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Elections Result 2023 : कैसे होती है EVM और VVPAT से वोटों की काउंटिंग, गिनती में अंतर होने पर क्या होता है?
आज यानी 3 दिसंबर को 5 राज्यों के चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मतगणना की प्रक्रिया जारी है। जनता भी बेसब्री से रिजल्ट का इंतजार कर रही है। इसी बीच वोटों की गिनती को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं। कई लोग सोचते होंगे कि मतगणना यानी वोटों की काउंटिंग कैसे होती है?
हालांकि EVM ने वोटों की काउंटिंग को काफी हद तक आसान बना दिया है। लेकिन EVM मशीन में पड़े वोटों के परिणाम को VVPAT सिस्टम के परिणाम से भी तुलना की जाती है। इसके बाद सही परिणाम सामने आता है। ऐसे में मन में बड़ा सवाल यह आता है कि अगर दोनों के आंकड़ों में अंतर आए तो EVM और VVPAT में से किसे सही माना जाएगा? आइए जानते हैं कि मतगणना कैसे होती है और इसमें EVM और VVPAT की क्या भूमिका है?

मतगणना 8 बजे से होती है शुरू
चुनाव आयोग के अनुसार, मतों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू होती है। हालांकि किसी विशेष परिस्थिति में समय में बदलाव भी किया जा सकता है। सबसे पहले बैलेट पेपर और ETPBS यानी इलेक्ट्रानिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम के जरिए दिए गए वोटों की गिनती होती है। इसमें औसतन आधे घंटे का समय लगता है। इसके बाद EVM के वोटों की गिनती शुरू होती है। यहां रिटर्निंग ऑफिसर एक-एक राउंड की गिनती के बाद परिणामों को बताता है और उसे हॉल में मौजूद बोर्ड पर भी लिखता है। इसके साथ ही यह आंकड़ा चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाता है। आमतौर पर परिणामों का पहला रुझान लगभग 9 बजे तक आता है। यह क्रम पूरे दिन चलता है और दोपहर तक स्थिति कुछ हद तक साफ़ होने लगती है।
कैसे होती है वोटों की गिनती
चुनाव आयोग मतदान के लिए EVM मशीन का इस्तेमाल करता है। EVM मशीन में मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने वाले बटन को दबाकर उसे वोट देते हैं. वोटिंग की प्रक्रिया खत्म होने के बाद प्रत्येक राउंड में एक बार में 14 EVM मशीनों पर ही गिनती होती है। एक राउंड में 14 EVM मशीनों के वोटों को गिना जाता है। गिनती के बाद परिणामों को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होती है और इसे ब्लैक बोर्ड पर दर्ज किया जाता है।
VVPAT सिस्टम क्या होता है?
साल 2014 से मतदान के प्रोसेस में Voter Verified Paper Audit Trail (VVPAT) को जोड़ दिया गया। VVPAT सिस्टम में EVM में वोट देने के बाद उस उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिन्ह वाली एक पेपर स्लिप तैयार होती है। इससे मतदान में पारदर्शिता बढ़ती है। तय होता है कि आपने जिस उम्मीदवार को वोट दिया है, उसे वोट मिला है या नहीं। इससे चुनाव प्रणाली में मतदाताओं का विश्वास मजबूत होता है।
रिजल्ट अलग होने पर क्या होता है?
गिनती के समय VVPAT पर्चियों और उसके संबंधित EVM के वोटों के परिणाम का मिलान किया जाता है। परिणामों के मिलान प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर निर्वाचन क्षेत्र के लिए अंतिम परिणाम घोषित कर सकता है। अक्सर VVPAT पर्चियों और उसके संबंधित EVM के वोटों के परिणाम समान होते हैं. लेकिन इन परिणामों में अंतर हो तब क्या होता है? ऐसे मामलों में, VVPAT की पर्चियों के परिणाम को अंतिम माना जाता है। वीवीपैट पर्चियों का सत्यापन मतगणना हॉल में एक सुरक्षित वीवीपैट काउंटिंग बूथ के अंदर किया जाता है। इस बूथ में केवल अधिकृत कर्मियों को आने की अनुमति होती है। इस तरह वीवीपैट की संख्या पर अंतिम मुहर लगती है।
मतगणना में यह लोग होते हैं मौजूद
मतगणना के दौरान सभी टेबलों पर हर उम्मीदवार का एक एजेंट मौजूद होता है। एक केंद्र में विशेष हालातों को छोड़कर 14 से ज्यादा टेबलें नहीं लगाई जा सकती हैं। इसके अलावा उम्मीदवार का एक एजेंट रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के पास लगी टेबल पर बैठता है। इस तरह से हॉल में मतगणना करने वाला कर्मी, उम्मीदवारों के एजेंट और RO ही रह सकता है। हॉल के अंदर पुलिसकर्मियों तक का आना निषेध होता है। हालांकि अगर उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर किसी विशेष वजह से बुलाए तो वह जा सकते हैं। बता दें कि केंद्र के अंदर केवल काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट, मतगणना के लिए लगाए गए सरकारी कर्मचारी, चुनाव आयोग के द्वारा लगाए गए अधिकारी, उम्मीदवार और उनके एजेंट ही जा सकते हैं। लेकिन अगर इनके पास आयोग के और स्थानीय अधिकारियों के द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र नहीं होता है तो यह लोग भी केंद्र के अंदर नहीं जा सकते हैं।



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