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Chardham Yatra करने से पहले पढ़ लें ये 5 बड़े नियम, इन लोगों को नहीं मिलेगी यात्रा की अनुमति
Chardham Yatra New Rules: आज यानी 19 अप्रैल से अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का विधिवत शंखनाद हो गया है। आज गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। गंगोत्री धाम के कपाट दोपहर 12:15 बजे और यमुनोत्री धाम के कपाट 12:35 बजे खोले जाएंगे। वहीं, केदारनाथ के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ के द्वार 23 अप्रैल को खुलेंगे। उत्तराखंड सरकार ने 2026 यात्रा सीजन के लिए नई हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर कम ऑक्सीजन और अत्यधिक ठंड को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 5 श्रेणी के लोगों के लिए यह यात्रा जानलेवा साबित हो सकती है। यदि आप भी देवभूमि यानी चारधाम यात्रा पर जाने की योजना बना रहे हैं, तो इन नियमों को ध्यान से पढ़ें...

इन 5 श्रेणी के लोगों को यात्रा की अनुमति नहीं
1. गंभीर हृदय और सांस रोगों से पीड़ित
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण अस्थमा, हृदय रोगियों और अनयंत्रित बीपी वालों को यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। दरअसल, ऊचांई पर चढ़ने से अस्थमा के मरीजों का सांस ज्यादा फूलने लगता है। वहीं हृदय रोगी और जिन्हें पहले हार्ट अटैक आ चुका है या जिनका हृदय कमजोर है उन्हें भी चारधाम यात्रा न करने की सलाह दी जाती है और जिन लोगों का बीपी कंट्रोल में नहीं रहता है उन्हें भी इस यात्रा पर न जाने के लिए कहा जाता है।
2. हेल्थ स्क्रीनिंग में फेल होने वाले यात्री
सरकार ने ऋषिकेश, सोनप्रयाग और जानकीचट्टी जैसे प्रमुख पड़ावों पर सख्त मेडिकल चेकअप की व्यवस्था की है। यदि आपका ऑक्सीजन लेवल (SpO2) 90% से कम पाया जाता है, तो डॉक्टर आपको यात्रा की अनुमति नहीं देंगे। गंभीर रूप से अस्वस्थ पाए जाने वाले श्रद्धालुओं को रास्ते से ही वापस (Refusal) कर दिया जाएगा।

3. बिना अनिवार्य रजिस्ट्रेशन वाले श्रद्धालु
अब चारधाम यात्रा केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि कड़े नियमों के तहत होगी। बिना ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन और आवंटित स्लॉट के किसी भी यात्री को चेक पोस्ट से आगे नहीं जाने दिया जाएगा। यात्रियों के पास आवंटित दिन का QR कोड या पर्ची होना अनिवार्य है।
4. अति वृद्ध और छोटे बच्चे
यद्यपि कोई कानूनी पाबंदी नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सुझाव दिया है कि 80 वर्ष से अधिक के अति वृद्ध लोग जिन्हें चलने-फिरने में गंभीर समस्या है, वे यात्रा न करें। वहीं 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे केदारनाथ जैसे दुर्गम पैदल मार्गों के जोखिम को नहीं समझ सकते, इसलिए उन्हें साथ लाना खतरनाक हो सकता है।
5. 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाएं
पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और घोड़े-खच्चर की सवारी से गर्भपात का खतरा रहता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 6 सप्ताह या उससे अधिक की गर्भवती महिलाओं को ऊंचाई वाले क्षेत्रों (विशेषकर केदारनाथ और यमुनोत्री) की यात्रा से पूरी तरह परहेज करना चाहिए।
यात्रियों के लिए जरूरी गाइडलाइन्स (Travel Advisory 2026)
सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने ये सुझाव दिए हैं:
एक्लिमेटाइजेशन (Acclimatization): पहाड़ों की ऊंचाई के अनुकूल ढलने के लिए ऋषिकेश या गुप्तकाशी में कम से कम 24-48 घंटे जरूर रुकें।
वॉकिंग प्रैक्टिस: यात्रा शुरू करने से कम से कम एक महीने पहले रोजाना 4-5 किमी पैदल चलने का अभ्यास करें।
इमरजेंसी किट: अपने साथ पल्स ऑक्सीमीटर, ग्लूकोज, गर्म कपड़े और अपनी नियमित दवाइयां अवश्य रखें।
नशा निषेध: यात्रा के दौरान शराब या धूम्रपान का सेवन फेफड़ों पर दबाव बढ़ाता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों में जानलेवा हो सकता है।



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