Latest Updates
-
Quick 30 Minute Egg Biryani Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद -
कौन हैं सैंटी शर्मा, जिनकी Bigg Boss 20 में हो सकती है एंट्री? कॉकरोच जनता पार्टी की वजह से हुए थे वायरल -
High Protein Breakfast Egg Bhurji Paratha Recipe: स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल -
Vinayak Chaturthi 2026: प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि -
Aaj Ka Rashifal 18 June 2026: गुरुवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी भगवान विष्णु की कृपा, जानें अपना भाग्य -
Dhaba Style Egg Curry Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसी मसालेदार अंडा करी -
नसों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं सोनू निगम, हो रहे MRI-CT स्कैन लेकिन फिर भी करेंगे लाइव परफॉर्म -
गर्मियों में कई समस्याओं के लिए रामबाण है लीची की तरह दिखने वाला ये फल, जानें इसके फायदे -
Lohri Special Energy Til Pinni Recipe: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने का आसान तरीका -
International Men's Health Week: पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ा सकते हैं ये 5 योगासन, जानें अभ्यास का तरीका
महिलाओं को क्यों नहीं करना चाहिए दंडवत प्रणाम? जानिए धार्मिक कारण
Why women can't do dandavat pranam : भारतीय संस्कृति में प्रणाम करने की परंपरा अत्यंत प्राचीन और गूढ़ है। हिंदू धर्म में भगवान की पूजा करते समय श्रद्धा और समर्पण भाव अत्यंत आवश्यक माने गए हैं। पूजा में शामिल षोडशोपचार विधि में दंडवत प्रणाम को अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण माना गया है। शास्त्रों में लिखा गया है कि एक सच्चे भाव से किया गया दंडवत प्रणाम एक यज्ञ के बराबर पुण्य प्रदान करता है।
लेकिन विशेष बात यह है कि यह नियम पुरुषों के लिए लागू होता है, महिलाओं के लिए नहीं। वेद और धर्मग्रंथों में स्पष्ट रूप से महिलाओं के दंडवत प्रणाम करने को निषेध बताया गया है। इसके पीछे आध्यात्मिक, धार्मिक और सांस्कृतिक कारण बताए गए हैं।

क्या है दंडवत प्रणाम?
दंडवत प्रणाम करने का अर्थ है पूर्ण रूप से शरीर को ज़मीन पर समर्पित करना। इसमें व्यक्ति अपने दोनों हाथों को आगे फैलाकर, पूरा शरीर ज़मीन पर टिका कर भगवान को नमस्कार करता है। यह पूर्ण समर्पण का प्रतीक होता है, जिसमें मन, वचन और कर्म तीनों से व्यक्ति ईश्वर के प्रति नतमस्तक होता है।
महिलाओं को दंडवत प्रणाम क्यों नहीं करना चाहिए?
1. धर्मग्रंथों का उल्लेख
धर्मसिंधु ग्रंथ में एक श्लोक आता है -
"ब्राह्मणस्य गुदं शंखं शालिग्रामं च पुस्तकम्।
वसुन्धरा न सहते कामिनी कुच मर्दनम्॥"
इसका अर्थ है कि ब्राह्मण का पिछला भाग, शंख, शालिग्राम, और धार्मिक पुस्तकों को धरती से सीधे स्पर्श नहीं कराना चाहिए। इसी प्रकार, महिला को भी अपने वक्ष (स्तन) और पेट को धरती से नहीं लगाना चाहिए क्योंकि यह धार्मिक रूप से उचित नहीं माना गया है।
2. देवी स्वरूप मानी जाती हैं महिलाएं
हिंदू मान्यता के अनुसार, महिलाएं सृजन का स्रोत होती हैं। वे अपने गर्भ में जीवन को पालती हैं और वक्षस्थल से उस जीवन का पोषण करती हैं। इन्हीं कारणों से उन्हें देवी का स्वरूप माना गया है। ऐसे में जब कोई महिला पेट और वक्षस्थल से धरती को स्पर्श करती है तो यह उसके मातृत्व और देवीस्वरूप का अपमान माना जाता है।
3. धरती नहीं सह पाती भार
शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि धरती महिला के इन पवित्र अंगों का भार सहन नहीं कर सकती। ऐसी स्थिति में वह महिला से उसकी अष्टलक्ष्मी (धन, विद्या, बल, कीर्ति, सौंदर्य, सुख, संतति और ऐश्वर्य) छीन लेती है। इसलिए महिलाओं को मंदिरों या तीर्थ स्थानों में दंडवत प्रणाम करने से मना किया गया है।
महिलाओं के लिए सही प्रणाम विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाओं को अपने घुटनों पर बैठकर या किसी आसन पर बैठकर भगवान को प्रणाम करना चाहिए। इस स्थिति में उनका शरीर ज़मीन को पूरी तरह नहीं छूता और उनके पवित्र अंग भी सुरक्षित रहते हैं। इस प्रकार का प्रणाम महिलाओं के लिए उचित, सुरक्षित और धर्मसम्मत माना गया है।



Click it and Unblock the Notifications