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India-Pakistan Conflict: रेड और ग्रीन सायरन अलर्ट में क्या अंतर होता है, इनकी आवाज सुनते ही क्या करें?
Red vs Green Alerts Sirens : भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव की स्थिति में आम जनता की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन जाती है। ऐसे हालात में सरकार की ओर से सुरक्षा के तौर पर विभिन्न अलर्ट सायरनों का उपयोग किया जाता है, खासकर शाम के समय। इन सायरनों की आवाजें न सिर्फ खतरे की सूचना देती हैं, बल्कि ये यह भी बताती हैं कि आम लोगों को किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए। इसलिए इनकी पहचान और उनके अर्थ को समझना बेहद जरूरी है।
भारत और पाकिस्तान के मध्य सीजफायर के उल्लघंन के बाद अब सरहदी इलाको में जंग की स्थिति बन गई है। ऐसे में चंडीगढ प्रशासन ने भी लोगों को अलर्ट करते हुए वीडियो जारी किया है, चालिए जानते हैं कि रेड और ग्रीन अलर्ट सायरन की आवाज कैसे पहचानें और इस दौरान क्या करना चाहिए?

सायरन का उपयोग क्यों होता है?
जब भी युद्ध की स्थिति बनती है या किसी प्रकार का हवाई हमला, मिसाइल अटैक या अन्य खतरा आसन्न होता है, तो सरकार की ओर से सायरन बजाया जाता है ताकि नागरिकों को समय रहते सतर्क किया जा सके। सायरन एक चेतावनी प्रणाली है, जो लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने, आश्रयों में छिपने या अन्य जरूरी कदम उठाने की सूचना देता है।
यह सायरन सामान्य अलार्म या एंबुलेंस की आवाज से अलग होता है। यह एक बहुत तेज आवाज वाला सिस्टम होता है, जिसकी आवाज़ 2 से 5 किलोमीटर तक सुनाई दे सकती है और इसकी ध्वनि तीव्र होती है, लगभग 120 से 140 डेसिबल के बीच। यह सिस्टम विशेष रूप से तैयार किया गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसे सुनकर तत्काल प्रतिक्रिया कर सकें।
— Chandigarh Admn (@chandigarh_admn) May 10, 2025
रेड और ग्रीन अलर्ट में क्या अंतर है?
युद्धकालीन सायरन मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं, रेड अलर्ट और ग्रीन अलर्ट। दोनों की ध्वनियां अलग-अलग होती हैं और उनके संकेत भी भिन्न होते हैं। नीचे इन दोनों प्रकार के सायरनों की पहचान और उनके महत्व को विस्तार से बताया गया है।
रेड अलर्ट सायरन
रेड अलर्ट सायरन जिसे वॉर सायरन यानी युद्ध सायरन भी कहा जाता है। उस समय बजाया जाता है जब तत्काल कोई खतरा जैसे कि हवाई हमला, मिसाइल हमला या बमबारी की संभावना होती है। इसकी आवाज में ऊँच-नीच होती है, यानी यह ध्वनि लहर की तरह ऊपर-नीचे जाती है। यह आवाज व्यक्ति के मन में बेचैनी उत्पन्न करती है और तुरंत सतर्क होने की चेतावनी देती है।
रेड अलर्ट सायरन की विशेषताएं
- आवाज ऊंची-नीची यानी wailing tone में होती है।
- लगभग 5 मिनट तक यह सायरन बज सकता है।
- इसका उद्देश्य लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने या भूमिगत आश्रयों में छिपने की चेतावनी देना होता है।
- इस सायरन को सुनते ही लोगों को तत्काल सतर्क हो जाना चाहिए और अपने निकटतम शरण स्थल की ओर जाना चाहिए।
- बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को प्राथमिकता दें।
- सार्वजनिक परिवहन बंद हो सकता है, इसलिए वाहन चलाने से बचें।
रेड अलर्ट सायरन बजते ही क्या करें?
अगर युद्ध सायरन बजे, तो घबराने की बजाय सतर्क रहना जरूरी है। गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, तुरंत खुले स्थान छोड़कर सुरक्षित जगह पर जाएं और 5-10 मिनट में सुरक्षित स्थान पर पहुंचें। अफवाहों से बचें और टीवी-रेडियो पर सरकारी निर्देशों को सुनें। आपातकालीन स्थिति में इमारत में हों तो बेसमेंट या शेल्टर में शरण लें। इस स्थिति में शांति और जागरूकता ही ऐसे हालात में सबसे बड़ा हथियार है।
ग्रीन अलर्ट सायरन
जब खतरा टल जाता है और स्थिति सामान्य हो जाती है, तब ग्रीन अलर्ट सायरन बजाया जाता है। यह लोगों को यह बताने का संकेत है कि आम नागरिक जरूरी काम के लिए घर से बाहर निकल सकते हैं। अगर जरूरत हो तो इमारतों में लाइट भी जलाई जा सकती है। यह संकेत होता है कि तत्काल खतरा टल गया है।
ग्रीन अलर्ट सायरन की विशेषताएं
- इसकी ध्वनि स्थिर होती है यानी steady tone, बिना किसी उतार-चढ़ाव के।
- यह सायरन आमतौर पर लगभग 1 मिनट तक चलता है।
- इसका उद्देश्य लोगों को यह जानकारी देना होता है कि अब खतरा समाप्त हो चुका है और वे सुरक्षित हैं।
क्यों जरूरी है सायरनों की सही पहचान?
तनाव या युद्ध जैसी आपात स्थितियों में समय पर प्रतिक्रिया देना ही जीवन रक्षा का सबसे बड़ा उपाय होता है। यदि कोई व्यक्ति रेड और ग्रीन अलर्ट सायरनों के बीच फर्क नहीं कर पाता, तो वह अनजाने में खतरे में पड़ सकता है।
रेड अलर्ट की स्थिति में यदि कोई बाहर निकलता है, तो जान का खतरा हो सकता है। वहीं, ग्रीन अलर्ट की सूचना पर यदि लोग लंबे समय तक आश्रय में ही बने रहते हैं, तो संसाधनों की बर्बादी और मानसिक तनाव बढ़ सकता है।



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