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बजट से पहले राष्ट्रपति ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को खिलाया दही-चीनी, जानें इस खास परंपरा की वजह
Budget 2026: आज, 1 फरवरी 2026, भारत के लिए एक अहम दिन है। आज केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी, जो आने वाले साल के लिए देश की आर्थिक दिशा और विकास का रोडमैप तय करेगा। केंद्रीय बजट सिर्फ सरकारी आय-व्यय का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों और भविष्य की योजनाओं की झलक भी दिखाता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में अपना नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। हर साल बजट पेश होने से पहले राष्ट्रपति वित्त मंत्री को दही और चीनी खिलाते हैं। संसद में बजट पेश करने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने राष्ट्रपति भवन पहुंचीं। राष्ट्रपति भारतीय परंपरा के अनुसार उन्हें दही-चीनी खिलाते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि दही-चीनी खिलाने के पीछे क्या वजह है? आज इस लेख में हम आपको बताएंगे कि बजट से पहले दही-चीनी खिलाने की परंपरा क्यों निभाई जाती है -

बजट से पहले दही-चीनी खिलाने के पीछे का कारण
भारतीय संस्कृति में ऐसे कई रीति-रिवाज हैं, जो पॉजिटिविटी और अच्छे भाग्य का प्रतीक हैं। ऐसी ही एक परंपरा हर साल केंद्रीय बजट पेश करने से पहले निभाई जाती है। राष्ट्रपति वित्त मंत्री को बजट पेश करने जाने से पहले दही-चीनी खिलाते हैं। दरअसल, भारतीय परंपरा में किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले दही-चीनी खिलाना शुभता और सफलता का प्रतीक माना जाता है। दही को शुद्धता और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।वहीं, चीनी मिठास और सफलता से संबंधित है। मान्यता है कि किसी भी काम को शुरू करने से पहले दही-चीनी खाने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस परंपरा के जरिए देश के आने वाले आर्थिक भविष्य के लिए शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया जाता है।
दही और चीनी के स्वास्थ्य लाभ
दही और चीनी सिर्फ आध्यात्मिक ही नहीं, बल्कि शारीरिक लाभ भी देता है। दही शरीर को ठंडक देता और पाचन को बेहतर करता है। जबकि, चीनी शरीर में तुरंत एनर्जी देता है। इसी वजह से किसी महत्वपूर्ण कार्य से पहले दही-चीनी खिलाया जाता है।
बजट पेश करने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
आज का बजट एक और वजह से खास है। दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज अपना नौवां बजट पेश कर रही हैं। स्वतंत्र भारत में सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड मोरारजी देसाई के नाम है। उन्होंने कुल 10 बजट पेश किए थे, जिसमें 1959 से 1964 के बीच वित्त मंत्री के रूप में छह और 1967 से 1969 के बीच चार बजट शामिल हैं। आज के बजट के साथ, निर्मला सीतारमण इस ऐतिहासिक रिकॉर्ड से बस एक कदम दूर रह जाएंगी। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आज का बजट आम जनता, मध्यम वर्ग और देश की अर्थव्यवस्था के लिए क्या खास सौगात लेकर आता है।



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