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Basant Panchami Sanskrit Quotes: बसंत पंचमी पर स्टूडेंट्स को भेजें ये श्लोक, मां सरस्वती की होगी कृपा
Basant Panchami 2025 Sanskrit Quotes : हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सरस्वती पूजा माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। यह त्योहार सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है। बंगाल, पंजाब, हरियाणा, असम और ओडिशा सहित कई राज्यों में इसे धूमधाम से मनाया जाता है।
इस दिन स्कूल-कॉलेजों में मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। भक्तजन विद्या, ज्ञान और कला की देवी से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी आराधना करते हैं। बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की कृपा श्लोकों और शुभकामनाओं के माध्यम से प्रियजनों तक पहुँचाएं।

बसंत पंचमी श्लोक (Basant Panchami Shlokas 2025)
1. या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता। सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
आप सभी को बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
अर्थात : देवी सरस्वती, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और शिव सदा पूजते हैं, समस्त जड़ता को नष्ट कर ज्ञान और बुद्धि प्रदान करती हैं।
2. शारदा शारदाम्भोजवदना वदनाम्बुजे।
सर्वदा सर्वदास्माकं सन्निधिं सन्निधिं क्रियात्॥
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारंभं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा॥
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
अर्थात : हे मां सरस्वती, शरत ऋतु में उत्पन्न कमल के आसन पर विराजमान, समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाली देवी, आप सदैव मेरे मुख में सभी समृद्धियों के साथ विराजमान रहें। हे वरदायिनी, हे कामरूपिणी माता, मैं विद्या आरंभ करने जा रहा हूँ, कृपया अपनी कृपा दृष्टि मुझ पर बनाए रखें। मुझे ज्ञान, बुद्धि और सफलता प्रदान करें, ताकि मैं अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकूं।
3. या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वृस्तावता ।
या वीणा वर दण्ड मंडित करा या श्वेत पद्मसना ।।
या ब्रह्माच्युत्त शंकर: प्रभृतिर्भि देवै सदा वन्दिता ।
सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्या पहा।।
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं!
अर्थात : जो विद्या की देवी भगवती सरस्वती कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह श्वेत वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर अपना आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं शंकर आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती आप हमारी रक्षा करें।
4. ॐ श्री सरस्वती शुक्लवर्णां सस्मितां सुमनोहराम्।। कोटिचंद्रप्रभामुष्टपुष्टश्रीयुक्तविग्रहाम्। वह्निशुद्धां शुकाधानां वीणापुस्तकमधारिणीम्।। रत्नसारेन्द्रनिर्माणनवभूषणभूषिताम्। सुपूजितां सुरगणैब्रह्मविष्णुशिवादिभि:।। वन्दे भक्तया वन्दिता च।
अर्थात : हे विद्या की देवी माँ सरस्वती, आपको प्रणाम! आप श्वेत वस्त्र धारण किए हुए हैं और हंस पर विराजमान हैं। आपके मुकुट पर चंद्रमा सुशोभित है। एक हाथ में पवित्र पुस्तक है और दूसरे हाथ में वीणा धारण किए हुए हैं। आप ज्ञान, संगीत और कला की देवी हैं। आप विद्यार्थियों को बुद्धि, विवेक और विद्या प्रदान करती हैं। आपकी कृपा से अज्ञान दूर होता है और ज्ञान का प्रकाश फैलता है। हे माँ, हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
5. या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेणसंस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
अर्थात : जो देवी सब प्राणियों में ज्ञान या बुद्धि के रूप में स्थित हैं, उनको नमस्कार, नमस्कार, बारंबार नमस्कार है।
6. वीणाधरे विपुलमङ्गलदानशीले भक्तार्तिनाशिनि विरिञ्चिहरीशवन्द्ये।
कीर्तिप्रदेऽखिलमनोरथदे महार्हे विद्याप्रदायिनि सरस्वतिनौमि नित्यम्।।
अर्थात : हे वीणा धारिणी, अपार मंगलदायिनी, भक्तों के दुःख हरने वाली मां सरस्वती! ब्रह्मा, विष्णु और शिव द्वारा वंदित, कीर्ति और मनोरथ प्रदान करने वाली, पूज्य और विद्या देने वाली देवी! मैं आपको नित्य प्रणाम करता हूँ। कृपा करें, मुझे ज्ञान, बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद दें। जय माँ सरस्वती!
7 . घंटाशूलहलानि शंखमुसले चक्रं धनु: सायकं हस्ताब्जैर्दघतीं धनान्तविलसच्छीतांशु तुल्यप्रभाम्।
गौरीदेहसमुद्भवा त्रिनयनामांधारभूतां महापूर्वामत्र सरस्वती मनुमजे शुम्भादि दैत्यार्दिनीम्।।
अर्थात : जो अपने हस्त कमल में घंटा, त्रिशूल, हल, शंख, मूसल, चक्र, धनुष और बाण को धारण करने वाली, गोरी देह से उत्पन्ना, त्रिनेत्रा, मेघास्थित चंद्रमा के समान कांति वाली, संसार की आधारभूता, शुंभादि दैत्य का नाश करने वाली महासरस्वती को हम नमस्कार करते हैं। माँ सरस्वती जो प्रधानतः जगत की उत्पत्ति और ज्ञान का संचार करती है।
8. ओउम या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ,
या वीणावरदण्डमण्डित करा या श्वेत पद्मासना।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
अर्थात : मां सरस्वती विद्या की देवी हैं, जिनका स्वरूप कुन्द पुष्प, चंद्रमा और हिम के समान श्वेत है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और उनके करकमलों में वीणा विराजमान है। वे शुभ्र कमल पर विराजित हैं और त्रिदेव भी उनकी वंदना करते हैं। समस्त अज्ञान को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाली मां सरस्वती हमारा पालन-पोषण करें और हमें बुद्धि प्रदान करें।



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