Latest Updates
-
Shardiya Navratri 2026 Day 8: नवरात्रि के आठवें दिन करें मां महागौरी की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Durga Ashtami 2026 Wishes: महागौरी की कृपा...इन संदेशों के साथ अपनों को दें दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं -
सिर्फ गांठ ही नहीं, ये 5 संकेत भी हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर का लक्षण, साधारण समझकर इग्नोर करने की न करें भूल -
Maha Navami 2026: 19 या 20 अक्तूबर, महानवमी कब है? जानें तिथि, हवन और कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त -
SRH की मालकिन काव्या मारन की शादी हुई तय! कौन है दुल्हा, कब और कहां होगी वेडिंग, जानिए पूरी डिटेल्स -
Ashtami Kab Hai: 18 या 19 अक्टूबर, कब है अष्टमी? जानें सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Shardiya Navratri 2026 Day 7: नवरात्रि के सातवें दिन करें मां कालरात्रि की पूजा, जानें विधि, मंत्र, भोग, आरती -
Navratri Day 7 Wishes: मां कालरात्रि का आशीर्वाद...इन संदेशों के साथ अपनों को भेजें महासप्तमी की शुभकामनाएं -
‘रामायण’ के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रणबीर कपूर की घड़ी क्यों हुई वायरल? कीमत सुन उड़ जाएंगे होश, जानें खासियत -
लंबे समय तक बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी को पहुंचता है नुकसान, डॉक्टर ने बताया इतने घंटे में ब्रेक जरूरी
Zakir Hussain Net Worth : कभी 5 रुपए मेहनताना से शुरु किया था कभी करियर, पीछे छोड़ गए करोड़ों की संपत्ति
How much did Zakir Hussain charge per concert : संगीत जगत उस्ताद जाकिर हुसैन के निधन पर शोक मना रहा है। अपनी धुनों से दुनियाभर के दिलों को छूने वाले तबला वादक का 15 दिसंबर को सैन फ्रांसिस्को में 73 वर्ष की आयु में इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण निधन हो गया। मात्र 5 रुपये में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय संगीत कार्यक्रम से लेकर पांच ग्रैमी पुरस्कार जीतने वाले मशहूर उस्ताद बनने तक का उनका सफर में उनकी मेहनत और लगन साफ नजर आती हैं।
उस्ताद जाकिर हुसैन अपने पीछे एक बेहतरीन विरासत छोड़ गए हैं। उन्होंने अपने तबले की थाप से दुनियाभर के लोगों को मंत्रमुग्ध किया। नौ मार्च 1951 को मशहूर तबला वादक उस्ताद अल्लाह रक्खा के घर जन्मे जाकिर ने मुंबई में अपनी पढ़ाई पूरी की और बचपन से ही पिता से तबला वादन के गुण सीखे।

जानकारी के अनुसार, जाकिर हुसैन ने 11 साल की उम्र में अपनी पहली परफॉर्मेंस दी, जिसके लिए उन्हें केवल 5 रुपए मिले थे। समय के साथ उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि वे एक कंसर्ट के लिए 5 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक चार्ज करने लगे। उनकी अधिकांश आय तबला वादन से हुई, जिसने उन्हें कला जगत में अमर बना दिया।
हमेशा याद रही पहली कमाए हुए 5 रुपए
12 साल की उम्र में जाकिर हुसैन अपने पिता के साथ एक कॉन्सर्ट में गए, जहां पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खान, बिस्मिल्लाह खान, पंडित शांता प्रसाद, और पंडित किशन महाराज जैसे दिग्गज मौजूद थे। परफॉर्मेंस के बाद जाकिर को 5 रुपए मिले। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उन्होंने जीवन में बहुत पैसे कमाए, लेकिन वे 5 रुपए आज भी उनके लिए सबसे कीमती है।
करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए
उस्ताद जाकिर हुसैन अपने पीछे करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी अनुमानित नेटवर्थ लगभग 1 मिलियन डॉलर (करीब 8.48 करोड़ रुपये) थी। उनकी प्रमुख आय का स्रोत तबला वादन था, लेकिन वे कई कॉन्सर्ट और अन्य माध्यमों से भी कमाई करते थे। जाकिर हुसैन ने 22 वर्ष की उम्र में 1973 में अपनी पहली एल्बम लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड लॉन्च की थी, जिसने उन्हें बड़ी ख्याति दिलाई। उनकी कला और योगदान ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि संगीत जगत में उनका नाम अमर कर दिया।
जनरल कोच से करते थे कभी सफर
शुरुआती दिनों में उस्ताद जाकिर हुसैन पैसों की तंगी के कारण ट्रेन के जनरल कोच में सफर करते थे। सीट न मिलने पर फर्श पर अखबार बिछाकर सो जाते और तबले को अपनी गोद में लेकर संभालते, ताकि किसी का पैर उस पर न लगे।
लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड था पहला एल्बम
जाकिर हुसैन को 11 साल की उम्र में पहली बार अमेरिका में कॉन्सर्ट करने का मौका मिला था। 1973 में उनकी पहली एल्बम लिविंग इन द मैटेरियल वर्ल्ड रिलीज हुई, जिसने उन्हें ख्याति दिलाई। 1997 में, वे फिल्म साज में शबाना आजमी के साथ नजर आए और इसमें अभिनय किया। जाकिर को प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में ह्यूमैनिटीज काउंसिल द्वारा ओल्ड डोमिनियन फेलो नामित किया गया था। इसके अलावा, वे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे, जहां उन्होंने अपनी संगीत विशेषज्ञता से छात्रों को प्रेरित किया।



Click it and Unblock the Notifications
