India UK FTA Trade Deal: सिल्क प्रेमियों की पहली पसंद है भागलपुरी सिल्क, जानें इस रेशम की खूब‍ियां

Free Trade Agreement India UK: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन के दौरे पर हैं और देश को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने गुरुवार को मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। मोदी ने बताया कि इस व्यापार समझौते के तहत अब कपड़ा, ड्राई फ्रूट्स, चमड़ा, ज्वेलरी आदि क्षेत्रों को लाभ होगा। ऐसे में भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच होने वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) (FTA) ने बिहार के पारंपरिक वस्त्र उद्योग के लिए एक नई उम्मीद जगा दी है। इस डील के तहत भागलपुरी सिल्क को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता आसान हो गया है।

यह न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी दुनिया तक पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है। अब भागलपुर की गलियों में बनने वाला रेशमी कपड़ा सीधे ब्रिटेन की फैशन गलियों तक पहुंचेगा वो भी कम टैरिफ या बिना किसी शुल्क के। तो आइए जानते हैं कि भागलपुरी सिल्क क्या है, इसकी खासियत क्या है, और क्यों यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर तारीफें बटोर रहा है।

क्या है भागलपुरी सिल्क?

भागलपुरी सिल्क, जिसे 'तसर सिल्क' भी कहा जाता है, बिहार के भागलपुर जिले में बनने वाला एक खास किस्म का रेशमी कपड़ा है। बिहार में सिल्क को रेशम कहा जाता है। यह क्षेत्र लगभग 200 साल पुरानी सिल्क बुनाई परंपरा के लिए जाना जाता है और इसे भारत की "सिल्क सिटी" भी कहा जाता है। यह रेशमी कपड़ा मुख्यतः तसर रेशम के कीड़ों से तैयार किया जाता है जो अपने प्राकृतिक सुनहरे रंग और खुरदुरी चमक के लिए प्रसिद्ध हैं।

Bhagalpuri Silk to Be Exported to UK

क्या आप जानते हैं भागलपुरी सिल्क की खासियतें

अब ये तो हमने जान लिया की भागलपुरी सिल्क की अब ब्रिटेन के फैशन में लहराएगा। लेकिन अब ये भी जान लेते हैं कि भागलपुरी सिल्क की खासियतें क्या हैं। चलिए फिर जल्दी से जान लेते हैं भागलपुरी सिल्क की खासियतें जिसे वहां रेशम कहा जाता है।

1. प्राकृतिक चमक और टेक्सचर

इसका रेशमी कपड़ा बहुत हल्का होता है, जो इसे गर्मियों में पहनने के लिए बेहद उपयुक्त बनाता है।

2. हाथ से बुनाई और डाईंग

भागलपुरी सिल्क का कपड़ा पारंपरिक करघों पर हाथ से बुना जाता है, और प्राकृतिक रंगों से रंगा जाता है जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल भी होता है।

3. कलात्मक डिजाइन

भागलपुरी सिल्क की साड़ियों, दुपट्टों और स्टोल्स पर पारंपरिक ब्लॉक प्रिंटिंग और जरी वर्क देखने को मिलता है जो उन्हें और भी खास बनाता है।

4. लंबी उम्र और टिकाऊपन

भागलपुरी सिल्क की गुणवत्ता बरसों तक बनी रहती है, और यह फैशन व टैक्सटाइल इंडस्ट्री में एक टिकाऊ विकल्प माना जाता है।

ब्रिटेन में बढ़ेगा मांग का रेशमी ग्राफ

FTA के चलते अब भारतीय कारीगरों और बुनकरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का मौका मिलेगा। UK के फैशन मार्केट में भागलपुरी सिल्क की कारीगरी और ऑथेंटिसिटी को खूब सराहा जा सकता है। यह डील न सिर्फ निर्यात में इजाफा लाएगी, बल्कि स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा देगी खासकर बिहार जैसे राज्य में, जहां बुनाई एक सांस्कृतिक विरासत है। भागलपुरी सिल्क, जो अब तक सीमित दायरे में प्रसिद्ध था, अब अंतरराष्ट्रीय रनवे और बाजारों की शान बनने जा रहा है। यह सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का एक रेशमी विस्तार है।

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