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राजस्थान के इस गांव में हर साल कराई जाती है दो लड़कों की शादी, क्या है यह होली की अजब प्रथा?
होली का त्योहार भारत के विभिन्न हिस्सों में अनूठे अंदाज में मनाया जाता है, जिसमें हर क्षेत्र की विशेष परंपराएं और मान्यताएं देखने को मिलती हैं। राजस्थान के मेवाड़ इलाके के बांसवाड़ा जिले के बड़ोदिया गांव में एक अनोखी होली परंपरा निभाई जाती है, जो हर साल चर्चा का विषय बनती है। इस गांव में होली के मौके पर दो लड़कों की आपस में शादी कराने की अनूठी परंपरा है, जिसे हंसी-मजाक और उत्साह के साथ निभाया जाता है। बांसवाड़ा जिले के बड़ोदिया गांव में यहा परांपरा 600 साल पुरानी है।
बांसवाड़ा के बड़ोदिया गांव की यह अनोखी होली परंपरा न केवल गांववालों के बीच आपसी प्रेम और एकता का प्रतीक है, बल्कि हंसी-मजाक और मनोरंजन से भरा एक अनूठा आयोजन भी है, जो इस त्योहार को और खास बना देता है।

सैकड़ों साल पुरानी परंपरा
बड़ोदिया गांव में यह अनोखी रस्म सदियों से चली आ रही है। होली से पहले चौदस की रात को गांव के मुखिया की अगुवाई में युवाओं का एक समूह इकट्ठा होता है और विवाह की प्रक्रिया शुरू होती है। इस शादी को स्थानीय भाषा में "गेरिया" कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, इसमें केवल वे लड़के भाग ले सकते हैं जिनका अभी तक यज्ञोपवीत संस्कार (जनेऊ संस्कार) नहीं हुआ है।
शादी के लिए लड़कों की खोज
शादी के लिए सबसे पहले ढोल-नगाड़ों के साथ गेरियों का एक समूह पूरे गांव में घूमता है और विवाह के लिए दो लड़कों की तलाश करता है। जो लड़का पहले मिलता है, उसे दूल्हा बना दिया जाता है और मंदिर में ले जाकर मंडप में बिठा दिया जाता है। फिर दूसरे लड़के की तलाश की जाती है, जिसे वधू बनाया जाता है।
दूल्हा-दुल्हन की तरह शादी की रस्में
गांव के मंदिर में मंडप सजाया जाता है, जहां पंडित पूरे विधि-विधान के साथ शादी की रस्में पूरी कराते हैं। अग्नि के समक्ष दोनों लड़कों के सात फेरे होते हैं और विवाह के सात वचन दिलाए जाते हैं। इस अनूठी शादी के बाद गांववाले पूरी रात नाच-गाने और हंसी-मजाक के साथ इस परंपरा का आनंद लेते हैं।
शादी के बाद शोभायात्रा
अगले दिन शादी संपन्न होने के बाद, दूल्हा और दुल्हन बने लड़कों को बैलगाड़ी में बैठाकर पूरे गांव में घुमाया जाता है। इस शोभायात्रा के दौरान गांववाले नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद देते हैं और उन्हें उपहार भी भेंट करते हैं।
परंपरा के पीछे की मान्यता
ऐसा माना जाता है कि वर्षों पहले बड़ोदिया गांव को एक नाला दो भागों में विभाजित करता था। गांव के लोग इस विभाजन को मिटाने और आपसी प्रेम बनाए रखने के लिए एक अनोखा उपाय लेकर आए। उन्होंने गांव के दोनों हिस्सों से एक-एक लड़के को चुना और उनकी आपस में शादी करा दी। धीरे-धीरे यह प्रथा होली के पर्व से जुड़ गई और इसे हर साल निभाया जाने लगा।



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