Latest Updates
-
Quick Dinner 10 Min Egg Bhurji Recipe: झटपट बनाएं चटपटी और मसालेदार अंडा भुर्जी -
International Yoga Day 2026: थायराइड से छुटकारा पाने के लिए रोज करें ये 5 योगासन, कुछ ही दिनों में दिखेगा असर -
Gajar Ka Murabba Recipe: सेहत और स्वाद का बेहतरीन संगम, जानें बनाने की आसान विधि -
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत -
Muharram 2026: कब है आशूरा? जानें मुहर्रम की 10वीं तारीख का धार्मिक महत्व और इतिहास -
Father’s Day 2026 Gift Ideas: पापा के लिए ढूंढ रहे हैं खास तोहफा? फादर्स डे पर दें ये 7 बेहतरीन गिफ्ट्स -
Quick 30 Minute Egg Biryani Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद -
कौन हैं सैंटी शर्मा, जिनकी Bigg Boss 20 में हो सकती है एंट्री? कॉकरोच जनता पार्टी की वजह से हुए थे वायरल -
High Protein Breakfast Egg Bhurji Paratha Recipe: स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल -
Vinayak Chaturthi 2026: प्रद्युम्न विनायक चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
OMG: राजस्थान में आज भी चल रही है ये अनोखी प्रथा, जहां लड़कियां पहले करती हैं बच्चा पैदा और फिर होती है शादी
Unique Tradition of Rajasthan's Garasia Tribe: राजस्थान के कुछ आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है, जहां लड़कियां पहले बच्चा पैदा करती हैं और उसके बाद उसी व्यक्ति से शादी करती हैं। यह प्रथा मुख्य रूप से डूंगरपुर और बांसवाड़ा जिलों की गरासिया जनजाति में प्रचलित है।

प्रथा का नियम
इस परंपरा के अनुसार, लड़की की शादी तभी होती है जब वह बच्चा पैदा कर लेती है। शादी से पहले, लड़कियां अपनी मर्जी से लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकती हैं और संबंध बना सकती हैं।
घरवालों की सहमति
गरासिया जनजाति में लड़कियों को अपने जीवनसाथी का चुनाव करने की पूरी स्वतंत्रता होती है। उन्हें किसी रिश्ते में जाने या साथी चुनने पर घरवालों की ओर से कोई पाबंदी नहीं होती।
शादी की प्रक्रिया
जब लड़की और उसका साथी बच्चा पैदा कर लेते हैं, तो उनके बीच विवाह संपन्न होता है। हालांकि, शादी से पहले लड़की को यह अधिकार होता है कि वह किसी अन्य व्यक्ति को भी अपने जीवनसाथी के रूप में चुन सकती है।
क्यों खास है यह प्रथा?
यह प्रथा सामाजिक और सांस्कृतिक विविधताओं का उदाहरण है, जो गरासिया जनजाति की विशिष्टता को दर्शाती है। हालांकि, यह प्रथा भारत के शहरी और आधुनिक समाज से बिल्कुल अलग है, लेकिन इसे यहां की परंपरा और जीवनशैली का हिस्सा माना जाता है।
इस प्रथा को आधुनिक दृष्टिकोण से देखने पर भले ही यह अजीब लगे, लेकिन यह समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक सोच को दर्शाती है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications