है। कफ्फारा उन सभी वयस्क मुसलमानों द्वारा भुगतान किया जाना चाहिए जो बिना किसी सॉलिड रीजन के रमजान के दौरान अपने रोजे को खराब करते हैं। कुरान में इस बारें में बताया गया है कि कोई भी वयस्क मुसलमान जो मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ है और फिर भी जानबूझकर बिना किसी उचित कारण के रमजान का रोजा तोड़ता है, वो बड़े गुनाह में शामिल होगा।

उन वॉयलेशन की लिस्ट है जो एक फास्ट इनवैलिड बना सकते हैं-
-जानबूझकर एक या एक से अधिक रोजा छोड़ने का इरादा या प्लानिंग बनाना
-रोजे के घंटों के दौरान जानबूझकर कुछ भी पीना या खाना
-रोजे के दौरान मास्टरबेशन और सेक्स जैसी काम करना
-जानबूझकर खुद को, किसी और को या किसी जानवर को चोट पहुंचाना
- जानबूझ कर खुद को मारना
रोजा तोड़ने के लिए कफ्फारा कैसे अदा करें-
रमजान के महीने के दौरान एक या एक से अधिक दिनों में रोजा तोड़ने के लिए निर्धारित कफ्फारा तीन अलग-अलग रूपों में आता है।
1.पहला रूप
पहले रूप में एक गुलाम मुसलमान को फ्री करना है। जिन लोगों को एक गुलाम मुसलमान नहीं मिल सकता है या उनके पास मुक्त करने का साधन नहीं है, वे कफ्फारा के दूसरे रूप को देख सकते हैं।
2. दूसरा रूप
दूसरा रूप है दो चांद महीनों के लिए रोजा रखना। रमजान के हर रोज के दिन जानबूझकर उल्लंघन के लिए, बिना ब्रेक के दो महीने तक रोजा करना चाहिए। इसके अलावा, कफ्फारा के दूसरे रूप को करते समय, अगर कोई जानबूझकर किसी भी समय रोजा तोड़ता है, तो उसे दो महीने के फिर से रोजा रखना होगा।
3. तीसरा रूप
जो लोग किसी वजह से लगातार दो महीनों तक रोजा नहीं रख सकते हैं, वे तीसरे रूप के देख सकते हैं। 60 लोगों को खाना खिला सकते हैं। एक मुसलमान को रमजान के प्रत्येक रोजे के जानबूझकर उल्लंघन के लिए 60 गरीबों को खाना खिलाना चाहिए। एक जरूरतमंद व्यक्ति को 60 दिन खाना खिलाकर या 10 गरीब लोगों को 6 बार खाना या किसी अन्य कॉम्बिनेशन के साथ प्रदान कर सकता है, जब तक कि रोजा के प्रत्येक दिन के लिए कुल 60 खाने गरीबों को दिए जाते हैं। साथ ही, एक मुसलमान अपने कफ़्फ़ारे को एक चेरेलिबल ट्रस्ट को भुगतान करने का ऑप्शन चुन सकता है जो उनकी ओर से 60 लोगों को भोजन प्रदान करेगा।

कफ्फारा और फिदिया में अंतर
कफ्फारा और फिदिया इस्लाम में दो अलग-अलग प्रकार के गुनाह से माफी का तरीका है। जबकि उनका उद्देश्य छूटे हुए या टूटे हुए रोज़ों की भरपाई करना है, उनके बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है।
फिदिया रोज़ा तोड़ने या आवश्यकता से चूक जाने के लिए है, और व्यक्ति बाद में किसी उचित कारण से इसकी भरपाई करने में असमर्थ है। उदाहरण के लिए, फिदिया उन लोगों के लिए लागू होता है जो गर्भावस्था, खराब स्वास्थ्य या बुढ़ापे के कारण रोजा नहीं कर सकते थे। दूसरी ओर, कफ्फारा रोजा के रूल्स को तोड़ने के लिए है या बिना किसी सॉलिड कारण के अनावश्यक रूप से छोड़ दिया गया है।
Photo Courtesy- freepik.com



Click it and Unblock the Notifications











