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2 दिन में लॉन्च होने वाला है Aditya-L1, ISRO ने बता दी कंफर्म तारीख और समय, कहां देख सकेंगे LIVE?
Aditya L1 Mission : चंद्रयान-3 मिशन सफल होने के बाद इसरो अपने अगले मिशन Aditya-L1 Mission की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसको लेकर बाकायदा लॉन्चिंग तारीख और शेड्यूल का ऐलान भी कर दिया है। इस मिशन की लॉन्चिंग लाइव देखने के लिए इसरो ने 29 अगस्त से रजिस्ट्रेशन विंडो खोल दिया है। इस बारे में जानकारी देते हुए इसरो ने ट्वीट भी किया है।
आदित्य-एल1 की लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के इसरो के स्पेसपोर्ट से भारतीय समयानुसार सुबह 11:50 बजे लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन के अस्थायी प्रक्षेपण का खुलासा इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू के दौरान किया था।
आदित्य-एल 1 सूर्य का अध्ययन करने वाली पहली स्पेस बेस्ड इंडियन लेबोरेट्री होगी। आदित्य-एल1 मिशन, जिसका उद्देश्य L1 के चारों ओर की कक्षा से सूर्य का अध्ययन करना है। आपको बता दें कि आदित्य-एल1 भारत का पहला सोलर मिशन है। इसलिए पूरे देश के साथ दुनियाभर की निगाहें भारत पर टिकी हुई है।
4 माह तक सफर करेगा आदित्य-एल1
जानकारी के मुताबिक इसरो मिशन आदित्य-एल1 को पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर दूर सूर्य-पृथ्वी लैगरांजे प्वाइंट 1 (एल1) के चारों ओर एक प्रभामंडल कक्षा (Halo Orbit) में स्थापित करेगा। पूरी यात्रा में करीब चार माह का वक्त लगने की उम्मीद जताई गई और आदित्य एल -1 मिशन को लेकर इसरो को उम्मीद है कि सूर्य के तापमान, पराबैगनी किरणों के धरती, खासकर ओजोन परत पर पड़ने वाले प्रभावों और अंतरिक्ष में मौसम की गतिशीलता का अध्ययन किया जा सकेगा।

हैलो ऑर्बिट में होगा स्थापित
आदित्य एल -1, करीब 15 लाख किलोमीटर की यात्रा 127 दिन में पूरी करेगा। यह हैलो ऑर्बिट (Halo Orbit) में तैनात किया जाएगा। जहां पर L1 प्वाइंट होता है। यह प्वाइंट सूरज और यह प्वाइंट सूरज और धरती के बीच में स्थित होता है।
भारत का पहला सोलर मिशन
आदित्य एल -1 भारत का पहला सोलर मिशन है, जो पहली बार सूरज पर रिसर्च करने जा रहा है। लेकिन अब तक सूर्य पर कुल 22 मिशन भेजे जा चुके हैं। इन मिशन को पूरा करने वाले देशों में अमेरिका, जर्मनी, यूरोपियन स्पेस एजेंसी शामिल है। सबसे ज्यादा मिशन नासा ने भेजे हैं। नासा ने अकेले 14 मिशन सूर्य पर भेजे हैं। नासा ने साल 2001 में जेनेसिस मिशन लॉन्च किया था। इसका मकसद था सूरज के चारों तरफ चक्कर लगाते हुए सौर हवाओं का सैंपल लेना था।



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