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श्रावण महीने में क्यों खाया जाता है शाकाहारी भोजन?
सावन और शिव का भारतीय संस्कृति से गहरा मेल है। सावन के आते ही शिव भक्तों में पूजा अर्चना के लिए नई उमंग का संचार हो जाता है। शास्त्रों और पुराणों का कहना है कि श्रावण मास भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है। इस माह में शिव अर्चना के लिए प्रमुख सामग्री बेलपत्र और धतूरा सहज सुलभ हो जाता है। साथ इस पवित्र महीने में हिन्दुओं को मांसाहार से विषेश दूरी बनाने को कहा जाता है। आइये जानते हैं, कि श्रावण महीने की खासियत क्या है और इस दौरान हमें मांसाहारी भोजन क्यों नहीं करना चाहिये।

श्रावण में हिन्दू क्यों नहीं खाते मांसाहारी भोजन?
1. पवित्रता का मौसम- हिन्दु कैलेंडर के अनुसार श्रावण, सालभर का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। इन दिनों कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं, जिसमें से रक्षाबंधन सबसे प्रमुख होता है। इसके अलावा, नाग पंचमी, ओनम, कजरी तीज आदि होते हैं।
2. भगवान शिव का महीना- इस महीने में जितने भी सोमवार पडते हैं, उन्हें श्रावण सोमवार कहा जाता है। यह पावन महीना शिव जी का होता है, जिसमें शिवरात्री मनाई जाती है। सावन का पूरा महीना यूं तो भगवान शिव को अर्पित होता ही है पर सावन के पहले सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। भारत के सभी द्वादश शिवलिंगों पर इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। कहा जाता है सावन के सोमवार का व्रत करने से मनचाहा जीवनसाथी मिलता है और दूध की धार के साथ भगवान शिव से जो मांगो वह वर मिल जाता है।
3. बरसाती बीमारियां- इस सीजन में मौनसून अपने पूरे जोश में रहता है। बारिश का पानी अपने साथ कई जानलेवा बीमारियां साथ में लक कर आती हैं। इस समय मलेरिया, पीलिया, पेट का संक्रमण, टाइफाइड तथा कॉलरा जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं। हिन्दुओं का मानना है, कि इस समय मीट में काफी संक्रमण होता है, इसलिये इसको खाने से बचना चाहिये।
4. प्रजनन का मौसम- पौराणिक संदर्भ में अगर बात करें, तो श्रावण माह को प्यार का महीना भी बोला जाता है। व्यावहारिक रूप से यह कई जानवरों के लिये प्रजनन का मौसम होता है। हिन्दू नियम के तहत इस दौरान मछली पकड़ने पर रोक लगाई जाती है क्योंकि इस समय मछलियों के पेट में अंडे़ होते हैं, जिन्हें मारना पाप होता है।



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