कजरी तीज में पति कि लंबी उम्र की कामना होती है स्‍वीकार

कजरी तीज कहें या फिर बड़ी तीज, दोनों ही त्‍योहार उत्‍तर भारत में बड़े ही धूम-धाम से मनाए जाते हैं। भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की तृतीया को यह पर्व मनाया जाता है। यह त्‍योहार खासतौर पर शादी-शुदा महिलाओं के लिये प्रमुख है। इस दिन वे पूरा दिन निर्जल व्रत रखती है और पति कि लंबी उम्र के लिये दुआ मांगती हैं। इस दिन पेड़ों पर बडे़ बडे़ झूले भी पड़ते हैं। घरों में पकवान, मिष्ठान बनाया जाता है। ग्रामीण अंचलों में इसे तीजा कहते हैं ।

ग्रामीण बालाएँ तथा वधुएँ हिंडोले पर बैठकर कजरी गीत गाती हैं । वर्षा ऋतु में यह गीत पपीहा , बादलों तथा पुरवा हवाओं के झोकों से बहुत प्रिय लगता है । भारत में तीन तरह के तीज मनाए जाते हैं: अक्‍खा तीज, कजरी तीज और हरियाली तीज। हर तीज कि अपनी अलग महत्‍वता होती है। महिलाओं दृारा माता पार्वती की पूजा की जाती है। माना जाता है कि माता पार्वती ने शिव जी से विवाह करने के लिये कुछ 108 बार जन्‍म लिया तब जा कर भगवान शिव उनसे शादी करने के लिये माने। इसलिये शादी-शुदा महिलाएं माता पार्वती कि पूजा करती हैं और उनसे अपनी शादी तथा पति कि मंगल कामना करती है।

आइये जानते हैं कि कजरारी तीज में क्‍या-क्‍या होता है और महिलाओं के लिये ये दिन कैसे खास है।

राजस्‍थान में खास अंदाज

राजस्‍थान में खास अंदाज

तीज को राजस्‍थान में बड़ी ही महत्‍वता दी जाती है। इस दिन लोग भारी भीड़ में जमा हो कर माता पार्वती को हीरे और सोने से सजा कर रथ में बिठा कर पूरे शहर में घुमाया जाता है।

खुशियों भरा त्‍योहार

खुशियों भरा त्‍योहार

यदि इन दिनों आप पंजाब, उत्‍तर प्रदेश, बिहार और राजस्‍थान में प्रवेश करेगें तो आप पाएंगे कि यहां पर महिलाएं लोक नृत्‍य करती हैं।

यह है महिलाओं का दिन

यह है महिलाओं का दिन

पूरे उत्‍तर भारत में महिलाएं कजरारी तीज मनाती हैं। इस दिन वे निर्जल व्रत रख कर परमेश्‍वर से अपने पति के दीर्घायु की कामना करती हैं। उसके बाद शााम को चंद्रमा के उदय होने पर उसे जल चढाया जाता है और व्रत तोड़ा जाता है।

नाच गाने से भरपूर तीज

नाच गाने से भरपूर तीज

इस दिन कई सामाजिक संगठन मिल कर तीज के उपलक्ष्‍य में सांस्‍कृतिक कार्यक्रम करवाते हैं। घर-घर में लड़कियां खूब सजती-संवरती हैं, तीज के गीत गाती हैं और हाथों में मेंहदी रचाती हैं।

लज्‍जतदार पकवानों का त्‍योहार

लज्‍जतदार पकवानों का त्‍योहार

पूरे दिन व्रत रखने के बाद रात में अच्‍छे-अच्‍छे व्‍यंजनों कि लड़ी लग जाती है। खूब सारी मिठाइयां जैसे, घेंवर, मालपुआ, लड्डू और सत्‍तू से मिश्रित पकवान बनाए जाते हैं।

झूलों का मौसम

झूलों का मौसम

तीज में झूलों को सजा कर पेड़ों पर डाला जाता है और उस पर खूब पींगें पड़ती हैं। यह त्‍योहार झूलों के बिना बिल्‍कुल अधूरा है। लड़कियां और महिलाएं इस पर झूला झूल कर और गाने गा कर खूब मौज मस्‍ती करती हैं।

तीज का भी बदला अंदाज

तीज का भी बदला अंदाज

तीज पहले परंपरागत तरीके से मनाइ जाती थी, लेकिन अब इसमें ग्लैमर का तड़का लगने लगा। पहले जहां तीज से एक दिन पहले ननद, जेठानियां और सास बहुओं के लिए मेंहदी घोलने और लगाने में व्यस्तरहती थी। वहीं अब मेंहदी के लिए घर की औरतें बाजारों का रूख कर रही हैं।

Story first published: Friday, August 23, 2013, 17:05 [IST]
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