Latest Updates
-
इस Mother's Day मां को दें किचन से 'Off', बिना गैस जलाए 10 मिनट में बनाएं ये 3 लाजवाब डिशेज -
Mother's Day 2026: 50 की उम्र में चाहिए 30 जैसा ग्लो ! महंगे फेशियल नहीं आजमाएं ये 5 घरेलू नुस्खे -
Mother's Day Wishes for Chachi & Tai Ji: मां समान ताई और चाची के लिए मदर्स डे पर दिल छू लेने वाले संदेश -
क्या आपने कभी खाया है 'हरामजादा' और 'गधा' आम? मिलिए Mango की उन 14 किस्मों से जिनके नाम हैं सबसे अतरंगी -
Mother's Day 2026 Wishes for Bua & Mausi: मां जैसा प्यार देने वाली बुआ और मौसी को भेजें मदर्स डे पर ये संदेश -
Periods Delay Pills: पीरियड्स टालने वाली गोलियां बन सकती हैं जानलेवा, इस्तेमाल से पहले जान लें ये गंभीर खतरे -
वजन घटाने के लिए रोज 10K कदम चलना सबसे खतरनाक, एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले दुष्परिणाम -
Maharana Pratap Jayanti 2026 Quotes: महाराणा प्रताप की जयंती पर शेयर करें उनके अनमोल विचार, जगाएं जोश -
Shani Gochar 2026: रेवती नक्षत्र में शनि का महागोचर, मिथुन और सिंह सहित इन 5 राशियों की लगेगी लॉटरी -
Aaj Ka Rashifal 9 May 2026: शनिवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, धन लाभ के साथ चमकेंगे सितारे
कभी स्वतत्रंता सेनानियों को इन जेलों में मिली थी यातनाएं, अब टूरिस्ट करने आते हैं सैर
आजादी से पहले स्वतंत्रा सेनानियों के हौसले को पस्त करने के लिए अंग्रेज सरकार इन्हें पकड़कर जेल में डाल देती थी और उन पर राजद्रोह का मुकादमा चलाकर उन्हें खूब यातनाएं देती थी। हम ऐसे कई स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में पढ़ चुके हैं जिन्होंने जेल में यातना झेलते हुए हुए जान दे दी।
अंग्रेजों ने ऐसी जेलों का निर्माण देश के कई हिस्सो में की थी, ताकि भारत की जगह-जगह से उठने वाली बगावत की आग को बुझा दी जाए। जहां कुछ जेलों में आज भी कैदियों को बंदी बनाकर रखा जाता है, तो वहीं कुछ जेल टूरिस्ट स्पॉट बन चुके हैं। यहां दूर-दूर से सैलानी इन्हें देखने पहुंचते हैं। अंग्रेंजों की शासनकाल में बनी ये जेल अब देश में जेल टूरिज्म को प्रमोट कर रहे हैं।

सेल्युलर जेल (Andaman Cellular Jail)
भारत के अंडमान निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी सेल्युलर जेल पर्यटकों के बीच काफी फेमस है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों को 'कालापानी' की सजा देने के लिए बंद किया जाता था।
1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के समय जापानियों ने द्वीपों पर आक्रमण किया था और इसे ब्रिटिश कैदियों का घर बना दिया था। 1945 में अंग्रेजों ने इसे फिर से अपने कब्जे में ले लिया गया। आज भले इस जेल को राष्ट्रीय स्मारक में बदल दिया गया हो लेकिन बटुकेश्वर दत्त और वीर सावरकर जैसे अनेक सेनानियों की कहानी आज भी यह जेल सुनाती है। वर्तमान में लोग यहां पर एक साउंड एंड लाइट शो द्वारा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की गाथा सुनाई जाती है। सेल्युलर जेल सोमवार और सार्वजनिक छुट्टियों को छोड़कर हर दिन पर्यटकों के लिए खुला रहता है।
हिजली जेल (Hijli Jail)
वेस्ट बंगाल में स्थित हिजली जेल को 1930 ई. में हिजली डेटिनेशन कैंप के तौर पर तैयार किया गया था। यह जेल स्वतंत्रता सेनानियों के लिए यातनागृह से कम नहीं है। इस जेल के अंदर 1931 में हुआ हिजली फायरिंग कांड इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जेल के अंदर पुलिस ने निहत्थे कैदियों पर गोलियों की बारिश कर दी थी, जिसमें कईयों की जान चली गई थी। 1951 में स्वतंत्रता के बाद इसी स्थान पर देश की पहली आईआईटी खड़गपुर की नींव पड़ी। फॉर्मर डेटेनेशन कैंप अब नेहरू म्यूजियम में तब्दील हो चुका है।
वाइपर आइसलैंड की जेल
गैलोस ऑफ वाइपर आइसलैंड पोर्ट ब्लेयर की सेल्युलर जेल की तरह फेमस नहीं है। भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में इस जेल का बहुत बड़ा योगदान हैं। इस जेल को सेल्युलर जेल के बहुत पहले बनाया गया था। अगर कोई भारतीय ब्रिटिश शासन के खिलाफ बोलता था तो उसे इसी जेल में लाकर शारीरिक प्रताड़ना दी जाती थी। अब यहां लोग घूमने आते हैं।
यरवदा जेल (Yerwada Jail, Maharashtra)
महाराष्ट्र में बनी जेल भारत की सबसे हाई सिक्योरिटी जेलों में से एक हैं। इस जेल को अंग्रेजों ने 1871 में बनवाया था। यरवदा जेल में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 30 से 40 के दशक में महात्मा गांधी को अंग्रेजों ने इसी जेल में डाला था। यहां एक टेक्स्टाइल मिल और एक रेडियो स्टेशन भी है। यहां आज भी कैदियों को गांधीवादी सिद्धांत पढ़ाया जाता है। इस जेल को आप बाहर से देख सकते हैं।
मद्रास सेंट्रल जेल (Madras Central Jail)
2009 के अंत में ध्वस्त होने से पहले भारत की सबसे पुरानी जेल थी। ऐसा माना जाता है कि पोर्ट ब्लेयर के सेल्युलर जेल में 'कालापानी' की सजा पाने वाले कैदियों को स्थानांतरित करने से पहले उन्हें यहां कैद किया जाता था। नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर जैसे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों ने इस प्रायद्वीप में समय बिताया था। वर्तमान में, जेल परिसर के एक हिस्से का पुनर्निर्माण किया गया है और उसे मद्रास मेडिकल कॉलेज के भवन के रूप में उपयोग किया जा रहा है।



Click it and Unblock the Notifications