Latest Updates
-
Restaurant Style Kadai Sabzi Recipe: घर पर बनाएं होटल जैसी चटपटी और मसालेदार सब्जी -
Blue Moon 2026: 31 मई को आसमान में दिखेगा दुर्लभ 'ब्लू मून'; जानिए इसकी खासियत, कहां और कैसे देखें -
Hindi Journalism Day: 30 मई को ही क्यों मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस? जानें इस दिन का इतिहास और महत्व -
Kumaoni Sweet Bal Mithai Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड की पारंपरिक और स्वादिष्ट मिठाई -
महिलाओं के लिए वरदान से कम नहीं है हलीम के बीज, अनियमित पीरियड्स समेत इन 5 समस्याओं को कर सकते हैं दूर -
गर्मियों में पसीने से होने वाली 5 कॉमन स्किन प्रॉब्लम्स, एक्सपर्ट से जानें इन समस्याओं से बचने के घरेलू उपाय -
World Digestive Health Day: क्यों मनाया जाता है विश्व पाचन स्वास्थ्य दिवस? जानें इस दिन का महत्व और इतिहास -
Grandma Style Aloo Baingan Recipe: दादी के हाथों जैसा चटपटा और लाजवाब स्वाद -
क्या ज्यादा तनाव लेने से ब्रेन स्ट्रोक हो सकता है? AIIMS न्यूरोसर्जन ने बताई सच्चाई -
June 2026 Vrat Tyohar: निर्जला एकादशी से लेकर वट पूर्णिमा तक, जून के महीने में आएंगे ये प्रमुख व्रत-त्योहार
धरती की 6 सबसे खतरनाक जगहें, यहां की हवा-पानी में है जहर, इनमें से एक है 'पृथ्वी का कब्रिस्तान'
World's Most Radioactive Locations : कुछ जगहें ऐसी हैं जो आज भी खतरनाक रेडिएशन झेल रही हैं, वो भी कई दशक बाद जब वहां कोई बड़ा परमाणु हादसा हुआ था या फिर गुप्त न्यूक्लियर प्रोग्राम चलाया गया था। इन जगहों में से कुछ तो पूरी तरह से आम लोगों के लिए बंद हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि कुछ जगहों पर अब भी लोग रहते हैं, बिना ये जाने कि वो रोज़ रेडिएशन के बीच जी रहे हैं।
यहां हम आपको ऐसी 6 जगहों के बारे में बता रहे हैं जो आज भी रेडियोएक्टिविटी की मार झेल रही हैं। इनका इतिहास डरावना है और खतरा अभी टला नहीं है, इसलिए इन्हें देखना किसी रिस्क से कम नहीं।

मयक न्यूक्लियर प्लांट, रूस
रूस के साउथ यूराल में स्थित ओजर्सक (Ozersk), जिसे 'सिटी 40' भी कहा जाता है, दुनिया का सबसे रेडियोधर्मी शहर माना जाता है। यह पूरी तरह बाहरी दुनिया से कटा हुआ है, यहां से बाहर जाने के लिए स्पेशल वीजा और अंदर आने के लिए परमिशन जरूरी है। कोल्ड वॉर के दौरान सोवियत यूनियन ने अमेरिका के न्यूक्लियर प्रोग्राम की टक्कर में मयक न्यूक्लियर प्लांट यहीं स्थापित किया। यहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए इस शहर को गुप्त रूप से बसाया गया था।
ओजर्सक को 'पृथ्वी का कब्रिस्तान' कहा जाता है और यहां मौजूद 'मौत की झील' दुनिया की सबसे रेडियोधर्मी जगहों में से एक मानी जाती है। 1957 में हुए किश्तिम हादसे में प्लांट में ब्लास्ट हुआ और 200 मिलियन क्यूरी रेडियोएक्टिव मैटेरियल फैला, जिससे पूरा इलाका प्रभावित हुआ।
चेर्नोबिल पावर प्लांट, यूक्रेन
चेर्नोबिल पावर प्लांट यूक्रेन की राजधानी कीव से 130 किलोमीटर उत्तर और बेलारूस सीमा से सिर्फ 20 किलोमीटर दूर है। 1986 में यहां परमाणु रिएक्टर में हुए विस्फोट को दुनिया की सबसे बड़ी न्यूक्लियर त्रासदी माना जाता है। हादसे के बाद यह इलाका पूरी तरह रेडियोएक्टिव हो गया। इसके बावजूद 2019 में एक लाख से ज्यादा लोग इसे देखने पहुंचे। लोग यहां के खौफनाक अतीत को महसूस करने और उस भयानक इतिहास को करीब से देखने के लिए आते हैं, हालांकि यह जगह अब भी रेडिएशन से भरी हुई है।
द पॉलिगॉन, कजाकिस्तान
कजाकिस्तान में मौजूद "द पॉलिगॉन", जिसे सेमिपलाटिंस्क टेस्ट साइट भी कहा जाता है, एक खतरनाक न्यूक्लियर टेस्ट जगह रही है। यहां 1949 से 1989 के बीच कुल 456 परमाणु परीक्षण किए गए। ये इलाका रहने लायक नहीं था, फिर भी यहां करीब 5 लाख से ज्यादा लोग आस-पास रहते थे। इनमें से 2 लाख से ज्यादा लोग आज भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। सोवियत सरकार ने सालों तक इस सच्चाई को छुपाए रखा। आज भी यह जगह दुनिया की सबसे ज्यादा स्टडी की गई न्यूक्लियर साइट्स में से एक है।
सेलाफील्ड, यूके
सेलाफील्ड, यूके में स्थित ये प्लांट पहले विंडस्केल के नाम से जाना जाता था। 1957 में यहां ब्रिटेन की सबसे बड़ी न्यूक्लियर दुर्घटना हुई थी, जब आग लगने से रेडियोधर्मी कण नॉर्दर्न इंग्लैंड तक फैल गए थे। एक समय ऐसा भी था जब यहां से हर दिन करीब 80 लाख लीटर दूषित पानी आयरिश सी में फेंका जाता था। आज के समय में सेलाफील्ड पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा न्यूक्लियर वेस्ट संभालने वाली जगह बन चुकी है। यह जगह अब भी रेडिएशन से जुड़ी बड़ी चिंताओं में गिनी जाती है।
फुकुशिमा दाइइचि न्यूक्लियर प्लांट, जापान
2011 में जापान में आए भूकंप और सुनामी ने फुकुशिमा दाइइचि न्यूक्लियर प्लांट को बुरी तरह तबाह कर दिया। तीन रिएक्टर फेल हो गए और रेडियोएक्टिव पानी सीधे पैसिफिक ओशन में चला गया। इसके बाद हाइड्रोजन ब्लास्ट से कंटेनमेंट स्ट्रक्चर भी टूट गए। प्लांट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन अब भी रेडिएशन लीक हो रहा है। इसे पूरी तरह खत्म करने में 40 साल से ज्यादा लग सकते हैं। हादसे के बाद हजारों लोगों को वहां से हटाया गया, लेकिन समुद्र में फैलता जहर आज भी चिंता की वजह बना हुआ है।
माइलू-सू, किर्गिस्तान
कोल्ड वॉर के दौर में माइलू-सू, किर्गिस्तान सोवियत यूनियन का बड़ा यूरेनियम माइनिंग टाउन था। आज भी यहां दर्जनों रेडियोधर्मी कचरे के ढेर आबादी वाले इलाकों के पास पड़े हैं, जो भूस्खलन या भूकंप में बहकर फैल सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो पास की नदियों का पानी जहरीला हो जाएगा, जिससे लाखों लोग प्रभावित हो सकते हैं। यहां की पुरानी और जर्जर व्यवस्था के चलते ये जगह अब भी एक बड़ा रेडियोलॉजिकल खतरा बनी हुई है, लेकिन इसे लेकर कोई ठोस कदम अभी तक नहीं उठाया गया है।



Click it and Unblock the Notifications