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Jagannath Rathyatra 2023: हर साल मौसी के घर क्यों जाते हैं भगवान जगन्नाथ, जानिए इससे जुड़ी मान्यता
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 20 जून से शुरु हो गई है। जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ जी गुंडिचा मंदिर में नौ दिन विश्राम करने बाद वापस अपने मुख्य मंदिर लौट आते हैं। इस दौरान कई परांपराएं निभाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर गुंडिचा मंदिर में ही क्यों विश्राम करते हैं जगन्नाथ जी? तो आइए जानते हैं कि इसके पीछे छिपी पौराणिक कथा के बारे में?

गुड़िचा मंदिर में क्यों रुकते हैं जगन्नाथ जी?
बता दें कि जगन्नाथ मंदिर से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर गुंडिचा मंदिर स्थित है जो कि कलिंग वास्तुकला के आधार पर बनाया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गुंडिचा भगवान जगन्नाथ की मौसी थी और जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ जी अपनी मौसी के घर 9 दिनों तक रुकते हैं। यहां वह अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ आते हैं।
वहीं देवी रुक्मणी, जिन्हें मां लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। वह जगन्नाथ पुरी के मुख्य मंदिर में ही विराजमान रहती हैं। गुंडिचा मंदिर में ही इन 9 दिनों में पूजा पाठ संपन्न होता है। क्योंकि भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में विराजमान रहते हैं। मुख्य मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक पहुंचाने के लिए जगन्नाथ रथ यात्रा का सदियों से आयोजन होता आ रहा है।
गुंडिचा मंदिर का इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार गुंडिचा को भगवान जगन्नाथ का जन्म स्थान भी कहा जाता है। क्योंकि यही वह जगह है जहां महादेवी नामक एक विशेष मंच पर दिव्य शिल्पकार विश्वकर्मा ने राजा इन्द्रध्युम्र की इच्छा पर जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रहों को प्रकट किया था।
राजा इन्द्रध्युम्र की पत्नी का नाम महारानी गुंडिचा है। इन्हें ही भगवान जगन्नाथ की मौसी माना जाता है। जगन्नाथ जी के विग्रह प्रकट होने के बाद यहां अश्वमेघ यज्ञ किया गया था। इसलिए कहा जाता है कि जगन्नाथ रथ यात्रा के दर्शन करना 1000 अश्वमेघ यज्ञ के बराबर होता है। मौसी के घर उनका पूरे आदर-सत्कार किया जाता है। गुंडिचा मंदिर में मौसी उनको पादोपीठा खिलाकर स्वागत करती हैं। यहां उनके लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी इसका पूरी तरह से पालन किया जाता है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं.। Boldsky इसकी पुष्टि नहीं करता है।



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