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PV Narasimbha Rao : 65 की उम्र में सीखी कोडिंग, 16 भाषाओं के ज्ञाता, किस्मत ने दिया साथ और बने प्रधानमंत्री
Bharat Ratna PV Narasimha Rao : देश के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को मरणोपरांत देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न देने का एलान किया है। नरसिम्हा राव लगातार आठ बार चुनाव जीते और कांग्रेस पार्टी में 50 साल से ज्यादा समय गुजारने के बाद भारत के प्रधानमंत्री बने।
राव को भारत की राजनीति का चाणक्य कहा जाता है। वे भारत में आर्थिक उदारीकरण के जनक माने जाते हैं। आइए जानते है पीवी नरसिम्हा राव के बारे में।

परिवार और शिक्षा
पी.वी. राव का जन्म 28 जून 1921 को आंध्र प्रदेश के करीमनगर में हुआ था। उन्होंने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय, मुंबई विश्वविद्यालय व नागपुर विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई की थी। पीवी नरसिंह राव के तीन बेटे और पांच बेटियां हैं। पेशे से कृषि विशेषज्ञ व वकील रहे राव राजनीति में आए और कुछ महत्वपूर्ण विभागों का कार्यभार संभाला।
कॅरियर
वे आंध्र प्रदेश सरकार में 1962 से 64 तक कानून व सूचना मंत्री, 1964 से 67 तक कानून व विधि मंत्री, 1967 में स्वास्थ्य व चिकित्सा मंत्री और 1968 से 1971 तक शिक्षा मंत्री रहे। वे 1971 से 73 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे। वे 1975 से 76 तक अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के महासचिव, 1968 से 74 तक आंध्र प्रदेश के तेलुगू अकादमी के अध्यक्ष और 1972 से मद्रास के दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के उपाध्यक्ष रहे। वे 1957 से 1977 तक आंध्र प्रदेश विधान सभा के सदस्य, 1977 से 84 तक लोकसभा के सदस्य रहे और दिसंबर 1984 में रामटेक से आठवीं लोकसभा के लिए चुने गए।
वे 14 जनवरी 1980 से 18 जुलाई 1984 तक विदेश मंत्री, 19 जुलाई 1984 से 31 दिसंबर 1984 तक गृह मंत्री एवं 31 दिसंबर 1984 से 25 सितम्बर 1985 तक रक्षा मंत्री रहे। उन्होंने 5 नवंबर 1984 से योजना मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था। 25 सितम्बर 1985 से उन्होंने राजीव गांधी सरकार के मंत्रीमंडल में मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में पदभार संभाला।
एक घटना ने पलट दी किस्मत
राव सन्यास लेने की तैयारी कर रहे थे लेकिन 21 मई 1991, की एक घटना ने सब कुछ बदल गया। तमिलनाडु में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई और इस दुर्घटना ने पीवी नरसिंह राव की राजनीति को एक नए मोड़ पर खड़ा कर दिया। नरसिंह राव को जब राजीव गांधी की हत्या की खबर मिली तो वह 10 जनपथ पहुंचे। वहां पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी पहले से मौजूद थे।
नरसिंह राव तत्कालीन राष्ट्रपति आर. वेंकटरमण की पसंद थे। साथ ही उन्हें केरल के कद्दावर नेता के. करुणाकरण और कई सांसदों का साथ भी मिला। आखिरकार पहले वह 29 मई 1991 को कांग्रेस के अध्यक्ष चुन लिए गए. अगले ही महीने लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 232 सीटों के साथ वापसी की। सबसे अनुभवी नेता होने के नाते नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने।
राव को एक कोने में ले गए और कहा कि पार्टी में आम सहमति है और सब चाहते हैं कि आप अगले अध्यक्ष बनें। राव यह खबर सुनकर बहुत खुश हुए लेकिन उस मौके पर अपनी खुशी जाहिर नहीं होने दी।
आर्थिक उदारीकरण का श्रेय जाता है पीवी नरसिंह राव को
आर्थिक उदारीकरण की नीतियां लाकर देश को तेज तरक्की की नई राह दी। नरसिंह राव के कारण भारत में बड़े पैमाने पर निवेश होना शुरू हुआ। बड़े ब्रांड और बड़ी कंपनियां जब भारत आईं तो नौकरियों के बेतहाशा अवसर बनने शुरू हुआ। लोगों की आमदनी ही नहीं बढ़ी बल्कि ऊंची सैलरियों और एक अच्छी लाइफस्टाइल की भी शुरुआत हुई।
17 भाषा बोलने में थी महारत हासिल
पीवी नरसिम्हा राव एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री थे। जिन्हें 17 भाषा का ज्ञान था। वो इन्हें बोलने के अलावा अनुवाद करने में भी माहिर थे। इनमें हिंदी, इंग्लिश, तेलुगु के अलावा तमिल, मराठी, कन्नड़, बंगाली, गुजराती, उड़िया, उर्दू, अरेबिक, फ्रेंच, लेटिन अमेरिकन, पर्शियन, स्पेनिश, ग्रीक और जर्मन भाषा शामिल थी।
65 की उम्र के बाद कंप्यूटर और कोडिंग सीखी
बात उन दिनों की है जब कंप्यूटर के कलपुर्जों को आयात कर यहां जोड़ने का काम हुआ करता था। तब नरसिम्हा राव ने कंप्यूटर सीखने के बारे में सोचा। इसके लिए उन्होंनेकंप्यूटर टीचर पसंद नहीं आए। फिर उन्होंने अपने बेटे को कंप्यूटर चलाना सीखने के लिए मैनुअल और कुछ उपयोगी किताबें भेजने को कहा। छह महीने लगातार सुबह, शाम वे कंप्यूटर सीखने में लगे रहते। उन्होंने दो कंप्यूटर लैंग्वेज सीखकर 65 साल की उम्र पार करने के बाद कंप्यूटर कोड बनाया था।



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