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हू विल क्राई वेन यू डाई: पुस्तक समीक्षा
द्वारा लिखित: नीतू साधवानी
जब मेरे एक मित्र ने मुझसे 'हू विल क्राई वेन यू डाई' किताब पढ़ने के लिये बोला, तो मुझे उसकी बात पर बडी़ तेज हंसी आई और मैने उससे बोला कि, मैं इस तरह कि किताबे नहीं पढ़ती। लेकिन उसने ना जाने कैसे मुझे किताब पढ़ने के लिये राजी कर लिया। मैंने पाया कि जब कभी भी मैं किताब को पढ़ने के लिये उठाती थी, तो मुझे उसे दुबारा वापस रखने का मन ही नहीं करता था। 'हू विल क्राई वेन यू डाई' रॉबिन शर्मा दा्रा लिखी गई है, जो कि हिंदी समेत दर्जनों भाषाओं में अनुदित हो चुकी है। 'द मॉन्क हू सोल्ड हिज़ फरारी' के बाद रॉबिन शर्मा ने यह गहरी पहुंच वाली और विचारशील किताब लिखी है।

यह किताब रॉबिन शर्मा के खुद के जीवन से प्रेरित है, जिस वजह से इसमें दी हुईं कहानियां कम उपदेशात्मक और अधिक व्यावहारिक लगती हैं। इस पुस्तक कि खास बात यह है कि आप कोई भी पन्ना खोल कर पढ़ना शुरु कर सकते हैं क्योंकि इसमें दी गई कहानियां केवल 2-3 पेज में ही समाप्त हो जाती हैं। यह किताब मेरे बेड़ के साइड में रखी हुई है, जिसको उठाते ही मैं एक बार में 1-2 पाठ पढ़ डालती हूं और वापस उसी जगह पर रख देती हूं।
इस पुस्तक में दी कई कई कहानियां मुझे बहुत अच्छी लगी, जिसमें से एक कहानी- 'डिस्कवर योर कॉलिंग' में रॉबिन शर्मा ने साफ-साफ बताया है कि, हम सभी के अंदर प्रतिभा होती है, और हम सब का यहां पर एक उद्देश्य है, तो इसलिये हमें हमेशा खुश रहने के लिये और अपने आस-पास के लोगों की जिन्दगी में मूल्य जोड़ने के लिये उस उद्देश्य का अपनी पूरी क्षमता के साथ पता लगाना चाहिये। प्लीज़ इस बात पर ध्यान दें, कि यहां पर अपनी जॉब को छोड़ने की बात नहीं हो रही है, बल्कि आप जो कुछ भी कर रहे हैं, उसमें अपना बेस्ट कैसे दें इस बात पर चर्चा की जा रही है।
दूसरी कहानी, 'स्पीकिंग काइंड वर्ड्ज' में लेखक ने बताया है, कि हमारे संतों ने कुछ भी बोलने से पहले हमेशा खुद से तीन सवाल पूछे- क्या यह सच है? क्या यह जरूरी है? क्या यह शब्द उदार हैं? यह शब्द तभी बोलने चाहिये जब उपयुक्त सवालों का उत्तर स्वीकारात्मक रूप से मिले।
पुस्तक में कई और भी पाठ हैं जो कि पढ़ने के लिये उत्सुकता पैदा करते हैं- 'फाइंड थ्री ग्रेट फ्रेंड्स', 'गेट अप अर्ली', 'लर्न फ्रॉम गुड मूवीज़', 'यूज यॉर कम्मूट टाइम', आदि।
पुस्तक के शीर्षक पर वापस आते हुए - पुस्तक इस बात पर बिल्कुल भी आधारित नहीं है कि जब आप इस दुनिया में नहीं रहेंगे तो आपके पीछे कितने लोग रोएंगे, बल्कि इस दुनिया में आप किस तरह से जीते थे, इस पर प्रकाशित है।
अगर आपने अभी तक किताब नहीं पढी़ है तो इसे ऑनलाइन खरीद सकते हैं।
नीतू के बारे में:
ट्रेनर, ट्रैवलर, ट्वेंटी-ट्वेंटी, ट्विन - यह बातें नीतू साधवानी को परिभाषित करती हैं। इन्हें मानवीय संसाधन और ट्रेनिंग में पिछले 10 सालों का एक्सपीरियंस है। नीतू को लिखने, कुकिंग और पेन्टिंग करने का बहुत ज्यादा शौक है। इस समय यह घर पर रह कर कार्य कर रहीं हैं और अपने दो जुड़वा बच्चों के साथ सुखद समय बिता रहीं हैं।



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