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Atal Bihari Vajpayee Death Anniversary : अटलजी की पुण्यतिथि पर पढें उनकी देशभक्ति से भरी कविताएं और विचार
Atal Bihari Vajpayee death anniversary: 16 अगस्त को पूरा देश अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के तौर पर मनाता है। 1924 को ग्वालियर में जन्मे वाजपेयी जी ने तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में सेवा की। उन्हें 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। राजनेता होने के साथ-साथ वे एक संवेदनशील कवि भी थे।
उनके विचार और कविताएं आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और राष्ट्रप्रेम, मानवता तथा जीवन मूल्यों का संदेश देती हैं। आज उनकी पुण्यतिथि के मौके पर पढते हैं उनकी जोश और देशभक्ति से लबरेज कोट्स और कविताएं।

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रेरक विचार (Inspirational Quotes by Atal Bihari Vajpayee)
1. अटल जी के विचार आज भी समाज और राजनीति के लिए मार्गदर्शक हैं। उनके कुछ महत्वपूर्ण विचार निम्नलिखित हैं:
2. हम केवल अपने लिए ना जीएं, औरों के लिए भी जीएं... हम राष्ट्र के लिए अधिकाधिक त्याग करें। यदि भारत की दशा दयनीय है तो दुनिया में हमारा सम्मान नहीं होगा। लेकिन यदि हम सभी दृष्टियों से सुसंपन्न हैं तो दुनिया हमारा सम्मान करेगी।
3. गरीबी, दरिद्रता गरिमा का विषय नहीं है, बल्कि यह विवशता है। मजबूरी का नाम संतोष नहीं हो सकता।
4. हे प्रभु! मुझे इतनी ऊंचाई कभी मत देना कि गैरों को गले ना लगा सकूं, इतनी रुखाई कभी मत देना।
5. सरकारें आएंगी, जाएंगी, पार्टियां बनेंगी, बिगड़ेंगी, मगर यह देश रहना चाहिए।
6. हमारा लक्ष्य अनंत आकाश जितना ऊंचा हो सकता है, लेकिन मन में एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ने का संकल्प होना चाहिए, क्योंकि जीत हमारी होगी।
7. हिंसा किसी भी चीज में योगदान नहीं देती है।
8. आप मित्र बदल सकते हैं मगर पड़ोसी नहीं।"
9. कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैला हुआ यह भारत एक राष्ट्र है, अनेक राष्ट्रीयताओं का समूह नहीं।
10. इंसान बनो - केवल नाम, रूप या शक्ल से नहीं, बल्कि हृदय, बुद्धि और ज्ञान से बनो।"
11. इन विचारों से स्पष्ट होता है कि वाजपेयी जी केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि जीवन के दृष्टिकोण और मूल्यों के प्रेरक भी थे।
अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं (Poems by Atal Bihari Vajpayee)
अटल जी की कविताओं में देशभक्ति, मानवता और जीवन के संघर्ष की झलक मिलती है। उनके कुछ प्रमुख कविताएं निम्नलिखित हैं:
1. गीत नया गाता हूँ
टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर
पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर
झरे सब पीले पात, कोयल की कुहुक रात
प्राची में अरुणिमा की रेख देख पाता हूँ
गीत नया गाता हूँ, टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी
अंतर की चीर व्यथा पलकों पर ठिठकी
हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हूँ, गीत नया गाता हूँ
2. मौत से ठन गई (Death Stood Firm)
ठन गई! मौत से ठन गई!
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िंदगी से बड़ी हो गई
मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िंदगी-सिलसिला आज-कल की नहीं
मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?
हर चुनौती से दो हाथ किए,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए
आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है
मौत से ठन गई।
3. सपना टूट गया
हाथों की हल्दी है पीली
पैरों की मेहँदी कुछ गीली
पलक झपकने से पहले ही सपना टूट गया
दीप बुझाया रची दीवाली
व्यर्थ हुआ आवाहन, स्वर्ण सबेरा रूठ गया
सपना टूट गया, नियति नटी की लीला न्यारी
रोते-रोते रात सो गई...
दर्द पुराना, मीत न जाना
4. आओ फिर से दिया जलाएँ
भरी दुपहरी में अँधियारा
सूरज परछाईं से हारा
अंतरतम का नेह निचोड़ें, बुझी हुई बाती सुलगाएँ
आओ फिर से दिया जलाएँ
हम पड़ाव को समझे मंज़िल
वतर्मान के मोहजाल में आने वाला कल न भुलाएँ
आओ फिर से दिया जलाएँ



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