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Human Rights Day Shayari: मानवाधिकार दिवस पर जरूर पढ़ें 'हक़' से जुड़ी शायरी
Human Rights Day 2023 Shayari: मानवाधिकार मानव अस्तित्व के लिए आधारभूत होते हैं। ये हर व्यक्ति को अहिंसा, भेदभाव से बचाव के साथ साथ कुछ ऐसे मूलभूत अधिकार देते हैं जिससे उनका जीवन साकार हो सकें। विश्व भर में मानवाधिकार दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है। यह उस दिन की याद दिलाता है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूडीएचआर) को अपनाया था।
यह घोषणापत्र 10 दिसंबर 1948 को पेरिस में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा घोषित किया गया था और पहली बार, मौलिक मानवाधिकारों को विश्वभर में सार्वभौमिक रूप से संरक्षित करने का प्रावधान किया गया था।

मानव अधिकार दिवस का उद्देश्य सभी मानवों को उनके अधिकारों और स्वतंत्रता के प्रति जागरूक करना है। यह दिन एक मानवीय समाज की दिशा में समर्पित है जो सभी को समानता, न्याय की दिशा में एकता बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
यह दिन सभी व्यक्तियों की अंतर्निहित गरिमा को पहचानने और उसे कायम रखने के महत्व को रेखांकित करता है। यह इस बात पर जोर देता है कि प्रत्येक व्यक्ति, मानव होने के नाते, कुछ अधिकारों और स्वतंत्रता का हकदार है। इंसान के हक़ से जुड़ी तथा अन्य शायरी मानवाधिकार दिवस के मौके पर जरूर पढ़ें और अपनों के साथ शेयर करें।
1.
ज़िंदा रहने का हक़ मिलेगा उसे
जिस में मरने का हौसला होगा
- सरफ़राज़ अबद
2.
आदमी का आदमी हर हाल में हमदर्द हो
इक तवज्जोह चाहिए इंसाँ को इंसाँ की तरफ़
हफ़ीज़ जौनपुरी
3.
बोलते क्यूं नहीं मिरे हक़ में
आबले पड़ गए ज़बान में क्या
- जौन एलिया
4.
बात हक़ है तो फिर क़ुबूल करो
ये न देखो कि कौन कहता है
- दिवाकर राही
5.
कमजोरो का शोषण हमेशा ताकतवर के द्वारा हुआ है,
ताकतवर पर लगाम लगाने के लिए मानवाधिकार आयोग है
6.
हमारे हक़ में दुआ करेगा
वो इक न इक दिन वफ़ा करेगा
- नासिर राव
7.
क्या क्या ग़ुबार उठाए नज़र के फ़साद ने
इंसानियत की लौ कभी मद्धम न हो सकी
आल-ए-अहमद सूरूर
8.
इसी लिए तो यहाँ अब भी अजनबी हूँ मैं
तमाम लोग फ़रिश्ते हैं आदमी हूँ मैं
- बशीर बद्र
9.
क्या क्या ग़ुबार उठाए नज़र के फ़साद ने
इंसानियत की लौ कभी मद्धम न हो सकी
- आल-ए-अहमद सूरूर
10.
विश्व मानवाधिकार दिवस
जाति, लिंग, राष्ट्रीयता, भाषा और धर्म,
भेदभाव करना नही है इंसान का कर्म
11.
ख़ारिज इंसानियत से उस को समझो
इंसाँ का अगर नहीं है हमदर्द इंसान
तिलोकचंद महरूम
12.
रखते हैं जो औरों के लिए प्यार का जज्बा
वो लोग कभी टूट कर बिखरा नहीं करते
13.
हर इंसान प्यार का है हकदार,
सबको मिले समानता का अधिकार
14.
प्यार की चाँदनी में खिलते हैं
दश्त-ए-इंसानियत के फूल हैं हम
- मसूद मैकश मुरादाबादी
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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