क्या आप जानते हैं 'I Love You' को संस्कृत में क्या कहते हैं? जानें देव भाषा में प्यार व्यक्त करने सुंदर शब्द

How To Say I Love You in Sanskrit: आई लव यू 'I Love You' एक ऐसा शब्द है जो दो लोगों के बीच के प्यार को दर्शाता है। फिर चाहे वो प्यार कपल के बीच का हो या कोई और। आज के समय में तो ये शब्द इतना लोकप्रिय हो गया है कि हर किसी की जुबान पर बस आई लव यू ही रहता है। हिंदी में इसे कहते हैं मैं तुमसे प्यार करती हूं या करता हूं। गुजराती में 'तमे प्रेम करुं छू' पंजाबी में 'मैं तेनु प्यार करदा हां' लेकिन क्या आपने सोचा है कि देवभाषा संस्कृत में क्या कहते हैं? शायद 100 में से 80 लोगों को इसका उत्तर नहीं पता होगा। एक पॉडकास्ट में, प्रसिद्ध विद्वान डॉ. संपदानंद मिश्र ने बताया कि संस्कृत में आई लव यू को क्या कहते हैं और इसका महत्व किया है।

आप सभी के लिए भी इस बात को जानना बहुत जरूरी है। आइए फिर जल्दी से जान लेते हैं कि संस्कृत में इस प्यार वाले शब्द को क्या कहा जाता है?

संस्कृत में आई लव यू क्या है?

प्रसिद्ध विद्वान डॉ. संपदानंद मिश्र ने बड़े ही स्पष्ट शब्दों में बताया कि संस्कृत भाषा सबसे अलग है तभी तो उसे देवभाषा कहा जाता है। उन्होंने बताया कि इंग्लिश में 'I Love You' में यू ओबजेक्ट है जिसे इस्तेमाल करो और फेंक दो। मगर संस्कृत में ऐसा नहीं है, उसमें प्यार का एक अलग ही अर्थ है। संस्कृत भाषा में आई लव यू के अर्थ में बताया जाता है कि प्यार यूनिवर्सल होता है जो हर किसी के अंदर होता है।

How To Say I Love You in Sanskrit

संस्कृत में आई लव यू को क्या कहते है?

कम ही लोगों को पता होगा कि संस्कृत में 'I love you' को 'अहं त्वयि स्निह्यामि' (अहम् त्वयि स्निह्यामि) कहते हैं, जिसका अर्थ है 'मैं तुममें स्नेह करता हूं' या 'मैं तुमसे प्यार करता हूं'। यह प्रेम की एक गहन और आत्मिक भावना को दर्शाता है, और प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं के लिए संस्कृत में कई अन्य शब्द भी मौजूद हैं, जैसे 'अनुराग'। अगर शब्दों के अर्थ की बात करे तो अहं: (अहम्): मैं त्वयि: तुममें (यहाँ 'तुम' के लिए 'त्वम्' का उपयोग अधिक व्याकरणिक रूप से सही होता है, लेकिन 'त्वयि' का उपयोग भी आम है) स्निह्यामि: स्नेह करता हूं/करती हूं।

संस्कृत को दिव्य भाषा माना जाता है

प्रसिद्ध विद्वान डॉ. संपदानंद मिश्र ने कहा कि वैसे तो ये एक विरोधाभास है। मगर संस्कृत एक ऐसी भाषा जिसे दिव्य माना जाता है, फिर भी वह 'मृत' प्रतीत होती है। लेकिन सच्चाई यह है कि संस्कृत सर्वत्र है। यह हमारी आधुनिक भाषाओं में, हमारे दर्शन में, और यहां तक कि तकनीक के भविष्य में भी मौजूद है।

Story first published: Wednesday, September 24, 2025, 11:37 [IST]
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