मरने के बाद अपने ही लोगों की चिता की राख का सूप बनाकर पी लेते हैं ये लोग, इस विचित्र परंपरा के बारे में जाने!

Yanomami Tribe : दक्षिण अमेरिकी यानोमानी जनजाति अंतिम संस्कार से जुड़ी एक बेहद अजीब परंपरा का पालन करती है, जो उनके लिए सामान्य लेकिन दूसरों के लिए चौंकाने वाली है। इस जनजाति में मृतक को जलाने के बाद बची राख को सूप में मिलाकर पीने की परंपरा है।

जन्म और मृत्यु से जुड़े रीति-रिवाज हर समाज में अलग होते हैं, लेकिन शव का सम्मान करना सभी जगह आम है। यानोमानी का यह अनोखा तरीका उनके सांस्कृतिक विश्वासों और परंपराओं का हिस्सा है, जो बाहरी दुनिया को अजीब और खौफनाक लग सकता है।

Yanomami Tribe
30-40 दिन तक रखते हैं लाश

आपने अंतिम संस्कार से जुड़ी कई अजीब परंपराएं सुनी होंगी, लेकिन यानोमानी जनजाति का रिवाज़ इनमें सबसे अलग है। इस जनजाति में मृत शरीर को पत्तों और अन्य चीजों से ढककर 30-40 दिन तक रखा जाता है। फिर, शरीर को जलाकर उसकी राख बचाई जाती है। यह राख सूप में मिलाकर पिया जाता है। इस अनोखे रिवाज़ का पालन पारंपरिक रूप से किया जाता है और इसे उनके समाज में सम्मान का प्रतीक माना जाता है। यानोमानी लोग इसे अंतिम संस्कार के तौर पर देखते हैं, जो मृतक के साथ जुड़े सांस्कृतिक और धार्मिक विश्वासों का हिस्सा है। यह परंपरा उनके लिए सामान्य है, लेकिन बाहर से देखने वालों के लिए यह बेहद अजीब और चौंकाने वाली हो सकती है।

"एंडोकैनिबेलिज़्म" की परांपरा कहते

यह परंपरा "एंडोकैनिबेलिज़्म" के नाम से जानी जाती है, और यानोमानी जनजाति का मानना है कि मृत व्यक्ति की आत्मा को शांति तभी मिलती है जब उसके रिश्तेदार उसके शरीर को खाएं। यही वजह है कि वे मृतक की राख को सूप में मिलाकर खाते हैं। इस रिवाज़ का उद्देश्य आत्मा की रक्षा करना और उसे शांति प्रदान करना है। अगर किसी व्यक्ति की हत्या हुई हो, तो उसकी राख केवल महिलाएं ही खाती हैं और उनका अंतिम संस्कार भी अलग तरीके से किया जाता है। यानोमानी जनजाति अमेज़न के जंगलों में बसी हुई है, और इसके करीब 200-250 गांव हैं।

Story first published: Wednesday, December 18, 2024, 11:26 [IST]
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