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आखिर क्यों ट्रांसजेंडर (किन्नर) वेश्यावृत्ति को अपना लेते है?
जब आप किसी किन्नर को देखते हैं तो या तो आप उन्हें रास्ते पर भीख मांगते हुए या किसी ऐसे स्थान पर देखते हैं जहां वेश्याएं खड़ी होती हैं।
जब आप किसी किन्नर को देखते हैं तो या तो आप उन्हें रास्ते पर भीख मांगते हुए या किसी ऐसे स्थान पर देखते हैं जहां वेश्याएं खड़ी होती हैं।
क्या आपने कभी सोचा है क्यों और कौन उन्हें इस देह व्यापार में भेजता है जबकि वे कड़ी मेहनत कर सकते हैं और पैसा कमा सकते हैं?
उनके पेशे के लिए हमारा समाज काफी हद तक ज़िम्मेदार है क्योंकि मुश्किल से ही ऐसी कोई जगह है जहां इन्हें इनकी योग्यता के अनुसार नौकरी मिलती है।
यहां हमने कुछ ऐसे वास्तविक कारण बताएं हैं कि किन्नर अपनी जीविका के लिए वेश्यावृत्ति क्यों अपना लेते हैं। उनकी दिल को दुखाने वाली कहानियों और कारणों के बारे में जानें कि किस कारण उन्हें इस देह व्यापार के क्षेत्र में आना पड़ता है।

उनका सामाजिक जीवन से बहिष्कार किया जाता है
उन्हें समाज में प्रवेश नहीं दिया जाता। चाहे स्कूल हो या शादी या बच्चे या केवल दोस्त बनाना हो उन्हें किसी भी तरह सामान्य जीवन नहीं जीने दिया जाता। इसलिए वो समाज से कटकर रह जाते है।

मुग़ल सेना में उन्हें महत्व प्राप्त था
क्योंकि किन्नर शारीरिक रूप से बड़े और मज़बूत होते हैं अत: मुग़ल सेना में इन्हें लाइफ गार्ड्स और जनरल के रूप में नियुक्त किया जाता था। और आजकल नौकरियों के संदर्भ में यह वर्ग ही समाज का सबसे उपेक्षित वर्ग है।

केवल पैसा और प्यार नहीं!
क्योंकि इन लोगों के लिए कोई नौकरियां उपलब्ध नहीं होती अत: उनके लिए सिग्नल पर भीख मांगना और वेश्यावृत्ति के जरिए पैसा कमाने का विकल्प ही रह जाता है। इस तरह से ही वो अपनी जीविका कमा सकते है।

इस व्यापार के साथ कई खतरे जुड़े हुए हैं
वे कई प्रकार के एसटीडी और वायरस के संपर्क में आते हैं। इनमें से अधिकांश लोग अपने स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जागरूक नहीं होते क्योंकि यह उन्हें पैसा कमाने का आसान तरीका लगता है। कोई विकल्प न होने के कारण वे इस धंधे को चुनते हैं।

सोच के साथ बदल रहा है जमाना
अब सरकार द्वारा किन्नर के लिए नियमों के साथ कुछ नए बदलाव किए गए है। उसमें एक विकल्प "ई" लिंग का रखा गया है जो इन लोगों को लिए आनंददायक समाचार है। आशा है कि इन लोगों को अब नौकरियां मिलेंगी जिससे इन्हें जीवन की इन अंधेरी राहों पर नहीं जाना पड़ेगा।



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