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Harish Rana Funeral Video: गायत्री जाप और 2 मिनट का मौन...13 साल बाद पंचतत्व में विलीन हुए हरीश राणा
Harish Rana Last Rites: 4,700 से अधिक रातें... एक बिस्तर, मशीनों की गूंज और अपनों की उम्मीद भरी निगाहें। गाजियाबाद के हरीश राणा, जिन्होंने 13 साल तक कोमा के अंधेरे में जिंदगी और मौत के बीच एक ऐसी लड़ाई लड़ी, जिसने पूरे देश के कानून और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया। मंगलवार को दिल्ली के एम्स (AIIMS) में अपनी अंतिम सांस लेने वाले हरीश राणा बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गए।
यह केवल एक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि एक थके हुए योद्धा की उस शांति की ओर विदाई थी, जिसकी मांग उनके परिवार ने सुप्रीम कोर्ट तक से की थी। गायत्री मंत्रों के जाप और नम आंखों के बीच जब हरीश को अंतिम विदाई दी गई, तो श्मशान घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। हरीश राणा के अंतिम संस्कार पर उनके पड़ोसी और सोसाइटी के सभी लोग पहुंचे, औरतों की संख्या बहुत अधिक थी। सभी ने नम आंखों से हरीश राणा को अंतिम विदाई दी।

गायत्री जाप और 10 मिनट का मौन ऐसे हुई अंतिम विदाई
अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू होने से पहले वहां मौजूद परिजनों, पड़ोसियों और दोस्तों ने गायत्री मंत्र का जाप किया। हरीश की आत्मा की शांति के लिए 10 मिनट का मौन रखा गया। इस दुखद घड़ी में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। उन्होंने कहा, इस परिवार ने अपने बेटे का बहुत लंबा दर्द देखा है। हरीश ने जाते-जाते भी अंगदान कर जो मिसाल पेश की है, वह कोई महान व्यक्तित्व ही कर सकता है। हरीश के अंतिम संस्कार के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं जिन्हें देख लोग भावुक हो रहे हैं।
भाई-बहन ने दी मुखाग्नि
हरीश राणा की अंतिम यात्रा बुधवार को दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट पहुंची। कल शाम को ही ये पता चल गया था कि बुधवार की सुबह 9 बजे हरीश का अंतिम संस्कार किया जाएगा। इसलिए पहले से ही सारी तैयारी हो चुकी थी और इस मौके पर भारी संख्या में लोग वहां पहुंचे और हरीश को नम आंखों से विदा किया। यहां का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। हरीश को उनके भाई आशीष और उनकी बहन ने मिलकर मुखाग्नि दी।
गाजियाबाद हरीश राणा की कहानी
हरीश राणा की कहानी साल 2013 में शुरू हुई थी, जब पंजाब विश्वविद्यालय में बीटेक की पढ़ाई के दौरान वह चौथी मंजिल की बालकनी से गिर गए थे। हरीश राणा उस समय अपनी बहन से फोन पर बात कर रहे थे और अचानक से बालकनी से नीचे गिर गए। अभी तक ये नहीं पता चला है कि आखिर ये हादसा हुआ कैसे।
सिर में गंभीर चोट के कारण वह 'पर्मानेंट वेजिटेटिव स्टेट' (कोमा) में चले गए। तब से वह कृत्रिम पोषण और पाइप के जरिए दी जा रही ऑक्सीजन के सहारे जीवित थे। उनके माता-पिता ने उनकी पीड़ा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की गुहार लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला और अंत
बीते 11 मार्च को उच्चतम न्यायालय ने हरीश राणा के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी। इसके बाद उन्हें गाजियाबाद स्थित घर से एम्स के 'पैलियेटिव केयर यूनिट' में शिफ्ट किया गया था। मंगलवार को 32 वर्षीय हरीश ने इस नश्वर संसार को सदा के लिए त्याग दिया।



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