Latest Updates
-
5 Minute Protein Masala Omelette Recipe: झटपट बनाएं होटल जैसा टेस्टी और हेल्दी नाश्ता -
Aaj Ka Rashifal 20 June 2026: शनिवार को इन 5 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के प्रबल योग -
Restaurant Style Egg Masala Gravy Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसा चटपटा अंडा मसाला -
International Yoga Day 2026: नाभि खिसकने पर करें ये 4 योगासन, मिलेगा तुरंत आराम -
कब से शुरू हो रहे हैं श्राद्ध? जानें तिथि, धार्मिक महत्व और पितरों के तर्पण की सही विधि -
जुलाई 2026 में कितने दिन बंद रहेंगे बैंक? यहां देखें स्टेट वाइज छुट्टियों की लिस्ट -
Restaurant Secret Amritsari Kulcha Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसा कुरकुरा कुलचा -
Father's Day 2026: पापा को स्पेशल फील कराने के लिए बेस्ट हैं ये शॉर्ट स्पीच और कविताएं, जो छू लेंगी दिल -
निर्जला एकादशी व्रत में पानी पी सकते हैं या नहीं? जान लें क्या कहते हैं शास्त्र और नियम -
इन 5 बीमारियों में भूलकर भी न खाएं काजू, स्वाद के चक्कर में बढ़ सकता है मर्ज
जैन धर्म में 'संथारा' क्या है? जिसे 3 साल की ब्रेन ट्यूमर से बीमार बच्ची की मौत के लिए मां-बाप ने चुना
3-Year-Old Girl Dies After Santhara : मध्य प्रदेश के इंदौर से एक हैरान कर देने वाली दुखद घटना सामने आई है, जहां तीन साल, चार महीने और एक दिन की मासूम बच्ची ने जैन धर्म की संथारा प्रथा के तहत प्राण त्याग दिए। उसे इतनी कम उम्र में संथारा अपनाने वाली दुनिया की पहली बच्ची बताया जा रहा है। हालांकि, इस पर कई सवाल भी उठ रहे हैं, और इस मुद्दे को लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है।
जैन धर्म में संथारा एक प्राचीन परंपरा है, जिसमें व्यक्ति स्वेच्छा से खाना-पानी त्यागकर शांतिपूर्वक मृत्यु की ओर बढ़ता है। इस मामले के बाद एक बार फिर से यह प्रथा चर्चा का विषय बन गई है।
वियाना के पिता, पीयूष जैन और वर्षा जैन ने बताया कि उनकी बेटी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थी और इलाज के बाद उसकी स्थिति बिगड़ने लगी थी। 21 मार्च को उन्होंने बच्ची को संथारा दिलवाने का निर्णय लिया, जिसके केवल 10 मिनट बाद वियाना ने प्राण त्याग दिए। इस घटना को लेकर धर्म, नैतिकता और कानूनी दृष्टिकोण से कई बहसें चल रही हैं। आइए जानते हैं पूरा मामला और इस प्रथा के बारे में डिटेल में-

क्या है संथारा?
संथारा, जिसे सल्लेखना भी कहा जाता है, जैन धर्म की एक प्राचीन और आध्यात्मिक परंपरा है। इसमें व्यक्ति स्वेच्छा से भोजन और जल का त्याग करता है, ताकि जीवन के अंतिम चरण में वह आत्मशुद्धि, वैराग्य और शांतिपूर्वक मृत्यु की ओर अग्रसर हो सके। इसे आत्महत्या नहीं माना जाता, बल्कि जैन दर्शन में यह मोक्ष प्राप्ति की ओर एक आध्यात्मिक साधना मानी जाती है। आमतौर पर यह प्रथा बुजुर्ग या गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति द्वारा अपनाई जाती है, जब उन्हें लगता है कि शरीर अब धर्म-अध्यात्म के योग्य नहीं रह गया।
'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में दर्ज हुआ नाम
लेकिन जब इस परंपरा से एक मासूम, महज तीन साल की बच्ची को जोड़ा जाता है, तो सवाल उठते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वियाना को दिसंबर 2024 में ब्रेन ट्यूमर का पता चला था। जनवरी 2025 में उसकी मुंबई में सर्जरी करवाई गई, जिसके बाद कुछ समय के लिए उसकी तबीयत में सुधार हुआ। लेकिन मार्च में दोबारा हालत बिगड़ने लगी। तब माता-पिता बच्ची को जैन संत राजेश मुनि के पास लेकर गए। उन्होंने बच्ची की हालत देखकर कहा कि शायद यह रात भी न निकाल पाए। इसके बाद परिवार ने संथारा की प्रक्रिया शुरू कर दी। बताया गया कि 21 मार्च को वियाना ने संथारा लेने के सिर्फ 10 मिनट बाद प्राण त्याग दिए। इस घटना को 'गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में भी दर्ज किया गया है।
क्या संथारा कानूनी रूप से वैध है?
अब सवाल है कि क्या संथारा कानूनी रूप से वैध है? वर्ष 2006 में राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर इस प्रथा को आत्महत्या बताते हुए उसे अपराध करार देने की मांग की गई थी। 2015 में हाईकोर्ट ने इसे आत्महत्या मानते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 306 और 309 के तहत दंडनीय बताया और राज्य सरकार को रोक लगाने का निर्देश दिया। हालांकि उसी वर्ष सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए संथारा को धार्मिक स्वतंत्रता का हिस्सा माना और कहा कि इसे प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। इस प्रकार, संथारा फिलहाल कानूनी रूप से मान्य धार्मिक परंपरा है।



Click it and Unblock the Notifications