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भारत में आने वाली है महाप्रलय? दिखी 'प्रलय की मछली', जानें पुराणों में क्या है इसके पीछे की कहानी
Doomsday coming in India: क्या महाप्रलय आने वाली है? क्या कोई बड़ी अनहोनी होने वाली है? इस समय लगातार यह सवाल उठ रहे हैं क्योंकि कहीं विमान हादसे तो कहीं प्राकृतिक आपदा जैसे केस सामने आ रहे हैं। वहीं लगातार समुद्री तट पर ओरफिश मिल रही है जिसे प्रलय की मछली भी कहा जाता है और डोमडे फिश (Doomsday Fish) भी कहते हैं। सदियों से इस मछली का दिखाई देना अशुभ माना जाता है।
ऐसी मान्यता है कि इस मछली के दिखाई देना आपदाओं का अशुभ संकेत माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के तटों पर इस रहस्यमय मछली के मिलने के बाद हाल ही में भारत में तमिलनाडु के तट पर ओरफिश दिखाई दी थी। इस मछली का सतह पर आना संकट की सूचना माना जा रहा है। आइए जानते हैं ओरफिश का दिखाई देना किस बात का संकेत हैं और क्या है ओरफिश?

क्या है ओरफिश?
ओरफिश एक विशाल और लंबी गहराई में पाई जाने वाली मछली होती है, जिसे समुद्री "सर्पमछली" (Sea Serpent) भी कहा जाता है। यह मछली 30 फीट तक लंबी हो सकती है और सामान्यतः समुद्र की गहराई में 200 से 1,000 मीटर नीचे पाई जाती है। इसके सिल्वर जैसे चमकते शरीर और लाल शिखा की वजह से यह किसी पौराणिक जीव जैसी लगती है।

प्रलय की मछली को लेकर लोक कथाएं
जापान और दक्षिण एशिया की लोक कथाओं में ओरफिश को भूकंप या सुनामी की भविष्यवाणी करने वाली मछली माना जाता है। जापानी लोक विज्ञान में इसे 'नमाजू' (Namazu) के रूप में वर्णित किया गया है, जो समुद्र के नीचे रहती है और जब यह हिलती है तो भूकंप आता है। हालांकि, वैज्ञानिक इस विश्वास को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि ओरफिश की सतह पर उपस्थिति का प्राकृतिक आपदाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है। यह मछली तब दिखाई देती है जब वह बीमार होती है या किसी कारण से अपनी सामान्य गहराई से ऊपर आ जाती है।
The rarely seen oarfish, which usually are in deep-sea, which is also known as 'Doomsday' fish is caught in the net in TamilNadu pic.twitter.com/8N4TTNyDec
— Aryan (@chinchat09) June 16, 2025
भारत में क्यों मची हलचल?
दरअसल तमिलनाडु के मछुआरों ने गहरे समुद्र में रहने वाले एक और जीव को पकड़ा। यह विशालकाय मछली अपने विशाल आकार, धातु के तराजू और लाल शिखा के कारण प्रभावशाली थी। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग इसे देखने के लिए आए और शगुन और प्राकृतिक शगुन की दबी हुई कहानियों का आदान-प्रदान किया। वैज्ञानिक रूप से रेगलेकस ग्लेसने के रूप में संदर्भित, ओरफिश आमतौर पर समुद्र के 200 से 1,000 मीटर नीचे पाई जाती है। इसे सतह पर शायद ही कभी जीवित देखा जाता है। यह कमी, इसके अजीब दिखने के साथ मिलकर मिथकों और भय को बढ़ावा देती है।



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