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Earthquake in Delhi NCR: आप भी हाईराइज बिल्डिंग्स के फ्लैट में रहते हैं, तो भूकंप से बचने के सेफ्टी टिप्स
Earthquake Safety Tips for High-Rise Residents in NCR : दिल्ली-एनसीआर में सुबह 5:30 बजे आए भूकंप के झटकों ने लोगों को डरा दिया, खासकर ऊंची इमारतें में ऊपरी मंजिलों पर रहने वालों को। ऊंची इमारतें भूकंप के दौरान ज्यादा झूलती हैं, जिससे खतरा अधिक महसूस होता है। इस स्थिति में लोग न तो तुरंत सीढ़ियों से नीचे जा सकते हैं और न ही लिफ्ट का इस्तेमाल कर सकते हैं।
अक्सर टीवी पर भूकंप से बचाव के लिए दीवार के कोनों में खड़े होने की सलाह दी जाती है, जो छोटी इमारतों में सुरक्षित हो सकता है, लेकिन हाईराइज बिल्डिंग्स में नहीं। ऊंची इमारतों की बनावट और नींव अलग होती है, जिससे झटकों का असर अधिक होता है। ऐसे में ऊंची इमारतों में रहने वालों को जागरूक रहना चाहिए और विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए सुरक्षा उपायों को अपनाना चाहिए।

भूकंप आने पर क्यों ज्यादा झूमती है ऊंची इमारतें?
भूकंप के दौरान बड़ी इमारतों का झूलना उनके भूकंपरोधी निर्माण का परिणाम है। ये इमारतें खासतौर पर इस प्रकार डिज़ाइन की जाती हैं कि वे भूकंप के झटकों के दौरान झूल सकें। इसका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि भूकंप की तीव्रता इमारत के भीतर कम हो जाए, जिससे इमारत में रहने वाले लोग सुरक्षित रहें। भूकंप के समय इमारतों के झूलने से जरा भी खतरे का अहसास नहीं होता क्योंकि यह संरचनात्मक रूप से भूकंप का प्रभाव कम कर देता है। सामान्यत: बड़ी इमारतों को 7.3 तक की तीव्रता को सहन करने के लिए डिजाइन किया जाता है, और 8 से अधिक तीव्रता के भूकंप में ही ये इमारतें खतरनाक हो सकती हैं।
ऊंची इमारतें वालों को भूकंप का कितना खतरा है?
पिछले दो दशकों से ऊंची इमारतों में भूकंपरोधी मानकों का पालन किया जा रहा है, और बिना इसके हाइराइज बिल्डिंग्स का निर्माण नहीं किया जा सकता। हालांकि, भूकंप के दौरान ये इमारतें ज्यादा झूलती हैं, जिससे लोगों को डर महसूस होता है, लेकिन दरअसल यह झूलना इन इमारतों की संरचना का हिस्सा है, जो भूकंप की तीव्रता को कम करती है और सुरक्षा सुनिश्चित करती है। केवल दो स्थितियों में ही हाईराइज बिल्डिंग्स खतरनाक हो सकती हैं-जब भूकंप का एपीसेंटर बिल्डिंग के पास हो या भूकंप की तीव्रता 8.0 या उससे अधिक हो। आमतौर पर, ये इमारतें 7.3 तीव्रता तक का झटका सह सकती हैं।
ऊंची इमारतें में रहने वालों के लिए सेफ्टी टिप्स
- भूकंप आने पर हाइराइज बिल्डिंग या ऊंची इमारतें में रहने वालों को घबराहट से बचना चाहिए।
- सीढ़ियों या लिफ्ट की ओर दौड़ने की बजाय, फ्लैट में ही रहना ज्यादा सुरक्षित होगा।
फ्लैट के भीतर सुरक्षात्मक उपाय अपनाएं, जैसे कि टेबल के नीचे चले जाएं या किसी मजबूत फर्नीचर के पास शरण लें।
- घबराकर भागने की बजाय शांत रहें।
- भूकंप के दौरान हाइराइज बिल्डिंग से बाहर निकलना भी खतरनाक हो सकता है, खासकर जब इमारतें एक-दूसरे के पास हों।
- यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो खुले और सुरक्षित इलाके में जाएं, जहां इमारतों का खतरा न हो।
घर में हैं तो क्या करें?
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अनुसार अगर भूकंप आने पर आप घर में हैं, तो इन सेफ्टी टिप्स को फॉलो करना चाहिए।
- जमीन पर झुक जाएं और किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे शरण लें।
- टेबल के नीचे बैठकर मजबूती से पकड़ें जब तक भूकंप के झटके रुक न जाएं।
- यदि मेज या डेस्क नहीं हो, तो चेहरे और सिर को अपने बाजुओं से ढकें और किसी कोने में बैठकर सुरक्षित रहें।
- किसी आंतरिक दरवाजे, कमरे के कोने, या पलंग के नीचे शरण लें।
- शीशे, खिड़कियां, दरवाजों और गिरने वाले फर्नीचर से दूर रहें।
- अगर आप पलंग पर हैं, तो तकिए से सिर ढककर रहें और गिरने वाले लाइट फिक्सचर से बचें।
- सुरक्षित दरवाजे से बाहर तब जाएं जब यह पास हो और मजबूत हो।
- भूकंप के झटके रुकने तक अंदर रहें, बाहर जाने का प्रयास न करें।



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