Latest Updates
-
Ganesh Chaturthi Decoration Ideas: गणेश चतुर्थी पर ऐसे सजाएं बप्पा का दरबार, कम खर्च में ये आइडियाज आएंगे काम -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज पर हाथों में लगी मेहंदी का चाहती हैं डार्क कलर, तो आजमाएं ये 4 आसान टिप्स -
Modak Recipe: गणेश चतुर्थी पर बप्पा के लिए घर पर बनाएं उनके प्रिय उकडिचे मोदक, जानें इसकी आसान रेसिपी -
Hartalika Teej 2026: हरतालिका तीज का व्रत कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व -
ना मूर्ति, ना पुजारी, सूर्यास्त के बाद एंट्री भी मना, जानिए फिल्म 'The Vvaan' वाले वन देवी मंदिर का रहस्य -
नेपाल में बाढ़ के बाद भूकंप, इंडोनेशिया में फटा ज्वालामुखी, क्या बाबा वेंगा की भविष्यवाणी हुई सच? -
Pithori Amavasya 2026: आज या कल, पिठोरी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख, स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व -
World Suicide Prevention Day 2026: क्यों मनाया जाता है विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस? जानें इसका इतिहास और महत्व -
तांबे के बर्तन में पानी पीने से मिलेंगे ये 5 फायदे, डायजेशन के साथ इम्यूनिटी भी होगी मजबूत -
Ganesh Chaturthi 2026: कब है गणेश चतुर्थी? जानें तिथि, गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और विसर्जन की तारीख
क्या आप जानते हैं पहली पैसेंजर ट्रेन का किराया कितना था? रकम जानकर चौंक जाएंगे!
First Passenger Train Fare : 1 जुलाई से रेल यात्रा महंगी हो सकती है। नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के किराए में 1 पैसा प्रति किलोमीटर और एसी क्लास में 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी की संभावना है। जानकारी के हवाले से यह नया किराया 1 जुलाई 2025 से लागू होगा। उस तारीख के बाद किए गए टिकट बुकिंग पर नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा। गौरतलब है कि रेलवे ने आखिरी बार 2020 में यात्री किराया बढ़ाया था।
आज भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है, लेकिन इसकी नींव 172 साल पहले, अंग्रेजों के शासनकाल में रखी गई थी। भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई (तत्कालीन बॉम्बे) के बोरी बंदर से ठाणे के बीच चली थी।
इस ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी तय की थी और यह केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं थी, बल्कि भारत के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि उस वक्त टिकट का किराया कितना था?

21 तोपों की सलामी देकर की थी शुरुआत
बॉम्बे से ठाणे के बीच ट्रेन की शुरुआत भारत के लिए एक बेहद ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण था। ट्रेन के शुभारंभ के समय 400 से अधिक आमंत्रित यात्री इसमें सवार हुए थे और बोरी बंदर स्टेशन से दोपहर 3.30 बजे यह ट्रेन रवाना हुई। जब ट्रेन ने अपनी पहली यात्रा शुरू की, तो उसे 21 तोपों की सलामी दी गई थी। रेलवे के दस्तावेजों के अनुसार, यह ट्रेन शाम 4.45 बजे ठाणे स्टेशन पहुंची थी। कुल 34 किलोमीटर की दूरी को तय करने में इसे 1 घंटा 15 मिनट का समय लगा था।
3 इंजन और 14 डिब्बों की थी यह ट्रेन
उस समय तकनीक की सीमाओं के चलते एक इंजन से इतनी दूरी तय करना मुश्किल था। इसलिए इस पहली ट्रेन को तीन भाप इंजनों, साहिब, सिंध और सुल्तान ने खींचा था। ट्रेन में कुल 14 डिब्बे लगाए गए थे, जो उस समय के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती थी। इसमें पहली बार 400 यात्रियों ने यात्रा की थी।

पहली चली मालगाड़ी, फिर चली पैसेंजर
भारतीय रेलवे की शुरुआत 1837 में हुई, जब रेड हिल्स से चिंताद्रिपेट पुल तक पहली मालगाड़ी चलाई गई। इसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा माल ढुलाई और मुनाफा कमाना था। बाद में, 1853 में भारत में पहली पैसेंजर ट्रेन बोरीबंदर से ठाणे के बीच चली, जिसने यात्री रेल सेवा की नींव रखी।
इतना था इस ट्रेन का किराया?
इस ऐतिहासिक यात्रा में टिकट किराए को अलग-अलग क्लास में विभाजित किया गया था। भारत की पहली यात्री ट्रेन में प्रति मील के हिसाब से किराया तय किया गया था:
फर्स्ट क्लास - 30 पैसे प्रति मील
सेकंड क्लास - 16 पैसे प्रति मील
इंटरक्लास - 9 पैसे प्रति मील
थर्ड क्लास - 5 पैसे प्रति मील
बाद में जब इस मार्ग पर नियमित सेवा शुरू हुई, तो किराया रुपये में निर्धारित किया गया। सेकंड क्लास का टिकट ₹1 और फर्स्ट क्लास का टिकट ₹2 में मिलने लगा था।

कलकत्ता के लिए शुरू हुई सेवा
बॉम्बे में रेल सेवा शुरू होने के बाद, 15 अगस्त 1854 को पहली यात्री ट्रेन हावड़ा स्टेशन से हुगली के लिए चली, जिससे पूर्वी भारत में रेलवे की शुरुआत हुई। यह ट्रेन 24 मील की दूरी तय करती थी और ईस्ट इंडियन रेलवे के पहले खंड को सार्वजनिक उपयोग के लिए खोला गया। इसके बाद दक्षिण भारत में पहली रेलवे लाइन 1 जुलाई 1856 को शुरू हुई, जिसे मद्रास रेलवे कंपनी ने व्यासपदी जीवा निलयम और वालाजाह रोड (आरकोट) के बीच 63 मील के लिए शुरू किया।
लॉर्ड डलहोजी को जाता है इसका श्रेय
भारत में रेलवे की शुरुआत का विचार ब्रिटेन में रेलवे के आगमन के बाद आया। 1825 में जब इंग्लैंड में पहली ट्रेन स्टॉकटन से डार्लिंगटन के बीच चली, तो इसका असर भारत तक पहुंचा। 1832 में ब्रिटिश अधिकारियों को दक्षिण भारत से रेलवे परियोजना का प्रस्ताव मिला, लेकिन तब तक गंभीरता से इस पर काम नहीं हो पाया। फिर जब लॉर्ड डलहौजी 1848 में भारत के गवर्नर जनरल बने, तो उन्होंने देश में रेलवे की शुरुआत का निर्णय लिया। उन्हीं के निर्णय से वर्ष 1853 में भारत में पहली ट्रेन चल सकी।



Click it and Unblock the Notifications
