Cancer Survivors Day: कैंसर को मात देकर, लोगों में जगा रही हैं जीने की नई उम्‍मीदें

Cancer Survivor : कैंसर जैसी बीमारी लोगों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होती है। इस बीमारी के नाम से लोगों में डर सा रहता है, वहीं विभा रानी ने इसे खतरनाक बीमारी को मात देकर लोगों के बीच एक मिसाल कायम की है। एक लेखक, गायक और एक फिल्म-थिएटर आर्टिस्‍ट हैं।

एक लेखक के रूप में विभा ने 30 से अधिक पुस्तकें और 20 से अधिक नाटक लिखे हैं। इसके अलावा इन्‍होंने इन नाटकों में अभिनय भी किया है और वे एक मंच कलाकार भी है। इसके अलावा जो सबसे बड़ी बात है, जो विभा की जिंदगी को नया आयाम देता है, वो हैं क‍ि ये कैंसर सर्वाइवर है और कैंसर से उबरने के बाद इन्‍होंने सेलिब्रेटिंग कैंसर नाम से ऑनलाइन प्रोग्राम शुरू किया है।

जिसमें ये कैंसर से पीड़ित लोगों की काउंसिल‍िंग करके उन्‍हें जीने की नई उम्‍मीद जगाती है। आइए जानते हैं विभा रानी के इस जंग के बारे में जिसे मात देकर वो लोगों के बीच जीने की नई उम्‍मीदें जगा रही हैं।

विभा की कैंसर जर्नी

विभा बताती हैं क‍ि उनका कैंसर का सफर 6 साल का था। अक्टूबर 2013 में ब्रेस्‍ट कैंसर के स्‍टेज 2 के बारे में पता चला था। 1997 में ब्रेस्‍ट में हुई गांठ का ऑपरेशन नवंबर 2013 में ऑपरेशन हुआ।

ऑपरेशन से पहले के दर्द को याद करके वो बताती हैं क‍ि गांठ बढ़ रही थी। कोई दर्द नहीं था। जब कभी हम स्तनों के बारे में बात करते हैं तो लोग कहते हैं कि आप स्त्री रोग विशेषज्ञ के पास जाकर जांच कराएं। मैं चेन्नई अपोलो अस्पताल गई। डॉक्‍टर ने मुझे आश्‍वासन द‍िया क‍ि चिंता की कोई बात नहीं है। लेक‍िन ये दर्द कम नहीं हुआ।

मैं मुंबई गई, और मुझे एक अस्पताल से सलाह मिली क‍ि मुझे ऑन्कोलॉजिस्ट से मिलना चाह‍िए। मैंने तुरंत अपॉइटमेंट ली और मैमोग्राफी और सोनोग्राफी ने ब्रेस्‍ट कैंसर की पुष्टि हुई। नवंबर 2009 की बात है, जब मेरा ऑपरेशन हुआ।

लड़ने का किया फैसला

परिवार की चौथी सदस्‍य थी, जिसे कैंसर हुआ। वो बताती हैं क‍ि मैंने कैंसर के कारण परिवार के सदस्यों को खोया है। मैं परिवार की चौथी सदस्य थी जिसे ब्रेस्‍ट कैंसर के बारे में मालूम चला। मैं बिल्‍कुल भी नहीं रोई और फैसला किया कि मैं मरूंगी नहीं। मैंने यह भी तय किया कि मैं अपने विश्‍वास और भाग्य पर सवाल नहीं उठाऊंगी।

मैंने तय किया कि जैसे चीजें आती हैं, मैं वैसे उनका सामना करुंगी। मैं जब भी कीमोथेरेपी के ल‍िए जाती थीं तो वहां मौजूद नर्सें मुझे देखकर खुश हो जाती थीं।

डॉक्टर ने मुझे बताया कि ब्रेस्ट कैंसर को ठीक होने में 8-9 महीने लगेंगे। मैं इस दौरान भी बहुत एक्टिव थी। मैंने इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर वीडियो और रील बनाना शुरू कर दिया। इस दौरान खूब पढ़ी भी और ल‍िखने का काम जारी रखा।

आज कर रही हूं खूब काम

मैंने अपने कमरे को थिएटर में बदल दिया। मैंने नाटकों के लिए लोगों को आमंत्रित करना शुरू किया। मैंने आत्मकथा भी लिखी है। लोग इस दौरान भी मेरे नाटकों का आनंद लेते थे। मैंने काउंसिल‍िंग शुरू कर दी। और मुझे अपने अनुभवों को लोगों के साथ साझा करना अच्छा लगता है।

Breast Cancer Survivor: Vibha Rani

इन दिनों मैं अपने सोशल पेज के जरिए कैंसर के मरीजों को इलाज को लेकर सही सलाह देती हूं। मैथिली गारी गीत, लोकगीत, स्टोरी टेलिंग, थिएटर, फिल्म,वेबसीरीज...जैसे काम अपने शौक से कर रही हूं।

साल में एक बार जाती हूं फॉलोअप के ल‍िए
विभा ने रेडिएशन के साइड इफेक्‍ट के बारे में बताया क‍ि कीमो और रेडिएशन आसान राह नहीं हैं, बहुत दर्द झेलना पड़ता है। साथ ही उल्‍टी, बुखार वगैरह। रेडिएशन से स्किन जल जाती है। गर्दन में घाव और छाले हो जाते हैं। गर्दन और छाती के पास का हिस्‍सा लाल पड़ जाता है। कैंसर। 8 साल से ज्‍यादा का समय हो चुका है। वैसे तो पूरी तरह ठीक हूं, लेक‍िन दवा अब भी चल रही हैं। डॉक्‍टर ने कहा है कि 10 साल तक दवाई खानी होगी। पहले हर छह महीने में एक बार फॉलोअप के लिए बुलाते थे, अब साल में एक बार आने को कहा है। मतलब अभी सब ठीक है।

Story first published: Monday, May 29, 2023, 21:30 [IST]
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