रैगिंग से MBBS के छात्र की किडनी डैमेज, 7 स्‍टूडेंट्स हुए सस्‍पेंड, जानें क्‍या है एंटी रैगिंग कानून?

Anti Ragging Act in India : राजस्थान के जयपुर में मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस के एक स्‍टूडेंट की रैगिंग के वजह से किडनी में इंफेक्शन हो गया इस कारण उसे अस्‍पताल में भर्ती होना पड़ा और 4 बार डायलिसिस करवाना पड़ा। इस मामले में मेडिकल कॉलेज एंटी रैंगिंग कमेटी ने जांच में रैगिंग की पुष्टि होने के बाद सेकंड ईयर के 7 स्टूडेंट को कॉलेज से सस्पेंड कर दिया। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने 7 छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है।

रैंगिग एक ऐसा शब्‍द है जो कई स्‍टूडेंट्स की जान निगल चुका है। वैसे तो सभी शिक्षण संस्‍थानों और विद्यालयों में पूरी तर‍ह बैन लगाया जा चुका है। मगर फिर भी कुछ सीनियर छात्र कॉलेज या स्‍कूल में एडम‍िशन लेने वाले नए छात्रों का परिचय लेने की आड़ में उन्‍हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हैं और उनका उत्‍पीड़न करते हैं।

Dungarpur Medical College Ragging Case

जिसे लोग रैगिंग कहते हैं। इसी की रोकथाम के ल‍िए बना है एंटी रैगिंग कानून, आज आपको बताएंगे क‍ि ये एंटी रैगिंग कानून क्‍या है और इसमें दोषी पाए गए लोगों को क्‍या सजा म‍िलती है।

क्या कहते हैं रैगिंग के कानून

कई सालों से उच्च शिक्षण संस्थानों खासकर इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग की वजह से बढ़ते हादसों से सबक लेते हुए यूजीसी (University Grants Commission) ने रैगिंग के खिलाफ कई कड़े नियम बनाए हैं, जिनके बारे में स्‍टूडेंट्स और अभिभावकों को जानना जरूरी हैं।

ऐसे शुरू हुई थी रैगिंग

कहा जाता है क‍ि ग्रीस में 7वीं और 8वीं शताब्‍दी में स्‍पोटर्स कम्‍यूनिटी में खिलाड़‍ियों में खेल की भावना को मजबूत करने के उद्देश्‍य से इसकी शुरुआत की गई थी। उसके बाद सैन्‍य अधिकारियों ने इसे अपना हिस्‍सा बनाया और फिर धीरे-धीरे स्‍कूल और कॉलेजों में भी छात्रों ने रैगिंग शुरू कर दी।

इसे माना जाता है रैगिंग

- अगर संस्थान या हॉस्टल में किसी स्टूडेंट को उसके रंगरूप या पहनावे के आधार पर टिप्पणी करना।
- स्‍टूडेंट को अजीबोगरीब नाम लेकर पुकारना
- क्षेत्रीयता , भाषा या जाति के आधार पर अपशब्‍दों का इस्‍तेमाल करना और इन अपशब्‍दों को प्रचलित करना भी रैगिंग की श्रेणी में आता है।
- स्टूडेंट की आर्थिक पृष्ठभूमि को लेकर उसे लज्जित करना और अपमान‍ित करना।- स्‍टूडेंट्स को अजीबोगरीब नियमों के तहत परेशान करना या अपमान जनक टास्क देना और उसे जबरदस्‍ती पूरा करवाना भी रैगिंग की श्रेणी में आता है।
- शार‍ीरिक हिंसा, बाल कटवाना, मुर्गा बनाना, किसी भी अन्य तरीके से प्रताड़ित करना भी रैगिंग ही है।
- अभद्र इशारे करना खासकर फीमले स्‍टूडेंट्स की तरफ
- कुल म‍िलाकर ऐसा कोई कृत्‍य जो स्‍टूडेंट्स की गरिमा को ठेस पहुंचाए, वो रैगिंग की श्रेणी में आता है।

दोषी को क्या मिलता है दंड?

यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक अगर कॉलेज रैगिंग की शिकायत करने वाले छात्रों की मदद नहीं करेगा तो पीड़ित यूजीसी के पास जाएं और वहां से जरूर मदद मिलेगी। दोषियों पर रैगिंग रेग्यूलेशन एक्ट के तहत एक्‍शन ल‍िया जाएगा।
रैगिंग विरोधी कानून की बात की जाए तो अब किसी भी कॉलेज में रैगिंग एक बड़ा अपराध है। जिसमें सजा के ल‍िए कई सारे प्रावधान है जैसे-

- रैगिंग का दोष साबित होने छात्रों को तो सजा मिलेगी ही, इसके अलावा संबद्ध कॉलेज पर भी कार्रवाई होगी और उस पर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा।
- दोषी पाए जाने पर क्लास से निलंबित किया जा सकता है। - एडमिशन भी रद्द हो सकता है या सस्‍पेंड क‍िया जा सकता है। - किसी भी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेने से रोका जा सकता है।
- अन्‍य इंस्‍टीट्यूट पर एडम‍िशन पर बैन।
- परीक्षा का परिणाम रोका जा सकता है।
यूजीसी के के अलावा अलग-अलग राज्य सरकार की ओर से भी रैगिंग को लेकर बनाए है जो संबंधित राज्‍य होने से ये कानून भी साथ में लागू होंगे, जैसे त्रिपुरा सरकार ने चार वर्ष, महाराष्ट्र ने दो वर्ष, उत्तर प्रदेश ने दो वर्ष, छत्तीसगढ़ ने पाँच वर्ष तक के कारावास के साथ ही सभी राज्यों ने आर्थिक दंड का प्रावधान भी किया है।

2009 के रैगिंग केसे मिली एंटी रैगिंग कानून को मजबूती

बढ़ते रैगिंग के मामलों को देखते हुए 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने रैगिंग पर बैन लगा दिया था। मगर 2009 में धर्मशाला के राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज में रैगिंग और प्रताड़ना का शिकार हुए छात्र अमन काचरू की मौत के बाद सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए रैगिंग के खिलाफ कानून बनाने के लिए एक कमेटी गठित की और इकड़े नियम औऱ रैगिंग की परिभाषा बनाए जाने पर जोर दिया।

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