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Raj Kundra Pornography Case: क्या गंदे वीडियो देखना जुर्म है? भारत में अश्लील कंटेंट को लेकर क्या है कानून?
Raj Kundra Pornography Case : राज कुंद्रा और शिल्पा शेट्टी के घर शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पोर्नोग्राफी मामले में छापेमारी की। इसके साथ ही राज कुंद्रा के दफ्तर और मुंबई व उत्तर प्रदेश की करीब 15 जगहों पर तलाशी ली गई। जांच में ED मोबाइल एप्लिकेशन और अन्य माध्यमों से पोर्नोग्राफी के सर्कुलेशन का पता लगा रही है।
राज कुंद्रा पर आरोप है कि उन्होंने हॉटशॉट नामक एप के जरिए पोर्न कंटेंट का प्रोडक्शन और वितरण किया। यह एप गूगल और एप्पल स्टोर पर उपलब्ध थी, लेकिन 2021 में उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद इसे हटा दिया गया। ED मामले की गहन जांच कर रही है। इससे पहले इसी मामले में राज कुंद्रा को जुलाई 2021 में गिरफ्तार किया गया था। फिर से राज कुंद्रा के ठिकानों पर ED के छापे की वजह से भारत में पोर्नोग्राफी से जुड़े कानूनों को लेकर बहस छेड़ दी है।

वैसे आपको बता दें कि भारत में पोर्नोग्राफ़ी कंटेट यानी अश्लील सामग्री को लेकर सरकारी रूल्स-रेग्युलेशन क्या हैं, किस-किस फॉर्म में पॉर्न बैन है, कानून के उल्लंघन पर सजा का क्या प्रावधान है?
जुलाई 2021 में भी हुई थी राज कुंद्रा की गिरफ्तारी
जुलाई 2021 में राज कुंद्रा को पोर्नोग्राफी मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आईपीसी की धारा 292 और 296 के तहत अश्लील सामग्री बनाने और बेचने का आरोप लगा। धारा 420 के तहत विश्वासघात और धोखाधड़ी का मामला भी दर्ज किया गया।
इसके अलावा, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 और 67(A) के तहत इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री अपलोड और प्रसारित करने का आरोप है। साथ ही, महिलाओं का अविवेकपूर्ण प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम की धारा 2(जी), 3, 4, 6 और 7 के तहत महिलाओं से संबंधित अश्लील फिल्में बनाने, बेचने और प्रसारित करने का मामला भी दर्ज किया गया था। ये आरोप पोर्नोग्राफी रैकेट में उनकी कथित संलिप्तता से जुड़े हैं।
क्या है कानून और सजा?
भारत में पोर्नोग्राफी को लेकर कानून स्पष्ट और सख्त हैं। भारतीय दंड संहिता (IPC) और अन्य विशेष अधिनियम अश्लील सामग्री के निर्माण, वितरण और प्रसारण को रोकने के लिए बनाए गए हैं।
कानूनी प्रावधान
IPC की धारा 292 और 293: अश्लील सामग्री का निर्माण, बिक्री, और वितरण गैरकानूनी है।
आईटी अधिनियम, 2000 (धारा 67 और 67A): इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करने पर जुर्माना और जेल हो सकती है।
महिलाओं का अविवेकपूर्ण प्रतिनिधित्व (निषेध) अधिनियम, 1986: महिलाओं को अश्लील तरीके से दिखाने वाली सामग्री बनाना और प्रसारित करना अपराध है।
बाल यौन शोषण अधिनियम (POCSO): बच्चों से जुड़ी पोर्नोग्राफी पर कठोर प्रतिबंध हैं।
सजा और जुर्माना
अपराध की गंभीरता के आधार पर 5 से 7 साल तक की जेल और ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
बाल पोर्नोग्राफी के मामलों में सजा और जुर्माना और भी कठोर होता है।
पोर्न देखना अवैध नहीं है
भारत में पोर्न देखना अवैध नहीं है, क्योंकि इस पर कोई स्पष्ट कानून नहीं है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद-21 हर नागरिक को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। 2015 में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा था कि निजी कमरे में पोर्न देखना व्यक्तिगत स्वतंत्रता के दायरे में आता है। इसे रोकने के लिए केवल कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जा सकता है। हालांकि, पोर्नोग्राफी का निर्माण, वितरण, और सार्वजनिक रूप से प्रदर्शन पूरी तरह से गैरकानूनी है। इसलिए, जब तक आप इसे अपने निजी स्थान पर देख रहे हैं, यह कानून का उल्लंघन नहीं माना जाता।
अश्लील कंटेट देखना, दिखाना और बेचना.. क्या है गलत?
व्यक्तिगत उपभोग के लिए पोर्नोग्राफी देखना अपराध नहीं है यानी अकेले में पोर्न कंटेट देखना गलत नहीं है। लेकिन इसे दिखाना और सर्कुलेट करना कानूनी दायरे में आता है। इसके अलावा इस तरह के कंटेट बनाना, वितरण, या व्यावसायिक लाभ के लिए प्रसारण पूरी तरह गैरकानूनी है। भारत में पोर्नोग्राफी पर सख्त नियम समाज और नैतिक मूल्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हैं।



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