Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
एप्पल की मालकिन लॉरेन पॉवेल जॉब्स महाकुंभ में करेंगी कल्पवास, जानें क्या है कल्पवास और इसका महत्व
What is Kalpvas in Mahakumbh : एप्पल की मालकिन लॉरेन पॉवेल जॉब्स महाकुंभ में अपनी भागीदारी के लिए प्रसिद्ध हो रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह पौष पूर्णिमा पर संगम में अपनी पहली डुबकी लगाएंगी और कल्पवास भी करेंगी। महाकुंभ में उनकी उपस्थिति भारतीय संस्कृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एप्पल की मालकिन लॉरेन पॉवेल जॉब्स पौष पूर्णिमा पर संगम में अपनी पहली डुबकी लगाएंगी और कल्पवास भी करेंगी।
वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, पीट बटिगिग और कमला हैरिस जैसे प्रमुख राजनीतिक-सामाजिक अभियानों में हिस्सा ले चुकी हैं। महाकुंभ में उनकी भागीदारी भारतीय संस्कृति के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाती है।

कथा की पहली यजमान बनेंगी
लॉरेन पॉवेल जॉब्स महाकुंभ के शुभारंभ के दिन संगम पर आएंगी। उनकी ठहरने की व्यवस्था निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद के शिविर में की गई है, जहां वह 19 जनवरी से शुरू हो रही कथा की पहली यजमान भी होंगी। वह एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी हैं।
क्या है कल्पवास?
कल्पवास एक प्राचीन हिंदू धार्मिक प्रथा है, जो पौराणिक कथाओं से जुड़ी हुई है। 'कल्प' शब्द लंबी अवधि को दर्शाता है, जबकि 'वास' का अर्थ निवास करना है। यह प्रथा विशेष रूप से हिंदू कैलेंडर के माघ (जनवरी-फरवरी) महीने के दौरान होती है, जो तपस्या, भक्ति और समुदाय के समय को दर्शाती है। कल्पवासियों का जीवन अनुशासन से भरा होता है, जो भोर से पहले पवित्र नदी में डुबकी लगाकर अपने दिन की शुरुआत करते हैं। इसके बाद वे ध्यान, पूजा और धार्मिक उपदेशों में भाग लेते हैं, अपने आत्मा और आत्मिक विकास के लिए समय समर्पित करते हैं। यह प्रक्रिया आध्यात्मिक शुद्धता और संतुलन की ओर ले जाती है।
महाभारत से भी है कनेक्शन
महाभारत में कल्पवास का महत्वपूर्ण संदर्भ है। कल्पवास वह अनुष्ठान है जिसमें व्यक्ति कुछ समय के लिए सांसारिक सुखों से दूर रहते हुए साधना और तप करते हैं। इसे महाभारत में कई पात्रों द्वारा अपनाया गया। विशेष रूप से भीष्म पितामह ने कुरुक्षेत्र के युद्ध के बाद अपनी मृत्यु तक के समय को "कल्पवास" के रूप में बिताया। उन्होंने इस अवधि में केवल तप, प्रार्थना और ध्यान में ही समय बिताया। युधिष्ठिर ने भी पांडवों के वनवास के दौरान अपने जीवन में कुछ समय के लिए तप करने का निर्णय लिया था। इस प्रकार, कल्पवास का महाभारत में धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व था, जो साधना के माध्यम से आत्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता था।
प्राचीन है कल्पवास की परापंरा
कल्पवास भारत की प्राचीन परंपरा है, जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड और बिहार के गांवों के लोग कड़ाके की ठंड में रेतीले तटों पर पूरा महीना बिताते हैं। इस दौरान वे विभिन्न संतों और ऋषियों के शिविरों में जाकर प्रवचन सुनते हैं और 'भजन और कीर्तन' में भाग लेते हैं। यह परंपरा हिंदू धर्म के अनुयायियों द्वारा सदियों से निभाई जाती है। कल्पवास एक अनुशासित जीवन शैली का प्रतीक है, जिसमें पवित्र नदी में स्नान, ध्यान, पूजा और धार्मिक प्रवचनों में भाग लिया जाता है।



Click it and Unblock the Notifications