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Armed Forces Flag Day 2025: भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस क्यों मनाया जाता है? जानिए इतिहास और महत्व
Armed Forces Flag Day 2025: प्रत्येक वर्ष 7 दिसंबर को भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन प्रत्येक भारतवासी के लिए बेहद ही खास होता है। इस दिन थल सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान झंडे को फहराते हैं और देश की सेना को सम्मानित भी करते हैं। यह महज भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस ही नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतवासी व भारत के लिए एक गौरवान्वित का दिन भी होता है। जब भारतवासी अपने झंडे के प्रति गर्व महसूस करते हैं और इस दिन को बड़े ही धूमधाम व सम्मान के साथ सेलिब्रेट करते हैं। ऐसे में, आइए जानते हैं भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस का इतिहास और इसके महत्व के बारे में -

भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस का इतिहास
भारत कई वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा है। कई लड़ाइयों व संघर्षों के बाद भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली थी। भारत अंग्रेजों से 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और इसी दिन से भारत में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन एक देश जब आजाद होता है, तो उसे अपने देश की सीमा की रक्षा भी करनी होती है। इसके लिए थल, वायु और नौसेना अस्तित्व में आईं, जिन्हें मजबूत किया जाने लगा। सेना के कल्याण के लिए 28 अगस्त 1949 को एक समिति का गठन किया गया। इस समिति द्वारा भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई। तब से ही 7 दिसंबर को भारत में भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
7 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस?
सेना के जवानों के गठित सभा के द्वारा प्रत्येक 7 दिसंबर को भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाए जाने की घोषणा की गई थी। साथ ही, सभा ने धन इकट्ठा करने के लिए लोगों के बीच छोटे-छोटे झंडे भी बांटे थे। आपको बता दें, झंडे में तीन रंग थे नीला, हरा और सफेद।
भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस का महत्व
भारतीय सशस्त्र सेना झंडा दिवस मनाए जाने का महत्व तीनों सेनाओं को सम्मानित करना व उन्हें सुरक्षित महसूस करवाना है। साथ ही, देशवासियों के बीच देशभक्ति की भावना जागृत करना है। इस दिन लोगों को भारत के झंडे के प्रति जागरूक भी किया जाता है, ताकि वह अपने झंडे का सम्मान कर सकें। इस दिन को मनाने का एक उद्देश्य सशस्त्र बलों के कर्मियों के लिए धन संग्रह करना भी है। इस दिन देशभर में थल सेना, वायु सेना और नौसेना का प्रतिनिधित्व करने वाले छोटे झंडे और प्रतीक बांटें जाते हैं और बदले में नागरिकों से दान लिया जाता है। यह देश के लिए शहीद हुए सैनिकों के कर्तव्यों के प्रति जनता की भागीदारी का अहम हिस्सा है।



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