Latest Updates
-
Jagannath Rath Yatra 2026 Wishes: रथ यात्रा पर शेयर करें भक्तिमय शुभकामना संदेश, मिलेगा प्रभु का आशीर्वाद -
अमरनाथ गुफा में पिघला तो फ्रिज में दिखा 'बाबा बर्फानी' का शिवलिंग? वायरल वीडियो देख लोग रह गए हैरान -
एक कली कच्चा लहसुन खाकर दिन की शुरुआत करती हैं सोहा अली खान, जानें खाली पेट गार्लिक खाने के 5 जबरदस्त फायदे -
पिृत दोष से मुक्ति के लिए आज आषाढ़ अमावस्या पर करें इन 5 चीजों का दान, पितरों का मिलेगा आशीर्वाद -
बार-बार मुंह में हो रहे छालों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, हो सकता है ओरल कैंसर, जानें लक्षण -
लड़के-लड़कियों के लिए सबसे मॉडर्न और छोटे 100+ टॉप नाम, यहां देखें अर्थ सहित लिस्ट -
कांवड़ यात्रा कब से होगी शुरू? इस दौरान भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, अधूरी रह जाएगी पूजा -
Kriti Sanon ने करवाए अपने अंडे फ्रीज! जानें किस उम्र में ये कराना बेहतर और Egg Freezing फायदे-नुकसान? -
कब है आषाढ़ अमावस्या? इस दिन इन 4 राशियों पर मंडरा रहा संकट, कहीं आपकी राशि भी तो लिस्ट में नहीं? -
Corona Alert: सिंगर कुमार सानू के बेटे को हुआ कोविड, आंध्र प्रदेश में मिले सबसे ज्यादा मरीज, जानें लक्षण
मरने के बाद अपने ही लोगों की चिता की राख का सूप बनाकर पी लेते हैं ये लोग, इस विचित्र परंपरा के बारे में जाने!
Yanomami Tribe : दक्षिण अमेरिकी यानोमानी जनजाति अंतिम संस्कार से जुड़ी एक बेहद अजीब परंपरा का पालन करती है, जो उनके लिए सामान्य लेकिन दूसरों के लिए चौंकाने वाली है। इस जनजाति में मृतक को जलाने के बाद बची राख को सूप में मिलाकर पीने की परंपरा है।
जन्म और मृत्यु से जुड़े रीति-रिवाज हर समाज में अलग होते हैं, लेकिन शव का सम्मान करना सभी जगह आम है। यानोमानी का यह अनोखा तरीका उनके सांस्कृतिक विश्वासों और परंपराओं का हिस्सा है, जो बाहरी दुनिया को अजीब और खौफनाक लग सकता है।

आपने अंतिम संस्कार से जुड़ी कई अजीब परंपराएं सुनी होंगी, लेकिन यानोमानी जनजाति का रिवाज़ इनमें सबसे अलग है। इस जनजाति में मृत शरीर को पत्तों और अन्य चीजों से ढककर 30-40 दिन तक रखा जाता है। फिर, शरीर को जलाकर उसकी राख बचाई जाती है। यह राख सूप में मिलाकर पिया जाता है। इस अनोखे रिवाज़ का पालन पारंपरिक रूप से किया जाता है और इसे उनके समाज में सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यानोमानी लोग इसे अंतिम संस्कार के तौर पर देखते हैं, जो मृतक के साथ जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों का हिस्सा है। यह परंपरा उनके लिए सामान्य है, लेकिन बाहर से देखने वालों के लिए यह बेहद अजीब और चौंकाने वाली हो सकती है।
"एंडोकैनिबेलिज़्म" की परांपरा कहते
यह परंपरा "एंडोकैनिबेलिज़्म" के नाम से जानी जाती है, और यानोमानी जनजाति का मानना है कि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति तभी मिलती है जब उसके रिश्तेदार उसके शरीर को खाएं। यही वजह है कि वे मृतक की राख को सूप में मिलाकर खाते हैं। इस रिवाज़ का उद्देश्य आत्मा की रक्षा करना और उसे शांति प्रदान करना है। अगर किसी व्यक्ति की हत्या हुई हो, तो उसकी राख केवल महिलाएं ही खाती हैं और उनका अंतिम संस्कार भी अलग तरीके से किया जाता है। यानोमानी जनजाति अमेज़न के जंगलों में बसी हुई है, और इसके करीब 200-250 गांव हैं।



Click it and Unblock the Notifications